हरियाणा Super-100 में बदले नियम, 60% वाले छात्रों का रजिस्ट्रेशन जरूरी; चयन और SLC तक नई व्यवस्था
हरियाणा Super-100 के नियम बदले हैं। 10वीं की अर्धवार्षिक परीक्षा में 60% अंक वालों का पंजीकरण जरूरी होगा। जानें चयन प्रक्रिया, 500 सीट, काउंसलिंग, SLC और अभिभावक मुलाकात के नए नियम।
हरियाणा के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए Super-100 कार्यक्रम की व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब कक्षा 10 की अर्धवार्षिक परीक्षा में 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले पात्र विद्यार्थियों का Super-100 प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकरण कराना जरूरी होगा। स्कूल मुखियाओं को भी यह सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी दी गई है कि कोई पात्र विद्यार्थी जानकारी के अभाव में प्रवेश परीक्षा से वंचित न रह जाए।
नई व्यवस्था सिर्फ पात्रता तक सीमित नहीं है। चयन प्रक्रिया, विद्यार्थियों के कार्यक्रम छोड़ने, स्कूल छोड़ने का प्रमाणपत्र यानी SLC लेने, अभिभावकों से मुलाकात और छुट्टियों तक के लिए नई मानक प्रक्रिया तैयार की गई है। Super-100 के तहत सरकारी स्कूलों के चयनित विद्यार्थियों को 11वीं और 12वीं की पढ़ाई के साथ JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की आवासीय तैयारी कराई जाती है।
60 प्रतिशत अंक आए हैं तो क्या Super-100 में चयन हो जाएगा?
नहीं। 60 प्रतिशत अंक चयन की गारंटी नहीं हैं। इसका मतलब यह है कि कक्षा 10 की अर्धवार्षिक परीक्षा में 60 प्रतिशत या उससे अधिक अंक हासिल करने वाले पात्र विद्यार्थी Super-100 की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने के दायरे में आएंगे।
पहले शुरुआती पात्रता का दायरा अपेक्षाकृत ज्यादा अंक पाने वाले विद्यार्थियों तक सीमित था। ताजा व्यवस्था में 60 प्रतिशत तक सीमा लाने का उद्देश्य अधिक विद्यार्थियों को प्रवेश परीक्षा में अपनी क्षमता साबित करने का मौका देना है। इसके बाद अंतिम चयन अलग परीक्षा और मूल्यांकन के आधार पर होगा।
इस बदलाव का फायदा खास तौर पर ऐसे विद्यार्थियों को हो सकता है जो कुल अंकों में बहुत ऊंचा प्रतिशत हासिल नहीं कर पाए, लेकिन गणित, विज्ञान और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में बेहतर क्षमता रखते हैं।
रजिस्ट्रेशन विद्यार्थी को करना होगा या स्कूल कराएगा?
नई व्यवस्था में स्कूलों की जिम्मेदारी भी बढ़ाई गई है। संबंधित विद्यालय मुखिया को यह सुनिश्चित करना होगा कि कक्षा 10 में निर्धारित अंक हासिल करने वाले सभी पात्र विद्यार्थियों को Super-100 कार्यक्रम के बारे में बताया जाए और उनका प्रवेश परीक्षा के लिए पंजीकरण हो।
स्कूल मुखिया से इस संबंध में प्रमाणित जानकारी देने का भी प्रावधान बताया गया है कि उसके विद्यालय का कोई पात्र विद्यार्थी पंजीकरण से वंचित नहीं रहा।
इसका सीधा फायदा ग्रामीण और ऐसे परिवारों के विद्यार्थियों को हो सकता है जिन्हें Super-100 की आवेदन प्रक्रिया या तारीखों के बारे में समय पर जानकारी नहीं मिल पाती।
अब तीन चरणों से हो सकता है Super-100 में चयन
14 अगस्त को जारी नई मानक प्रक्रिया के उपलब्ध विवरण के अनुसार Super-100 की चयन व्यवस्था को तीन स्तरों में रखा गया है।
पहले चरण में वस्तुनिष्ठ परीक्षा होगी, जिसमें विद्यार्थी की विषयों की समझ, योग्यता और शैक्षणिक तैयारी को परखा जाएगा। पहले चरण में सफल विद्यार्थियों को दूसरे चरण की वर्णनात्मक परीक्षा देनी होगी, जिसमें समस्या समाधान, विश्लेषण और लिखित उत्तर देने की क्षमता देखी जाएगी।
इसके बाद तीसरे स्तर के लिए करीब 1,500 विद्यार्थियों को छांटने का प्रावधान बताया गया है। यहां अंतिम लिखित मूल्यांकन के साथ काउंसलिंग भी होगी। उपलब्ध SOP विवरण में इस प्रक्रिया को करीब 750-750 विद्यार्थियों के दो चरणों में कराने और अंत में मेरिट के आधार पर 500 विद्यार्थियों के चयन का प्रावधान है।
हरियाणा सरकार ने 2026-27 के बजट में भी Super-100 की क्षमता 400 से बढ़ाकर 500 सीटें करने की घोषणा की थी। सरकार के मुताबिक पिछले वर्षों में इस कार्यक्रम से सैकड़ों विद्यार्थी IIT, NIT और मेडिकल संस्थानों तक पहुंचे हैं।
चयन होने पर विद्यार्थी को क्या-क्या मिलेगा?
