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खेती-बाड़ी

करनाल में महिलाओं ने सीखी घर से कम लागत में ढींगरी मशरूम से कमाई की नई तकनीक

करनाल में 30 महिलाओं को ढींगरी मशरूम उत्पादन की पांच दिन की ट्रेनिंग दी गई। महिलाओं ने अचार-पापड़ बनाना सीखा और घर ले जाने के लिए कम्पोस्ट बैग मिला।

करनाल की 30 महिलाओं को मिला घर से कमाई का हुनर, ढींगरी मशरूम उगाना सीखा
करनाल की 30 महिलाओं को मिला घर से कमाई का हुनर, ढींगरी मशरूम उगाना सीखा

करनाल, 11 सितंबर। ग्रामीण महिलाओं को घर से ही कम लागत में रोजगार शुरू करने के लिए उद्यान प्रशिक्षण संस्थान उचानी में पांच दिन का ऑयस्टर यानी ढींगरी मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण दिया गया। 7 से 11 सितंबर तक चले शिविर में जिले के अलग-अलग गांवों के स्वयं सहायता समूहों की 30 महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रशिक्षण के बाद प्रत्येक महिला को मशरूम का बीज डाला हुआ एक-एक कम्पोस्ट बैग भी दिया गया, ताकि वे घर पर खुद उत्पादन शुरू कर सकें।

एडीसी डॉ. राहुल रईया के दिशा-निर्देश पर आयोजित कार्यक्रम में महिलाओं को मशरूम तैयार करने से लेकर तुड़ाई, पैकिंग और इससे दूसरे उत्पाद बनाने तक की जानकारी दी गई। प्रशिक्षण की समन्वयक उद्यान विशेषज्ञ डॉ. प्रीति यादव ने बताया कि ढींगरी मशरूम कम जगह और कम पानी में भी तैयार की जा सकती है।

मशरूम के साथ अचार और पापड़ बनाना भी सीखा

पांच दिन के प्रशिक्षण में महिलाओं को कम्पोस्ट तैयार करने, मशरूम का बीज डालने, उत्पादन की देखभाल और सही समय पर तुड़ाई की जानकारी दी गई।

ताजा मशरूम ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रहती, इसलिए महिलाओं को इसके मूल्यवर्धित उत्पाद बनाने की ट्रेनिंग भी दी गई। इसमें मशरूम का अचार और पापड़ तैयार करना शामिल रहा। इससे महिलाएं केवल ताजा मशरूम बेचने पर निर्भर रहने के बजाय दूसरे उत्पाद भी तैयार कर सकेंगी।

मशरूम उत्पादन और इससे अचार, पाउडर जैसे उत्पाद बनाने को ग्रामीण रोजगार से जोड़ने के लिए देश में पहले भी प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए गए हैं। कृषि क्षेत्र के अध्ययनों में भी ऐसे प्रशिक्षण से छोटे स्तर पर रोजगार शुरू करने में मदद मिलने की बात सामने आई है।

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मुरथल में देखा झोपड़ी और एसी यूनिट से उत्पादन

सभी 30 महिलाओं को क्षेत्रीय मशरूम अनुसंधान केंद्र मुरथल, सोनीपत का भ्रमण भी कराया गया। यहां क्षेत्रीय निदेशक डॉ. अजय यादव ने महिलाओं को छोटे स्तर पर झोपड़ी में मशरूम उत्पादन और पूरे वर्ष उत्पादन के लिए एसी यूनिट की व्यवस्था समझाई।

उन्होंने बताया कि शुरुआत छोटे झोपड़ी मॉडल से की जा सकती है। व्यवसाय बढ़ने के बाद आधुनिक यूनिट की तरफ बढ़ा जा सकता है। मुरथल स्थित केंद्र में किसानों और युवाओं को मशरूम उत्पादन से जोड़ने के लिए पहले भी प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहे हैं।

संस्थान के प्रधानाचार्य डॉ. सतेन्द्र यादव ने कहा कि महिलाओं को केवल कक्षा में जानकारी देने के बजाय वास्तविक उत्पादन व्यवस्था दिखाने के लिए मुरथल ले जाया गया। यहां महिलाओं ने वैज्ञानिकों से उत्पादन, बैंक ऋण और मशरूम बेचने से जुड़े सवाल भी पूछे।

प्रशिक्षण पूरा होने के बाद कई महिलाओं ने अपने स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से गांव में छोटे स्तर पर ढींगरी मशरूम उत्पादन शुरू करने की इच्छा जताई।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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