हरियाणा में इंतकाल-जमाबंदी के लंबित मामलों को 11 दिन में निपटाने के आदेश, लापरवाही पर होगी कार्यवाही
हरियाणा में इंतकाल-जमाबंदी के लंबित मामलों को समय पर निपटाने के आदेश दिए गए हैं। जानें पटवारी, कानूनगो और CRO की समय सीमा, 11वें दिन ऑटो म्यूटेशन और ऑनलाइन जमाबंदी की व्यवस्था।

करनाल, 15 सितंबर। हरियाणा में इंतकाल, जमाबंदी और दूसरे लंबित राजस्व मामलों को तय समय में निपटाने पर सख्ती बढ़ाई जा रही है। करनाल में राजस्व विभाग की समीक्षा के दौरान निशानदेही, जमाबंदी, इंतकाल, ततीमा कटिंग, टोकन पेंडेंसी और कोर्ट केसों को प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं। डीसी डॉ. आनंद कुमार शर्मा ने अधिकारियों को साफ कहा कि आम लोगों को अपने काम के लिए बार-बार कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
हरियाणा सरकार ने इससे पहले लंबित इंतकाल के मामलों के लिए अधिकारियों की समय सीमा भी तय कर दी है। पटवारी को मामला पांच दिन में और कानूनगो व सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर (CRO) को तीन-तीन दिन में अपने स्तर पर क्लियर करना होगा। सरकार ने यह व्यवस्था पुराने लंबित मामलों को तेजी से कम करने और जिम्मेदारी तय करने के लिए लागू की है।
इंतकाल के लिए पटवारी को 5 दिन, कानूनगो को 3 दिन
राजस्व विभाग की 2 सितंबर की नई व्यवस्था के अनुसार दाखिल-खारिज यानी इंतकाल के मामलों को पटवारी पांच दिन से अधिक अपने स्तर पर लंबित नहीं रख सकेगा। इसके बाद कानूनगो और CRO स्तर पर भी तीन-तीन दिन की समय सीमा तय की गई है। हरियाणा सरकार की इस समय-सीमा संबंधी मूल जानकारी यहां देखी जा सकती है। हरियाणा सरकार का आधिकारिक आदेश/प्रेस रिलीज
करनाल की समीक्षा बैठक में भी इसी तरह लंबित राजस्व कार्यों को समय पर पूरा करने पर जोर दिया गया है। अच्छी रिकवरी करने वाले पटवारियों की सराहना की गई, जबकि कम रिकवरी वाले क्षेत्रों में काम तेज करने को कहा गया।
अधिकारियों ने बैठक में बताया कि पटवारी, कानूनगो और CRO स्तर पर परिवार पहचान पत्र के तहत जाति सत्यापन और करेक्शन का काम करीब 97 से 99 प्रतिशत तक पूरा हो चुका है।
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नई रजिस्ट्री के बाद इंतकाल के लिए अलग आवेदन की जरूरत नहीं
हरियाणा में नई रजिस्ट्री से जुड़े पात्र मामलों के लिए ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था भी लागू की गई है। रजिस्ट्री होते ही इंतकाल की प्रक्रिया अपने आप शुरू हो जाती है और अलग से आवेदन देने की जरूरत नहीं रहती। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने जून में Paperless Registration 2.0 के साथ यह व्यवस्था शुरू की थी। ऑटो म्यूटेशन पर हरियाणा सरकार की मूल जानकारी
मौजूदा व्यवस्था में म्यूटेशन पहले पटवारी के लॉगिन में जाता है। वहां तय अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर मामला अपने आप कानूनगो और फिर CRO के पास पहुंचता है। पात्र और निर्विवाद मामले में निर्धारित कार्रवाई न होने पर 11वें दिन इंतकाल जमाबंदी में अपने आप शामिल होने की व्यवस्था की गई है।
हालांकि यह नियम हर पुराने लंबित इंतकाल पर अपने आप लागू नहीं होता। जमीन के मालिकाना हक पर विवाद, रिकॉर्ड में अंतर, आपत्ति या खेवट विभाजन जैसे मामलों में अलग जांच की जरूरत पड़ सकती है।
इंतकाल और जमाबंदी की कॉपी अब घर बैठे भी मिलेगी
जमीन से जुड़े रिकॉर्ड के लिए लोगों को हर बार तहसील कार्यालय जाने की जरूरत भी कम की गई है। हरियाणा सरकार ने जमाबंदी, इंतकाल, फर्द बदर और रजिस्टर्ड सेल डीड की डिजिटल प्रमाणित कॉपी ऑनलाइन उपलब्ध कराने की व्यवस्था शुरू की है।
ऑनलाइन प्रमाणित इंतकाल, सेल डीड और फर्द बदर की कॉपी के लिए 100 रुपये शुल्क रखा गया है। जमाबंदी की प्रमाणित कॉपी के पहले 10 पृष्ठों के लिए 100 रुपये और उसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त पृष्ठ के लिए पांच रुपये का शुल्क है।
यानी किसी व्यक्ति का मामला लंबे समय से लंबित है तो उसे केवल कार्यालय में इंतजार करने के बजाय पहले यह देखना चाहिए कि मामला किस स्तर पर अटका है। नई रजिस्ट्री वाले पात्र मामलों में ऑटो म्यूटेशन और पुराने लंबित मामलों के लिए तय विभागीय समय सीमा दोनों अलग व्यवस्थाएं हैं।








