हरियाणा के मेगा लॉजिस्टिक हब ने पकड़ी रफ्तार, 408 एकड़ का पहला चरण तैयार; रोजगार के भी खुलेंगे रास्ते
हरियाणा के नांगल चौधरी मेगा लॉजिस्टिक हब का 408 एकड़ का पहला चरण तैयार हो गया है। रेल संपर्क शुरू होने से उद्योग, कारोबार और रोजगार को क्या फायदा होगा, जानें।
हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले के नांगल चौधरी में बन रहे एकीकृत बहु-माध्यम माल ढुलाई केंद्र ने एक महत्वपूर्ण पड़ाव पार कर लिया है। करीब 408 एकड़ में पहले चरण का बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है और रविवार को रेल संपर्क भी शुरू कर दिया गया। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पहली मालगाड़ी को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 886 एकड़ में दो चरणों में विकसित किया जा रहा है। केंद्र सरकार ने पहले चरण के लिए करीब 1,029.49 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। इसका उद्देश्य हरियाणा और आसपास के औद्योगिक क्षेत्रों के माल को रेल और सड़क के जरिए देश के बड़े बाजारों और बंदरगाहों तक तेजी से पहुंचाना है।
408 एकड़ के पहले चरण में क्या-क्या तैयार हुआ?
नांगल चौधरी में पहले चरण के तहत माल ढुलाई के लिए जरूरी रेल और सड़क ढांचे का बड़ा हिस्सा तैयार हो चुका है। यहां आंतरिक रेल यार्ड में चार रेलवे लाइन, दो प्लेटफॉर्म और आधुनिक स्टेशन भवन बनाए गए हैं। इसके साथ सड़क, बिजली और पानी जैसी बाहरी सुविधाओं को भी तैयार किया गया है।
माल चढ़ाने और उतारने के लिए करीब दो किलोमीटर लंबा रेलवे प्लेटफॉर्म तैयार किया गया है। इसका उद्देश्य भारी मात्रा में आने वाले माल को तेजी से उतारने, रखने और दूसरी जगह भेजने की प्रक्रिया आसान बनाना है।
रेल पटरियों की तकनीकी जांच के लिए जून 2026 में इंजन का परीक्षण भी पूरा किया जा चुका था। केंद्र सरकार की ताजा परियोजना स्थिति के मुताबिक सड़क, बिजली और बाहरी रेल संपर्क से जुड़े काम पूरे हो चुके हैं।
अब पहली मालगाड़ी के संचालन के साथ परियोजना निर्माण के चरण से आगे बढ़कर वास्तविक माल ढुलाई की दिशा में प्रवेश कर रही है।
रेल संपर्क शुरू होने से उद्योगों को क्या फायदा होगा?
नांगल चौधरी का यह केंद्र पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के पास स्थित है। यह विशेष रेल गलियारा मुख्य रूप से मालगाड़ियों के लिए बनाया गया है, इसलिए उद्योग बड़ी मात्रा में सामान सामान्य रेल और सड़क परिवहन पर पूरी तरह निर्भर रहने के बजाय सीधे मालगाड़ी के जरिए भेज सकेंगे।
केंद्र सरकार के मुताबिक इस परियोजना को मानेसर, बावल, धारूहेड़ा, पूर्वी राजस्थान और पश्चिमी व उत्तरी हरियाणा-एनसीआर के औद्योगिक क्षेत्रों से होने वाली माल ढुलाई को ध्यान में रखकर विकसित किया जा रहा है।
इसका फायदा वाहन उद्योग, मशीनरी, कपड़ा, कृषि उत्पाद और दूसरे विनिर्माण क्षेत्रों से जुड़ी कंपनियों को हो सकता है। कंपनियां कच्चा माल मंगाने और तैयार उत्पाद बाहर भेजने के लिए नांगल चौधरी को बड़े माल ढुलाई केंद्र के रूप में इस्तेमाल कर सकेंगी।
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने भी उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक में कहा कि परियोजना से हरियाणा के स्थानीय उत्पादों को घरेलू और वैश्विक बाजार तक तेजी से पहुंचाने में मदद मिलेगी।
एक ही जगह मिलेंगी माल रखने से लेकर भेजने तक की सुविधाएं
यह परियोजना केवल रेलवे स्टेशन या मालगाड़ी यार्ड तक सीमित नहीं है। आगे यहां माल भंडारण, कंटेनर रखने, परिवहन, सीमा शुल्क प्रक्रिया, शीत भंडारण और रेल-सड़क के बीच माल स्थानांतरण जैसी सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
सरल शब्दों में, किसी उद्योग का माल यहां आने के बाद उसे एक स्थान पर रखा जा सकेगा, कंटेनर में लादा जा सकेगा और जरूरत के अनुसार रेल या सड़क मार्ग से आगे भेजा जा सकेगा।
इस तरह अलग-अलग स्थानों पर भंडारण, लोडिंग और परिवहन की व्यवस्था करने की जरूरत कम हो सकती है। सरकार को उम्मीद है कि इससे उद्योगों का समय बचेगा और माल ढुलाई पर आने वाली लागत को भी कम करने में मदद मिलेगी।
नांगल चौधरी की भौगोलिक स्थिति भी इसके लिए महत्वपूर्ण है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम के मुताबिक पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारा परियोजना के बिल्कुल पास है, जबकि राष्ट्रीय राजमार्ग-11 करीब 12 किलोमीटर और राष्ट्रीय राजमार्ग-148बी करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर है।
886 एकड़ में विकसित होगा पूरा प्रोजेक्ट
नांगल चौधरी का पूरा एकीकृत बहु-माध्यम माल ढुलाई केंद्र करीब 886.78 एकड़ में दो चरणों में विकसित किया जाना है। पहले चरण के लिए केंद्र सरकार ने वर्ष 2018 में 1,029.49 करोड़ रुपये की वित्तीय मंजूरी दी थी, जबकि दूसरे चरण को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई थी।
फिलहाल करीब 408 एकड़ क्षेत्र में पहले चरण का बुनियादी ढांचा तैयार होने की जानकारी दी गई है। इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी 886 एकड़ परियोजना का प्रत्येक हिस्सा तैयार और चालू हो चुका है।
आने वाले चरणों में माल भंडारण केंद्र, कंटेनर क्षेत्र, परिवहन क्षेत्र, आयात-निर्यात से जुड़ी सुविधाएं और व्यावसायिक गतिविधियों के लिए स्थान विकसित किए जाने हैं।
इसलिए पहली मालगाड़ी का संचालन परियोजना का महत्वपूर्ण पड़ाव है, लेकिन अभी इसका और विस्तार होना बाकी है।
युवाओं के लिए कितने रोजगार के अवसर बन सकते हैं?
