हरियाणा में 64 कच्ची कॉलोनियों के लोगों को बड़ी राहत, रेगुलर करने की प्रक्रिया तेज; ये दस्तावेज रखें तैयार
हरियाणा में यमुनानगर-जगाधरी की 64 कच्ची कॉलोनियों को नियमित करने का सर्वे तेज हो गया है। जानें कौन-से पुराने दस्तावेज चाहिए, रजिस्ट्री कब हो सकेगी और अपनी कॉलोनी का स्टेटस कैसे चेक करें।
हरियाणा में लंबे समय से नियमित होने का इंतजार कर रही 64 कॉलोनियों के लोगों के लिए प्रक्रिया आगे बढ़ी है। ये कॉलोनियां यमुनानगर और जगाधरी नगर निगम क्षेत्र की हैं। ताजा नगर निगम अपडेट के अनुसार वर्ष 1996 से जुड़े कुल 76 कॉलोनी मामलों में 12 कॉलोनियां पहले नियमित हो चुकी हैं, जबकि बाकी 64 कॉलोनियों की सीमाएं तय करने और पुराने भवनों के प्रमाण की जांच का काम चल रहा है।
नगर निगम की टीमें कॉलोनियों की बाहरी सीमाओं की पैमाइश कर रही हैं और यह भी जांचा जा रहा है कि संबंधित क्षेत्र में वर्ष 1996 से पहले निर्माण मौजूद था या नहीं। सर्वे पूरा होने के बाद लेआउट और सीमा से जुड़ा प्रस्ताव राज्य सरकार को भेजा जाएगा। अंतिम अधिसूचना जारी होने के बाद ही नियमितीकरण की अगली प्रक्रिया पूरी होगी।
आपकी कॉलोनी इस प्रक्रिया में है तो अभी कौन-से दस्तावेज तैयार रखें?
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण काम वर्ष 1996 से पहले भवन या निर्माण मौजूद होने का प्रमाण देना है। नगर निगम ने कॉलोनीवासियों से सर्वे टीम को पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराने को कहा है, ताकि सीमा निर्धारण और सत्यापन में देरी न हो।
मौजूदा सत्यापन में खास तौर पर ये दस्तावेज उपयोगी बताए गए हैं:
- वर्ष 1996 या उससे पहले का बिजली बिल
- पुराना पानी का बिल
- उस समय का स्वीकृत भवन नक्शा, यदि उपलब्ध हो
- भवन के पुराने होने को साबित करने वाला कोई अन्य वैध सरकारी रिकॉर्ड
पुराने कागजात उपलब्ध हैं तो उन्हें अभी से संभालकर रखना बेहतर होगा। नगर निगम अधिकारियों के मुताबिक कुछ जगह सर्वे इसलिए भी धीमा पड़ रहा है क्योंकि लोग 1996 से पहले के दस्तावेज उपलब्ध नहीं करा रहे हैं।
रजिस्ट्री, इंतकाल या मालिकाना हक से जुड़े अपने पुराने दस्तावेज भी सुरक्षित रखें, हालांकि मौजूदा सर्वे में मुख्य जोर 1996 से पहले के निर्माण का प्रमाण जुटाने पर है।
आखिर 30 साल से ये कॉलोनियां अनियमित क्यों चली आ रही हैं?
इस मामले की शुरुआत वर्ष 1996 की प्रक्रिया से जुड़ी है। उस समय यमुनानगर-जगाधरी की कई कॉलोनियों का सर्वे कर नियमितीकरण की कार्रवाई की गई थी, लेकिन रिकॉर्ड में तकनीकी और शब्द संबंधी गलती के कारण कई क्षेत्रों में कॉलोनी को नियमित दिखाने के बजाय भवनों को नियमित दर्ज कर दिया गया। इसके चलते कई आबाद क्षेत्र बाद में भी पोर्टल पर अनधिकृत या आंशिक रूप से अनियमित दिखते रहे।
इसका असर सिर्फ नाम पर नहीं पड़ा। इन कॉलोनियों के कई निवासियों को:
- एनडीसी लेने,
- विकास शुल्क जमा करने,
- संपत्ति की रजिस्ट्री,
- भवन नक्शा मंजूर कराने,
- सड़क और नाली जैसे विकास कार्य
में परेशानी आती रही।
अब सरकार की मंजूरी के बाद विशेष समिति और नगर निगम की टीमें कॉलोनियों की वास्तविक सीमा और पुराने निर्माण का रिकॉर्ड तैयार कर रही हैं।
64 कॉलोनियों में कौन-कौन से इलाके शामिल हैं?
