सिरसा वीटा मिल्क प्लांट तत्कालीन CEO भागीराम पर मुख्यमंत्री ने दिए कड़ी कार्रवाई के निर्देश
सिरसा में वीटा मिल्क प्लांट को भेजे जाने वाले दूध को कास्टिक अधिक बताकर रिजेक्ट करने और भुगतान से जुड़ी शिकायत मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के सामने पहुंची। मुख्यमंत्री ने तत्कालीन CEO भागीराम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के नि…

सिरसा, 12 सितंबर। सिरसा के वीटा मिल्क प्लांट से जुड़ी शिकायत पर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सख्त रुख दिखाया है। जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक में करीवाला गांव की दि-जनता मिल्क सोसायटी की ओर से दूध की गुणवत्ता और भुगतान को लेकर शिकायत रखी गई। शिकायत सुनने के बाद मुख्यमंत्री ने मिल्क प्लांट सिरसा के तत्कालीन सीईओ भागीराम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए।
शिकायत में कहा गया कि बीएमसी के माध्यम से प्लांट में भेजे जाने वाले दूध को कास्टिक अधिक बताकर रिजेक्ट किया जाता है। साथ ही दूध वापस लेने और भुगतान की प्रक्रिया को लेकर भी परेशानी बताई गई। शिकायतकर्ता ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की जांच की मांग की थी। इसी पर सुनवाई करते हुए मुख्यमंत्री ने कार्रवाई के निर्देश दिए।
दूध रिजेक्ट और भुगतान को लेकर उठी शिकायत
मिल्क सोसायटी दि-जनता, गांव करीवाला के शिकायतकर्ता ने कहा कि प्लांट में भेजे जा रहे दूध को गुणवत्ता के नाम पर लौटाया जाता है। उनका आरोप है कि दूध में कास्टिक अधिक होने की बात कहकर उसे रिजेक्ट कर दिया जाता है।
शिकायत में यह भी कहा गया कि दूध वापस लेने और भुगतान से जुड़ी प्रक्रिया साफ नहीं है। इसी कारण सोसायटी की ओर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग उठाई गई।
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बैठक में 16 में से 13 शिकायतों का मौके पर समाधान
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने शनिवार को सिरसा में जिला लोक संपर्क एवं कष्ट निवारण समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में कुल 16 शिकायतें रखी गईं, जिनमें से 13 का मौके पर समाधान किया गया।
इसी बैठक में वीटा मिल्क प्लांट से जुड़ा मामला भी सामने आया। मुख्यमंत्री ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन सीईओ भागीराम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए। इससे साफ है कि सरकार इस मामले को केवल सामान्य शिकायत मानकर छोड़ना नहीं चाहती।
दूध उत्पादकों के लिए क्यों अहम है यह मामला
सिरसा और आसपास के क्षेत्रों में कई दूध उत्पादक सहकारी समितियों के माध्यम से वीटा प्लांट तक दूध पहुंचाते हैं। ऐसे में दूध रिजेक्ट होने और भुगतान में दिक्कत की शिकायत केवल एक सोसायटी तक सीमित मामला नहीं मानी जा रही।
मुख्यमंत्री की कार्रवाई के बाद अब नजर इस बात पर रहेगी कि जांच में क्या सामने आता है और दूध की गुणवत्ता जांच तथा भुगतान प्रक्रिया को लेकर आगे क्या सुधार किए जाते हैं।