Super-100 सामान्य छात्रवृत्ति योजना नहीं, बल्कि आवासीय शैक्षणिक कार्यक्रम है। चयनित विद्यार्थी 11वीं और 12वीं की नियमित पढ़ाई के साथ JEE और NEET जैसी प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
कार्यक्रम में पढ़ाई, नियमित टेस्ट, विषय विशेषज्ञों का मार्गदर्शन और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी उपलब्ध कराई जाती है। कुरुक्षेत्र के बारना स्थित Super-100 परिसर में विद्यार्थियों के लिए अनुशासित आवासीय व्यवस्था भी संचालित की जाती है।
प्रवेश से पहले विद्यार्थी और उसके माता-पिता या अभिभावक से लिखित सहमति लेने का भी प्रावधान है, जिसमें उन्हें पढ़ाई, अनुशासन और आवासीय कार्यक्रम के नियमों की जानकारी दी जाएगी।
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चयन के बाद बच्चा Super-100 छोड़ना चाहे तो क्या होगा?
नई व्यवस्था में यह भी साफ किया गया है कि Super-100 में प्रवेश लेने के बाद विद्यार्थी सीधे कार्यक्रम छोड़कर SLC नहीं ले सकेगा। सामान्य स्थिति में पहले विद्यार्थी और उसके अभिभावक की काउंसलिंग कराई जाएगी।
अगर परिवार बच्चे को कार्यक्रम से हटाना चाहता है तो गृह जिले के जिला शिक्षा अधिकारी को लिखित अनुरोध देना होगा। उपलब्ध SOP विवरण के अनुसार जिला शिक्षा अधिकारी को पांच दिनों के भीतर काउंसलिंग की व्यवस्था करनी होगी। जरूरत पड़ने पर मनोविज्ञान विषय के विशेषज्ञ शिक्षक की मदद ली जा सकती है।
मामला आगे भेजे जाने की स्थिति में कुरुक्षेत्र स्तर पर भी काउंसलिंग का प्रावधान रखा गया है। यहां विद्यार्थी की समस्या और कार्यक्रम छोड़ने के कारणों को समझने के बाद आगे की सिफारिश की जाएगी।
किन मामलों में जल्दी मिल सकता है SLC?
कुछ विशेष परिस्थितियों में सामान्य काउंसलिंग प्रक्रिया से अलग तत्काल SLC जारी करने की अनुमति दी जा सकती है।
इनमें परिवार के निकट सदस्य की मृत्यु, परिवार के किसी सदस्य की गंभीर या लंबे समय की बीमारी—जिसके दस्तावेज उपलब्ध हों—और सक्षम अधिकारी द्वारा उचित मानी गई दूसरी असाधारण परिस्थितियां शामिल हैं।
SLC से जुड़े मामलों को एक समान तरीके से निपटाने के लिए कुरुक्षेत्र में समिति की व्यवस्था का भी उल्लेख है। सामान्य तौर पर ऐसे मामलों की समीक्षा महीने की 10, 20 और 30 तारीख को किए जाने का प्रावधान बताया गया है। छुट्टी होने की स्थिति में अगला कार्य दिवस लिया जा सकता है।
अभिभावक अपने बच्चे से कब मिल सकेंगे?
आवासीय कार्यक्रम होने के कारण अभिभावकों और विद्यार्थियों की मुलाकात के लिए भी व्यवस्था तय की गई है।
नई प्रक्रिया में लड़के और लड़कियों के लिए एक-एक रविवार छोड़कर अभिभावक-विद्यार्थी बैठक कराने का प्रावधान है। निर्धारित रविवार को अभिभावक सुबह 9 बजे से शाम 5 बजे तक अपने बच्चे से मिल सकेंगे।
सामान्य कार्यदिवस में मुलाकात केवल विशेष परिस्थिति में और पहले से अनुमति लेकर की जा सकेगी, ताकि विद्यार्थियों की नियमित पढ़ाई प्रभावित न हो।
छुट्टियों को लेकर भी बनाई गई नई व्यवस्था
Super-100 का पढ़ाई का कार्यक्रम काफी नियमित और आवासीय है। इसलिए विद्यार्थियों को परिवार के साथ समय बिताने और आराम के लिए बीच-बीच में छुट्टी देने का भी प्रावधान रखा गया है।
उपलब्ध SOP विवरण के अनुसार ऐसे अवकाश सामान्यतः 5 से 10 दिन के हो सकते हैं। विस्तृत वार्षिक अवकाश कैलेंडर अलग से विद्यार्थियों और अभिभावकों को उपलब्ध कराया जाएगा।
इस तरह नई व्यवस्था में केवल Super-100 की प्रवेश परीक्षा का दायरा नहीं बढ़ाया गया है, बल्कि पंजीकरण से लेकर चयन, आवासीय पढ़ाई, अभिभावकों से मुलाकात और कार्यक्रम छोड़ने तक की प्रक्रिया को पहले से ज्यादा स्पष्ट करने की कोशिश की गई है।