ताजा सर्वे से जुड़ी रिपोर्टों में जिन प्रमुख कॉलोनियों के नाम सामने आए हैं, उनमें गोल्डन कॉलोनी, दशमेश कॉलोनी, यमुना कॉलोनी, आजाद नगर प्रथम और द्वितीय, प्रोफेसर कॉलोनी, रामनगर, चोपड़ा गार्डन, लक्ष्मी गार्डन, आनंद कॉलोनी, कुलदीप नगर, इंद्रपुरी, वीणा नगर, आदर्श नगर, दयालपुरी, कृष्ण पुरी, गौरी शंकर कॉलोनी, राजेश नगर, शांति कॉलोनी, विश्वकर्मा कॉलोनी, विजय नगर एक्सटेंशन, सरस्वती कॉलोनी, मनोहर कॉलोनी, दर्शन नगर, पूर्ण विहार, प्रताप नगर, धीमान नगर, श्री गणेश नगर और रूप नगर एक्सटेंशन सहित अन्य क्षेत्र शामिल हैं।
यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि 64 का आंकड़ा पूरे हरियाणा की सभी कच्ची कॉलोनियों का नहीं है। मौजूदा कार्रवाई यमुनानगर-जगाधरी के पुराने 1996 वाले मामलों से जुड़ी है। राज्य के दूसरे शहरों की नियमित कॉलोनियों और उनकी अलग-अलग अधिसूचनाओं की सूची शहरी स्थानीय निकाय विभाग अलग से जारी करता है। विभाग की वेबसाइट पर 2023 से 2025 तक विभिन्न चरणों में नियमित की गई सैकड़ों कॉलोनियों की अधिसूचनाएं उपलब्ध हैं।
क्या सर्वे होते ही मकान और प्लॉट तुरंत रेगुलर हो जाएंगे?
नहीं। सर्वे प्रक्रिया का एक हिस्सा है।
पहले नगर निगम टीमें कॉलोनी की सीमा तय करेंगी, पुराने निर्माण के प्रमाण जांचेंगी और लेआउट तैयार करेंगी। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव राज्य सरकार के पास जाएगा। मौजूदा 64 कॉलोनियों के लिए अंतिम सरकारी अधिसूचना अभी आना बाकी है।
इसलिए सिर्फ टीम के सर्वे कर लेने या दस्तावेज दिखा देने से किसी संपत्ति को उसी समय नियमित मान लेना सही नहीं होगा।
प्रक्रिया पूरी होने के बाद कॉलोनी का रिकॉर्ड एनडीसी पोर्टल से जोड़ने की योजना है। यही कदम महत्वपूर्ण है, क्योंकि अभी इन इलाकों में पोर्टल संबंधी दिक्कतों के कारण विकास शुल्क और एनडीसी से जुड़े मामले भी अटकते रहे हैं।
कॉलोनी रेगुलर होने के बाद रजिस्ट्री हो सकेगी?
इन कॉलोनियों के निवासियों के लिए यह सबसे बड़ा सवाल है।
लंबे समय से अनियमित रिकॉर्ड के कारण कई संपत्तियों में एनडीसी जारी होने, विकास शुल्क जमा करने और रजिस्ट्री की प्रक्रिया प्रभावित थी। सरकार की मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य कॉलोनियों की सही सीमा और रिकॉर्ड तय करके उन्हें एनडीसी व्यवस्था से जोड़ना भी है।
लेकिन अंतिम अधिसूचना आने के बाद भी प्रत्येक संपत्ति की रजिस्ट्री उसके मालिकाना रिकॉर्ड, बकाया शुल्क और लागू नियमों पर निर्भर करेगी। यानी कॉलोनी नियमित होना और किसी व्यक्तिगत प्लॉट की रजिस्ट्री अपने-आप हो जाना एक ही प्रक्रिया नहीं है।
संपत्ति मालिक को अपने plot/property के दस्तावेज भी सही रखने होंगे।
कितना विकास शुल्क देना पड़ सकता है?
