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खेती-बाड़ी

मूंगफली की कटाई के बाद खाली खेत में ये फसलें लगा सकते हैं हरियाणा के किसान, कम समय में होगी अच्छी कमाई

मूंगफली की कटाई के बाद खाली खेत में हरियाणा के किसान मूली, पालक, फूलगोभी और ब्रोकली जैसी फसलें ले सकते हैं। जानें सही बुवाई समय और अगली रबी फसल का हिसाब।

मूंगफली की कटाई के बाद खाली खेत में अगली फसल की तैयारी करते हरियाणा के किसान
मूंगफली की कटाई के बाद खाली खेत में अगली फसल की तैयारी करते हरियाणा के किसान

हरियाणा के जिन किसानों के खेत ग्रीष्मकालीन मूंगफली की खुदाई के बाद अगस्त के आखिर में खाली हो रहे हैं, उनके लिए अगली फसल का चुनाव बहुत महत्वपूर्ण है। इस समय सामान्य खरीफ फसलों की बुवाई का समय लगभग निकल चुका है, इसलिए बाजरा या ग्वार जैसी फसलें देर से बोना हर जगह सही विकल्प नहीं होगा। इसके बजाय किसान जल्दी तैयार होने वाली सब्जियों या कम अवधि वाली दूसरी फसलों की ओर जा सकते हैं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की सलाह के मुताबिक बाजरा की देर से बुवाई अधिकतम अगस्त के पहले सप्ताह तक और ग्वार की बुवाई जुलाई के अंत तक करना बेहतर माना गया है।

ग्रीष्मकालीन मूंगफली की कुछ फसलें अगस्त के अंत से सितंबर तक खुदाई के लिए तैयार हो सकती हैं। ICAR की कृषि सामग्री में भी गेहूं के बाद बोई जाने वाली ग्रीष्मकालीन मूंगफली की कुछ किस्मों के अगस्त-सितंबर में तैयार होने का उल्लेख है। हालांकि हरियाणा सरकार द्वारा खरीफ मूंगफली की सामान्य कटाई अवधि अलग से अक्टूबर-नवंबर के लिए अधिसूचित है, इसलिए यहां बात ग्रीष्मकालीन मूंगफली के बाद खाली हुए खेतों की है।

मूंगफली के बाद सितंबर की मूली बन सकती है अच्छा विकल्प

मूंगफली निकलने के बाद किसान सितंबर में मूली की बुवाई की तैयारी कर सकते हैं। हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय के अनुसंधान में Punjab Safed किस्म को सितंबर के दूसरे सप्ताह और Hisar Selection-1 को सितंबर के अंतिम सप्ताह में बोने पर अच्छी उपज दर्ज की गई है।

मूली कम अवधि में तैयार होने वाली सब्जियों में शामिल है। पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के मौजूदा सब्जी पैकेज में इसकी बुवाई सितंबर-अक्टूबर और पहली कटाई करीब 45 दिन में बताई गई है। हरियाणा की परिस्थितियों में किसान अपने जिले और मिट्टी के अनुसार स्थानीय कृषि विशेषज्ञ से किस्म की पुष्टि करके इसकी खेती कर सकते हैं।

इसका फायदा यह है कि सितंबर में लगाई गई शुरुआती मूली रबी की मुख्य फसल से पहले बाजार में आ सकती है।

पालक भी दे सकता है जल्दी तुड़ाई

हरी पत्तेदार सब्जी की मांग वाले इलाकों में पालक भी एक विकल्प है। पंजाब के आधिकारिक सब्जी पैकेज में पालक की बुवाई सितंबर-अक्टूबर और पहली कटाई लगभग 30 दिन में बताई गई है।

यानी मूंगफली की खुदाई के बाद खेत जल्दी तैयार हो जाए तो किसान सितंबर में पालक लगाकर अपेक्षाकृत कम समय में पहली तुड़ाई तक पहुंच सकता है।