रोजगार के लिहाज से भी नांगल चौधरी परियोजना को हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम ने इस परियोजना की रोजगार क्षमता करीब 10 हजार बताई है।
केंद्र सरकार ने परियोजना को मंजूरी देते समय अनुमान लगाया था कि इससे चार हजार से अधिक प्रत्यक्ष और करीब छह हजार अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा हो सकते हैं।
इन रोजगार अवसरों का मतलब केवल रेलवे में नौकरी नहीं है। परियोजना पूरी तरह विकसित होने के बाद रोजगार इन क्षेत्रों में बन सकते हैं:
- माल भंडारण और गोदाम संचालन
- माल की लोडिंग और अनलोडिंग
- ट्रक और अन्य परिवहन सेवाएं
- कंटेनर संचालन
- मशीनों और उपकरणों की देखरेख
- माल ढुलाई प्रबंधन
- शीत भंडारण
- सुरक्षा और रखरखाव
- दुकानों और दूसरी व्यावसायिक सेवाओं
- उद्योगों से जुड़ी सहायक इकाइयों
हालांकि 10 हजार रोजगार कोई मौजूदा सरकारी भर्ती नहीं है। यह पूरे प्रोजेक्ट और उससे जुड़ी औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियों के विकसित होने के बाद प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से बनने वाले रोजगार का अनुमान है।
निजी कंपनियों के निवेश से आगे बढ़ेगा अगला चरण
रेल संपर्क के शुभारंभ के बाद मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों और निवेशकों के साथ बैठक भी की। उन्होंने कंपनियों से सार्वजनिक-निजी भागीदारी के तहत आमंत्रित निविदाओं में हिस्सा लेने का आह्वान किया।
यह परियोजना भी सार्वजनिक और निजी क्षेत्र की भागीदारी वाले मॉडल पर आगे बढ़ाई जा रही है। इसके लिए बनाई गई विशेष कंपनी में केंद्र के राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास एवं कार्यान्वयन ट्रस्ट और हरियाणा राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम की समान हिस्सेदारी है।
निजी कंपनियों की भागीदारी बढ़ने के साथ यहां गोदाम, माल रखने के क्षेत्र, कंटेनर सुविधाएं, परिवहन सेवाएं और दूसरे व्यावसायिक ढांचे विकसित किए जा सकेंगे। इसी विस्तार के साथ परियोजना से जुड़े रोजगार और निवेश का वास्तविक असर भी बढ़ेगा।
दक्षिण हरियाणा के लिए क्यों खास है यह परियोजना?
महेंद्रगढ़ लंबे समय तक बड़े औद्योगिक क्षेत्रों की तुलना में अपेक्षाकृत कम औद्योगिक गतिविधियों वाला जिला रहा है। नांगल चौधरी में इतने बड़े माल ढुलाई केंद्र का विकास होने से दक्षिण हरियाणा में उद्योगों और उनसे जुड़ी सेवाओं के विस्तार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
परियोजना दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे का हिस्सा है और पश्चिमी समर्पित माल ढुलाई गलियारे के साथ इसकी सीधी निकटता इसका सबसे बड़ा फायदा है। राष्ट्रीय औद्योगिक गलियारा विकास निगम इसे एनसीआर के दक्षिण में बड़े माल ढुलाई केंद्र के रूप में विकसित कर रहा है।
पहले चरण का बुनियादी ढांचा तैयार होने और रेल संचालन शुरू होने के बाद अब सबसे महत्वपूर्ण चरण यहां वास्तविक औद्योगिक गतिविधि, निजी निवेश और माल ढुलाई के विस्तार का होगा। इसी के साथ यह साफ होगा कि परियोजना दक्षिण हरियाणा में कारोबार और रोजगार के लिए कितने बड़े अवसर पैदा करती है।