कैबिनेट के फैसले से जुड़ी जानकारी के अनुसार जिन संपत्ति मालिकों ने 1996 की अधिसूचना से पहले निर्माण किया था लेकिन उस समय विकास शुल्क जमा नहीं कराया, उनसे उस समय लागू दर के अनुसार विकास शुल्क लेने का प्रावधान किया गया है।
अलग-अलग संपत्तियों में वास्तविक देय राशि जमीन, रिकॉर्ड और लागू प्रक्रिया के अनुसार तय होगी। इसलिए किसी एक निश्चित रकम को सभी 64 कॉलोनियों पर लागू मानना सही नहीं होगा।
कॉलोनी रेगुलर होने पर सड़क, नाली और सीवरेज भी बनेंगे?
नियमितीकरण का बड़ा फायदा यह है कि ऐसे क्षेत्रों में नगर निकाय के लिए योजनाबद्ध तरीके से नागरिक सुविधाओं पर काम करने का रास्ता खुलता है।
यमुनानगर-जगाधरी की इन कॉलोनियों में कई जगह पानी और सीवरेज जैसी सुविधाएं पहले पहुंच चुकी हैं, लेकिन अनियमित स्थिति के कारण गलियों और नालियों जैसे विकास कार्य प्रभावित रहे। रिकॉर्ड नियमित होने के बाद नगर निगम के लिए विकास योजनाओं को आगे बढ़ाना आसान हो सकता है।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि अधिसूचना जारी होते ही हर गली और सड़क तुरंत बन जाएगी। विकास कार्य बजट, स्वीकृति और नगर निगम की कार्ययोजना के अनुसार किए जाएंगे।
अपनी कॉलोनी रेगुलर है या नहीं, कैसे पता करें?
हरियाणा शहरी स्थानीय निकाय विभाग अपनी वेबसाइट पर नियमित की गई कॉलोनियों की अधिसूचनाएं प्रकाशित करता है। आधिकारिक सूची में यमुनानगर, हिसार, सिरसा समेत राज्य के अलग-अलग नगर निकायों की अधिसूचनाएं मौजूद हैं।
हरियाणा में नियमित की गई कॉलोनियों की आधिकारिक सूची देखें
अगर किसी कॉलोनी का नाम केवल प्रस्तावित या सर्वे सूची में है लेकिन उसकी अंतिम notification उपलब्ध नहीं है, तो उसे अभी पूरी तरह नियमित मानना ठीक नहीं होगा।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग ने आईटी सेवाओं और शिकायतों के लिए 1800-8900-929 हेल्पलाइन भी दी हुई है, जो सोमवार से शनिवार सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक उपलब्ध बताई गई है।
आपकी कॉलोनी इन 64 में नहीं है तो क्या करें?
यमुनानगर-जगाधरी की 64 कॉलोनियों की मौजूदा प्रक्रिया को पूरे Haryana की हर unauthorized colony पर लागू नहीं किया जा सकता।
अगर आप गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, सिरसा, करनाल, पानीपत या किसी दूसरे शहर की कच्ची कॉलोनी में रहते हैं तो सबसे पहले शहरी स्थानीय निकाय विभाग की notified/regularized colonies list में अपने शहर और कॉलोनी का नाम देखना चाहिए। विभाग ने अलग-अलग तारीखों पर अलग-अलग नगर निकायों की कॉलोनियों को अधिसूचित किया है।
कॉलोनी सूची में नहीं मिलने पर संबंधित नगर निगम, नगर परिषद या नगर पालिका के Town Planning Branch से उसकी वर्तमान स्थिति पूछी जा सकती है।
इस समय यमुनानगर-जगाधरी के 64 मामलों में सबसे जरूरी काम सर्वे पूरा कराना और पुराने दस्तावेज उपलब्ध कराना है। इसके बाद अंतिम प्रस्ताव और सरकारी अधिसूचना तय करेगी कि ये कॉलोनियां औपचारिक रूप से कब नियमित श्रेणी में आएंगी।








