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हरियाणा में जमीन-जायदाद ट्रांसफर पर बड़ा बदलाव, बेटी के बच्चों को भी नहीं देनी होगी स्टांप ड्यूटी; जानिए नया नियम

हरियाणा में बेटी के बच्चों को जमीन-जायदाद ट्रांसफर पर स्टांप ड्यूटी छूट
हरियाणा सरकार ने बेटी के बच्चों के नाम अचल संपत्ति ट्रांसफर पर स्टांप ड्यूटी छूट को लेकर स्थिति स्पष्ट की है।

Haryana Property News: हरियाणा में परिवार के भीतर जमीन-जायदाद ट्रांसफर करने वाले लोगों के लिए बड़ी राहत सामने आई है। राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि किसी व्यक्ति की जिंदगी में उसकी अचल संपत्ति उसके बेटी के बच्चों यानी दौहता-दोहती/नाती-नातिन के नाम ट्रांसफर करने पर भी 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी माफ रहेगी। सरकार ने यह स्पष्टीकरण 2014 के पुराने आदेश में मौजूद हिंदी भाषा की अस्पष्टता को दूर करते हुए जारी किया है।

इसका मतलब यह है कि अब बेटी के बच्चों को संपत्ति ट्रांसफर करने के मामले में उन्हें बेटे के बच्चों से अलग नहीं माना जाएगा। हरियाणा सरकार के अनुसार यह स्पष्टीकरण राज्य के राजस्व और रजिस्ट्री कार्यालयों में लागू होगा।

क्या है हरियाणा सरकार का नया स्पष्टीकरण?

हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 24 जुलाई 2026 को Corrigendum जारी किया, जिसे 13 अगस्त 2026 को हरियाणा सरकार के राजपत्र (Gazette) में प्रकाशित किया गया। सरकार ने बताया कि इसका उद्देश्य 2014 के आदेश की हिंदी भाषा में पैदा हुई पुरानी अस्पष्टता को खत्म करना है।

वित्तायुक्त, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग की डॉ. सुमिता मिश्रा के अनुसार, 16 जून 2014 के आदेश के तहत मालिक द्वारा अपने जीवनकाल में परिवार के निर्धारित रक्त संबंधियों के पक्ष में अचल संपत्ति ट्रांसफर करने पर स्टांप ड्यूटी पूरी तरह माफ की गई थी। इनमें माता-पिता, बच्चे, पोते-पोती, भाई-बहन और पति-पत्नी जैसे रिश्ते शामिल थे।

बेटी के बच्चों को लेकर क्या था विवाद?

यहां इस पूरे मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात है।

2014 के मूल आदेश के अंग्रेजी संस्करण में “grandchildren” शब्द का इस्तेमाल किया गया था। लेकिन उसके हिंदी संस्करण में “पौत्र-पौत्री” शब्द लिखा गया था।

“पौत्र-पौत्री” का सामान्य अर्थ बेटे के बच्चे लिया जाता है। इसके कारण कई जगह यह भ्रम पैदा हुआ कि क्या बेटी के बच्चों को भी इस स्टांप ड्यूटी छूट का लाभ मिलेगा या नहीं। सरकार के अनुसार इस भाषाई अस्पष्टता के कारण कुछ मामलों में बेटी के बच्चों को शून्य स्टांप ड्यूटी का लाभ नहीं मिल पा रहा था।

अब सरकार ने इसी स्थिति को स्पष्ट कर दिया है।

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अब 2014 के नियम में क्या बदलाव किया गया है?

सरकार द्वारा जारी Corrigendum में “पौत्र-पौत्री” के साथ “दौहता-दोहती/नाती-नातिन” को भी स्पष्ट रूप से शामिल किया गया है। इससे बेटी के बेटे और बेटी की बेटी को भी बेटे के बच्चों के समान दर्जा मिल गया है।

सरल भाषा में समझें तो:

बेटा → उसके बेटे-बेटी
और
बेटी → उसके बेटे-बेटी

दोनों ही मामलों में पात्र जीवनकालीन संपत्ति हस्तांतरण पर 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट का प्रावधान स्पष्ट है।

किन रिश्तेदारों को स्टांप ड्यूटी में छूट मिलती है?

16 जून 2014 के सरकारी आदेश के संबंध में उपलब्ध आधिकारिक और CAG दस्तावेजों के अनुसार, मालिक द्वारा अपने जीवनकाल में अचल संपत्ति के पात्र हस्तांतरण पर निम्न रक्त संबंधियों के पक्ष में स्टांप ड्यूटी माफ की गई थी:

  • माता-पिता
  • बेटा-बेटी
  • पोता-पोती
  • दौहता-दोहती/नाती-नातिन
  • भाई
  • बहन
  • पति-पत्नी

CAG की रिपोर्ट भी 16 जून 2014 के आदेश के तहत परिवार के इन निर्दिष्ट रक्त संबंधियों के बीच जीवनकाल में अचल संपत्ति हस्तांतरण पर स्टांप ड्यूटी की पूरी छूट का उल्लेख करती है।

ध्यान रखें: हर रिश्तेदार को छूट नहीं

इसका मतलब यह नहीं है कि परिवार के किसी भी सदस्य या रिश्तेदार के नाम संपत्ति करने पर स्टांप ड्यूटी खत्म हो जाती है।

