हरियाणा में धान की 2441 रुपये MSP हुई तय, जाने कब शुरू होगी खरीद, नमी का फी प्रतिशत हुआ निर्धारित
हरियाणा में कॉमन धान का MSP 2441 और ग्रेड-A का 2461 रुपये तय है। जानें सरकारी खरीद कब शुरू होगी, 15 सितंबर की मांग और 17% नमी का नियम।

चंडीगढ़, 3 सितंबर। हरियाणा में धान की कटाई और मंडियों में आवक का समय नजदीक आने के साथ किसानों के लिए एमएसपी और सरकारी खरीद को लेकर जरूरी अपडेट सामने आया है। वर्ष 2026-27 के लिए कॉमन धान का एमएसपी 2,441 रुपये प्रति क्विंटल और ग्रेड-ए धान का 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है। वहीं सरकारी खरीद के लिए धान में अधिकतम 17 प्रतिशत नमी का मानक है। कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से फसल अच्छी तरह सुखाकर ही मंडी में लाने की अपील की है।
धान खरीद की तारीख को लेकर अभी किसानों में सबसे ज्यादा असमंजस है। केंद्र का खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 1 अक्टूबर से शुरू होना है, जबकि हरियाणा के किसान संगठन सरकार से खरीद 15 सितंबर से शुरू करने की मांग कर रहे हैं। 3 सितंबर तक हरियाणा सरकार की ओर से 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की कोई फाइनल घोषणा सामने नहीं आई है।
हरियाणा में धान की सरकारी खरीद कब शुरू होगी, 15 सितंबर की मांग पर क्या फैसला हुआ?
फिलहाल खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 की सामान्य शुरुआत 1 अक्टूबर से तय है। केंद्र ने इसी सीजन के लिए देशभर में 708.64 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य तय किया है।
हरियाणा में किसान संगठन इस तारीख को आगे करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि पीआर किस्मों की धान सितंबर में ही मंडियों में पहुंचने लगती है, इसलिए सरकारी खरीद 15 सितंबर से शुरू होनी चाहिए। करनाल, कुरुक्षेत्र और यमुनानगर क्षेत्र के किसान संगठनों ने इस संबंध में मांग उठाई है।
यहां किसानों को एक बात साफ समझनी चाहिए—15 सितंबर अभी मांग है, फाइनल सरकारी तारीख नहीं।
पिछले साल 2025 में भी खरीद की सामान्य तारीख 1 अक्टूबर थी, लेकिन बाद में हरियाणा में इसे आगे बढ़ाकर 22 सितंबर से शुरू किया गया था। इसलिए इस साल भी तारीख बदल सकती है, लेकिन इसके लिए सरकार की आधिकारिक घोषणा का इंतजार करना होगा।
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2026 में धान का एमएसपी कितना है, कॉमन और ग्रेड-ए में कितना फर्क?
केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए धान के दोनों प्रमुख वर्गों का एमएसपी बढ़ाया है।
| धान की कैटेगरी | एमएसपी 2025-26 | एमएसपी 2026-27 | बढ़ोतरी |
|---|---|---|---|
| कॉमन धान | 2,369 रुपये | 2,441 रुपये | 72 रुपये |
| ग्रेड-ए धान | 2,389 रुपये | 2,461 रुपये | 72 रुपये |
यानी पिछले साल के मुकाबले किसान को दोनों कैटेगरी में 72 रुपये प्रति क्विंटल ज्यादा एमएसपी मिलेगा। केंद्र सरकार के खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग की आधिकारिक एमएसपी सूची में भी यही दर दर्ज है।
यहां एक जरूरी फर्क है। 2,441 रुपये का एमएसपी हर तरह के धान के लिए एक समान रेट नहीं है। यह कॉमन धान का एमएसपी है, जबकि ग्रेड-ए का रेट 2,461 रुपये है। बासमती की कीमत सामान्य तौर पर बाजार में उसकी किस्म और मांग के आधार पर तय होती है।
मंडी में धान की नमी कितनी होनी चाहिए, 17% से ज्यादा होने पर क्या होगा?
सरकारी खरीद के एफएक्यू मानकों के अनुसार धान में अधिकतम 17 प्रतिशत नमी स्वीकार की जाती है। भारतीय खाद्य निगम की यूनिफॉर्म स्पेसिफिकेशन में भी धान के लिए नमी की अधिकतम सीमा 17 प्रतिशत दर्ज है।
यही वजह है कि कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने किसानों से धान अच्छी तरह सुखाकर मंडी में लाने को कहा है।
अगर फसल में नमी 17 प्रतिशत से ज्यादा निकलती है तो सरकारी खरीद में परेशानी आ सकती है और किसान को धान सुखाने के लिए इंतजार करना पड़ सकता है।
किसान संगठन इस सीमा को 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग कर रहे हैं। उनका कहना है कि कंबाइन से कटाई और सितंबर-अक्टूबर के मौसम के कारण कई बार धान में नमी ज्यादा रहती है। अभी तक 20 प्रतिशत वाली मांग को मंजूरी मिलने की आधिकारिक जानकारी नहीं है।
क्या 17 प्रतिशत नमी से कम होते ही धान एमएसपी पर बिक जाएगा?