पालक जैसे पत्तेदार उत्पादों में बाजार तक जल्दी पहुंच बहुत महत्वपूर्ण है। इसलिए जिन किसानों के पास नजदीक शहर, सब्जी मंडी या स्थानीय बिक्री का रास्ता है, उनके लिए यह विकल्प ज्यादा उपयोगी हो सकता है।

फूलगोभी के लिए भी सही समय शुरू

अगस्त के आखिर और सितंबर में मध्यम अवधि वाली फूलगोभी की रोपाई का समय भी आता है। मौजूदा सब्जी उत्पादन पैकेज में अगस्त-सितंबर को फूलगोभी की एक महत्वपूर्ण रोपाई अवधि बताया गया है।

मूंगफली के बाद किसान पूरे खेत में सीधे बीज डालने के बजाय तैयार पौध लेकर रोपाई कर सकते हैं। इससे खाली खेत का जल्दी उपयोग किया जा सकता है।

लेकिन फूलगोभी की खेती में स्थानीय बाजार, किस्म और रोपाई की सही तारीख महत्वपूर्ण है। बहुत जल्दी या बहुत देर लगाने पर फूल बनने और गुणवत्ता पर असर पड़ सकता है।

ब्रोकली के लिए अगस्त के आखिर से सितंबर तक मौका

जिन किसानों के पास शहरों, होटल-रेस्तरां या बड़े सब्जी बाजार तक पहुंच है, उनके लिए ब्रोकली भी एक विकल्प हो सकती है।

पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के पैकेज के मुताबिक ब्रोकली की बुवाई/रोपाई की उपयुक्त अवधि मध्य अगस्त से मध्य सितंबर तक है और फसल लगभग 72 दिन में तैयार हो सकती है।

हालांकि ब्रोकली को हर किसान के लिए सिर्फ “महंगी सब्जी” समझकर लगाना सही नहीं होगा। इसकी मांग सामान्य सब्जियों जैसी हर मंडी में नहीं होती। बुवाई से पहले किसान को स्थानीय खरीदार और बाजार की जानकारी जरूर कर लेनी चाहिए।

सितंबर से दूसरी पत्तेदार सब्जियों की भी तैयारी

अगस्त के आखिरी सप्ताह में मूंगफली निकालने वाले किसानों के पास एक और फायदा है—वे खेत तैयार करके सितंबर की दूसरी सब्जियों की बुवाई के लिए समय पर पहुंच सकते हैं।

कृषि सलाहों में अगस्त-सितंबर के आसपास मूली और दूसरी जड़-पत्तेदार सब्जियों की बुवाई की तैयारी की जाती है। YouTube पर खेती से जुड़े लोकप्रिय चैनलों की अगस्त वाली crop-planning videos में भी मूली, धनिया, गोभी, गाजर, बैंगन और दूसरी सब्जियों को इस समय संभावित विकल्प के तौर पर चर्चा में रखा गया है। लेकिन हर वीडियो में बताई फसल Haryana की हर स्थिति में सही हो, यह जरूरी नहीं है; इसलिए बुवाई की तारीख को कृषि विश्वविद्यालय की सिफारिश से मिलाना जरूरी है।

यही वजह है कि इस समय LocalHaryana के लिए सबसे सुरक्षित विकल्प वे फसलें हैं जिनकी सितंबर की बुवाई का वैज्ञानिक आधार स्पष्ट है, न कि केवल सोशल मीडिया पर बताई गई लंबी crop list।

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खेत में पानी खड़ा है तो तुरंत बुवाई न करें

मूंगफली की खुदाई के बाद अगली फसल जल्दी लेने की कोशिश में सबसे बड़ी गलती पानी भरे खेत में तुरंत बुवाई करना हो सकती है।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय की मानसून सलाह में भी खेत में जमा पानी निकालने को प्राथमिकता दी गई है। जलभराव होने पर पहले पानी की निकासी करें और मिट्टी के काम करने लायक अवस्था में आने के बाद ही खेत तैयार करें।

सब्जियों के लिए खास तौर पर खेत का जल निकास अच्छा होना जरूरी है। मूली, पालक और गोभी जैसी फसलों में लगातार पानी जमा रहने से जड़ और पौधों को नुकसान हो सकता है।

मूंगफली के बाद खेत तैयार करते समय क्या करें?

