पलवल में जमीनी विवाद समेत 13 से अधिक मामलों को निपटाने का शानदार मौका, जाने कैसे लगवाएं अपना केस। Mediation for the Nation 3.0
पलवल में 30 सितंबर तक मध्यस्थता योग्य मामलों की पहचान होगी। जानें जमीन, चेक बाउंस, वैवाहिक व किरायेदारी विवाद में केस कैसे लगवाएं और कहां संपर्क करें।

लोकल हरियाणा, पलवल। पलवल में अदालतों में लंबे समय से चल रहे जमीनी, पारिवारिक, चेक बाउंस और दूसरे समझौता योग्य विवादों को आपसी सहमति से निपटाने का मौका मिलने जा रहा है। देशव्यापी ‘Mediation for the Nation 3.0’ अभियान के तहत 30 सितंबर 2026 तक ऐसे मामलों की पहचान की जा रही है, जिन्हें मध्यस्थता के जरिए सुलझाया जा सकता है। इसके बाद 1 अक्टूबर से विशेष अभियान शुरू होगा।
जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के सचिव एवं मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी हरीश गोयल के अनुसार इसमें भूमि अधिग्रहण और संपत्ति विभाजन से लेकर किरायेदारी, वैवाहिक विवाद, चेक बाउंस, मोटर दुर्घटना दावा और उपभोक्ता विवाद समेत 13 से अधिक तरह के मामले लिए जा सकते हैं। जिन लोगों का मामला पहले से कोर्ट में चल रहा है, वे भी उसे मध्यस्थता में भेजने के लिए आवेदन कर सकते हैं। कोर्ट में केस दायर होने से पहले के विवादों में भी यह सुविधा ली जा सकती है।
जमीनी विवाद से चेक बाउंस तक ये मामले हो सकेंगे शामिल
Mediation for the Nation 3.0 में हर मामला अपने-आप शामिल नहीं होगा। ऐसे विवाद चुने जाएंगे जिनमें दोनों पक्षों के बीच बातचीत और समझौते से समाधान निकलने की संभावना हो।
पलवल की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इनमें मुख्य रूप से ये मामले शामिल किए जा सकते हैं:
- वैवाहिक विवाद
- मोटर दुर्घटना दावा मामले
- घरेलू हिंसा से जुड़े मामले
- चेक बाउंस यानी धारा 138 NI Act के मामले
- वाणिज्यिक विवाद
- व्यापार से जुड़े विवाद
- सेवा संबंधी मामले
- समझौता योग्य आपराधिक मामले
- उपभोक्ता विवाद
- विभागीय वसूली से जुड़े मामले
- संपत्ति विभाजन के विवाद
- बेदखली के मामले
- किरायेदारी विवाद
- भूमि अधिग्रहण से जुड़े मामले
- अन्य ऐसे सिविल मामले जिनमें समझौता संभव हो
इन मामलों की पहचान 30 सितंबर तक की जा रही है। इसका मतलब यह नहीं है कि सूची में आने वाला हर विवाद समझौते में ही खत्म होगा। मध्यस्थता में अंतिम समाधान दोनों पक्षों की सहमति से ही होगा।
गुरुग्राम में 3 अक्टूबर को विशेष लोक अदालत, चेक बाउंस मामलों का समझौते से होगा निपटारा
अपना केस Mediation for the Nation 3.0 में कैसे लगवाएं?
अगर आपका मामला पहले से किसी अदालत में लंबित है और आप दूसरे पक्ष के साथ समझौते की संभावना देखते हैं तो संबंधित अदालत के सामने आवेदन देकर मामले को मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र भेजने का अनुरोध किया जा सकता है।
इसके लिए अपने अधिवक्ता से भी संपर्क किया जा सकता है। अदालत यह देखेगी कि विवाद mediation के लिए उपयुक्त है या नहीं।
वहीं अगर विवाद अभी कोर्ट तक नहीं पहुंचा है तो भी समाधान की कोशिश की जा सकती है। ऐसे व्यक्ति पलवल जिला न्यायालय परिसर स्थित मध्यस्थता एवं सुलह केंद्र या जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण से संपर्क कर सकते हैं। यानी हर मामले में पहले मुकदमा दर्ज करवाना जरूरी नहीं है।
आमजन को यह पता नहीं है कि उनका मामला मध्यस्थता में लिया जा सकता है या नहीं, तो जिला विधिक सेवाएं प्राधिकरण पलवल के हेल्पलाइन नंबर 01275-298003 पर जानकारी ली जा सकती है।
मध्यस्थता में कैसे निकलता है विवाद का समाधान?
मध्यस्थता में कोई तीसरा व्यक्ति दोनों पक्षों पर अपना फैसला नहीं थोपता। एक निष्पक्ष mediator दोनों पक्षों से बातचीत करके ऐसा समाधान तलाशने में मदद करता है, जिस पर दोनों सहमत हो सकें।
इस प्रक्रिया का फायदा यह है कि लंबी अदालती कार्यवाही के मुकाबले विवाद कम समय और कम खर्च में समाप्त होने की संभावना रहती है। बातचीत गोपनीय रखी जाती है और दोनों पक्ष अपनी सुविधा तथा सहमति के अनुसार समाधान तक पहुंच सकते हैं।
इससे खासकर पारिवारिक, संपत्ति, किरायेदारी और व्यापारिक विवादों में ऐसा रास्ता निकल सकता है जहां मामला खत्म होने के साथ दोनों पक्षों के संबंध भी पूरी तरह खराब न हों।
पलवल में हाल ही में 12 सितंबर को राष्ट्रीय लोक अदालत भी आयोजित की गई थी, जिसमें 21,935 में से 9,733 मामलों का निपटारा हुआ और 9.25 करोड़ रुपये से अधिक का settlement हुआ था। हालांकि लोक अदालत और यह mediation campaign अलग प्रक्रियाएं हैं। Mediation for the Nation 3.0 में फिलहाल 30 सितंबर तक उपयुक्त मामलों की पहचान की जा रही है और 1 अक्टूबर से मध्यस्थता अभियान आगे बढ़ेगा।