सिर्फ नमी ही सरकारी खरीद की एकमात्र शर्त नहीं है।
एफसीआई के एफएक्यू मानकों के अनुसार धान सूखा, साफ, खाने योग्य गुणवत्ता वाला और फफूंद, कीड़ों तथा खराब गंध से मुक्त होना चाहिए। इसके अलावा बाहरी पदार्थ, खराब या अंकुरित दाने जैसी गुणवत्ता से जुड़ी दूसरी सीमाएं भी लागू होती हैं।
इसलिए किसान केवल मॉइस्चर मीटर में 17 प्रतिशत या उससे कम देखकर यह न मानें कि फसल हर स्थिति में खरीद के लिए पास हो जाएगी। मंडी में क्वालिटी की बाकी जांच भी हो सकती है।
धान को मंडी ले जाने से पहले किसान क्या करें?
धान कटने के तुरंत बाद उसमें नमी ज्यादा हो सकती है। ऐसे में किसान फसल को साफ और सूखी जगह पर फैलाकर अच्छी तरह सुखाएं।
खासकर बारिश या सुबह की ओस के तुरंत बाद कटाई हुई है तो धान सीधे मंडी ले जाने से बचना बेहतर है। जहां संभव हो मंडी जाने से पहले नमी चेक करा लें।
सरकारी खरीद शुरू होने से पहले यह भी देख लें कि मेरी फसल-मेरा ब्यौरा में आपकी खरीफ फसल और जमीन का रिकॉर्ड सही है या नहीं।
हरियाणा के मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल पर खरीफ 2026 के फसल पंजीकरण की आखिरी तारीख 31 जुलाई 2026 दिखाई गई है। पोर्टल का उद्देश्य फसल के रिकॉर्ड को मंडी और सरकारी योजनाओं से जोड़ना भी है।
एमएसपी पर धान बेचने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा क्यों जरूरी है?
हरियाणा में सरकारी खरीद की प्रक्रिया किसान और फसल के रजिस्ट्रेशन से जुड़ी हुई है।
सरकार पहले भी साफ कर चुकी है कि सरकारी मंडियों में एमएसपी पर फसल बेचने के लिए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा का पंजीकरण जरूरी है। पोर्टल पर किसान, जमीन और बोई गई फसल का रिकॉर्ड दर्ज होता है, जिसका इस्तेमाल खरीद और दूसरी सरकारी योजनाओं में किया जाता है।
जिन किसानों ने खरीफ 2026 में रजिस्ट्रेशन कराया है, वे खरीद शुरू होने से पहले अपने रिकॉर्ड और फसल के विवरण को एक बार जरूर चेक कर लें। अगर जमीन या फसल के वेरिफिकेशन में कोई गलती है तो मंडी में फसल बेचते समय परेशानी हो सकती है।
15 सितंबर से पहले मंडी में धान आ गया तो क्या होगा?
यही वजह है कि किसान संगठन खरीद जल्दी शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
पीआर किस्मों की फसल सितंबर में तैयार होने लगती है। अगर सरकारी एजेंसियां खरीद शुरू नहीं करतीं और किसान फसल मंडी में ले आता है तो उसे सरकारी एमएसपी खरीद का इंतजार करना पड़ सकता है या निजी खरीदार को फसल बेचनी पड़ सकती है।
किसान संगठनों का दावा है कि ऐसे समय निजी खरीद में किसानों को एमएसपी से कम भाव मिलने का खतरा रहता है। इसी आधार पर वे 1 अक्टूबर की जगह 15 सितंबर से खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं।
हालांकि अभी किसानों को किसी संभावित तारीख के आधार पर फैसला करने के बजाय सरकार की फाइनल खरीद घोषणा देखनी चाहिए।
इस बार किसानों को किन दो अपडेट का इंतजार रहेगा?
धान किसानों के लिए अब दो बड़े अपडेट महत्वपूर्ण हैं।
पहला, हरियाणा सरकार खरीद 1 अक्टूबर से ही शुरू करती है या किसानों की मांग के बाद तारीख पहले करती है।
दूसरा, 17 प्रतिशत नमी की मौजूदा सीमा में कोई छूट मिलती है या नहीं।
फिलहाल सरकारी एमएसपी साफ है—कॉमन धान 2,441 रुपये और ग्रेड-ए 2,461 रुपये प्रति क्विंटल। वहीं खरीद मानकों में नमी की मौजूदा सीमा 17 प्रतिशत है। इसलिए कटाई शुरू करने वाले किसान अपनी फसल की नमी और मेरी फसल-मेरा ब्यौरा रिकॉर्ड दोनों पहले से चेक रखें।