2014 के आदेश में निर्दिष्ट रिश्तों का उल्लेख है। इसलिए चाचा, ताऊ, मामा, भतीजा, भांजा, चचेरा भाई या अन्य रिश्तों को सिर्फ “परिवार का सदस्य” होने के आधार पर इस छूट का पात्र नहीं माना जाना चाहिए। वास्तविक दस्तावेज और रिश्ते के आधार पर पात्रता की जांच जरूरी है। CAG ने भी गलत रिश्तों के पक्ष में स्टांप ड्यूटी की छूट दिए जाने के मामलों को लेकर आपत्ति दर्ज की थी।

क्या यह छूट जमीन और मकान दोनों पर लागू है?

सरकार का स्पष्टीकरण immovable property यानी अचल संपत्ति के जीवनकालीन हस्तांतरण से संबंधित है। इसलिए यह केवल खेती की जमीन तक सीमित घोषणा नहीं है। संपत्ति की प्रकृति, मालिकाना हक और इस्तेमाल किए जाने वाले दस्तावेज के अनुसार वास्तविक रजिस्ट्री प्रक्रिया अलग हो सकती है।

यानी मामला जमीन, मकान, प्लॉट या अन्य अचल संपत्ति का हो सकता है, लेकिन किसी विशेष संपत्ति पर लागू प्रक्रिया और दस्तावेज की पुष्टि रजिस्ट्री से पहले करनी जरूरी है।

क्या बेटी के बच्चों के नाम संपत्ति करने पर पूरी रजिस्ट्री मुफ्त होगी?

यहां एक जरूरी अंतर समझना होगा।

सरकार ने 100 प्रतिशत स्टांप ड्यूटी छूट स्पष्ट की है। इसे यह नहीं समझना चाहिए कि संपत्ति ट्रांसफर की पूरी प्रक्रिया में लगने वाला हर शुल्क खत्म हो गया है।

स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस अलग-अलग शुल्क हैं। इसलिए रजिस्ट्री कराने से पहले संबंधित सब-रजिस्ट्रार कार्यालय में मौजूदा रजिस्ट्रेशन फीस और अन्य लागू शुल्क की पुष्टि करनी चाहिए।

सरकारी आदेश का मूल लाभ स्टांप ड्यूटी की पूरी छूट है।

क्या यह नया नियम 2026 से लागू हुआ है?

इसे पूरी तरह नई 2026 की योजना कहना सही नहीं होगा।

मूल स्टांप ड्यूटी छूट का प्रावधान 16 जून 2014 के सरकारी आदेश से आया था। 2026 में सरकार ने उस पुराने आदेश की हिंदी भाषा में मौजूद अस्पष्टता को दूर करने के लिए Corrigendum जारी किया है।

Corrigendum 24 जुलाई 2026 को जारी हुआ और 13 अगस्त 2026 को Haryana Government Gazette में प्रकाशित हुआ। सरकार ने कहा है कि यह स्पष्टीकरण पुराने आदेश के संदर्भ में retrospective legal clarity प्रदान करता है।

यही इस खबर की सबसे महत्वपूर्ण बात है—सरकार ने कोई बिल्कुल नई 100% छूट आज से शुरू नहीं की, बल्कि 2014 से मौजूद प्रावधान में बेटी के बच्चों की स्थिति को स्पष्ट किया है।

जिन लोगों ने पहले बेटी के बच्चों को संपत्ति ट्रांसफर की है, उनका क्या?

सरकार के मुताबिक Corrigendum जारी करने से राजस्व और रजिस्ट्री कार्यालयों में इस संबंध में पिछली स्थिति को लेकर भी कानूनी स्पष्टता आएगी। सरकार ने इसे retrospective legal clarity बताया है।

हालांकि किसी पुराने व्यक्तिगत रजिस्ट्री मामले में स्टांप ड्यूटी वापस मिलेगी या पहले से जमा राशि का क्या होगा, इस बारे में इस सरकारी प्रेस रिलीज में कोई सामान्य refund प्रक्रिया नहीं बताई गई है। इसलिए ऐसे मामलों में बिना आधिकारिक आदेश देखे रिफंड का दावा करना उचित नहीं होगा।

किसानों और परिवारों के लिए इसका क्या मतलब है?

हरियाणा में जमीन-जायदाद अक्सर पीढ़ियों के बीच हस्तांतरित होती है। ऐसे में किसी दादा-दादी या नाना-नानी द्वारा अपने जीवनकाल में संपत्ति अगली पीढ़ी को देने के मामलों में यह स्पष्टीकरण महत्वपूर्ण है।

अब बेटी के बच्चों को संपत्ति ट्रांसफर करने वाले परिवारों को सिर्फ हिंदी आदेश में इस्तेमाल हुए “पौत्र-पौत्री” शब्द के कारण अलग व्यवहार किए जाने की स्थिति नहीं रहनी चाहिए।

सरकार का उद्देश्य भी यही है कि बेटे और बेटी की संतान के बीच इस प्रावधान में समानता स्पष्ट हो और रजिस्ट्री के दौरान अनावश्यक विवाद या देरी न हो।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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