मूंगफली की फसल निकालने के बाद किसान को अगली फसल बोने से पहले खेत की स्थिति देखनी चाहिए। अगर खेत में पर्याप्त नमी है तो जरूरत से ज्यादा जुताई करने से नमी कम हो सकती है। वहीं बारिश के कारण मिट्टी चिपचिपी हो तो कुछ दिन इंतजार करना बेहतर हो सकता है।

खाद की मात्रा किसी तय फार्मूले से लगाने के बजाय मिट्टी परीक्षण के आधार पर तय करना ज्यादा सही है। HAU भी उर्वरक प्रबंधन में मिट्टी की स्थिति के हिसाब से पोषण देने पर जोर देता है। किसान कृषि विज्ञान केंद्र या HAU की किसान सलाह सेवा से अपने खेत की स्थिति के अनुसार जानकारी ले सकते हैं।

हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय किसान सेवा केंद्र की हेल्पलाइन 1800-180-3001 पर सोमवार, बुधवार और शुक्रवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक विशेषज्ञ सलाह उपलब्ध कराता है।

एक साथ पूरा खेत सब्जी में लगाना जरूरी नहीं

सब्जियों में गेहूं या सरसों की तरह तय सरकारी खरीद का भरोसा नहीं होता। कीमतें मंडी, उत्पादन और मांग के अनुसार तेजी से बदल सकती हैं।

इसलिए छोटे किसान के लिए पूरे खेत में एक ही सब्जी लगाने के बजाय उपलब्ध जमीन को अलग-अलग हिस्सों में बांटकर या कुछ दिनों के अंतर से बुवाई करना जोखिम कम करने का तरीका हो सकता है। इससे पूरी फसल एक ही दिन बाजार में पहुंचने की समस्या भी कम होती है।

मूली और पालक जैसी जल्दी तैयार होने वाली फसलों में यह तरीका खास तौर पर उपयोगी हो सकता है।

रबी में सरसों या गेहूं लेना है तो पहले समय का हिसाब रखें

मूंगफली के बाद कोई भी छोटी अवधि की फसल चुनते समय अगली मुख्य रबी फसल को ध्यान में रखना जरूरी है।

अगर किसान अक्टूबर में सरसों की समय पर बुवाई करना चाहता है तो ऐसी फसल चुननी चाहिए जो खेत खाली करने में देरी न करे। इसी तरह गेहूं की बुवाई का लक्ष्य रखने वाले किसान के पास थोड़ा ज्यादा समय हो सकता है।

इसी कारण 30 से 45 दिन में शुरुआती तुड़ाई देने वाली पालक या मूली जैसे विकल्प कुछ किसानों के लिए उपयोगी हो सकते हैं, जबकि 70 दिन या उससे ज्यादा अवधि वाली फसल चुनते समय अगली रबी फसल की तारीख जरूर देखनी होगी।

एक नजर में किसान के पास कौन-से विकल्प?

फसल उपयुक्त शुरुआत शुरुआती उपज/तैयारी का अनुमान किसके लिए बेहतर
मूली सितंबर करीब 45 दिन स्थानीय मंडी वाले किसान
पालक सितंबर करीब 30 दिन में पहली कटाई शहर/स्थानीय बाजार के पास
फूलगोभी अगस्त-सितंबर किस्म के अनुसार सब्जी मंडी से जुड़े किसान
ब्रोकली मध्य अगस्त-मध्य सितंबर करीब 72 दिन बेहतर बाजार पहुंच वाले किसान

ये अवधि सामान्य सिफारिशें हैं। किस्म, तापमान, मिट्टी, सिंचाई और मौसम के अनुसार फसल तैयार होने का समय बदल सकता है।

कम समय वाली सब्जियां किसानों को मूंगफली और रबी की अगली मुख्य फसल के बीच खाली समय का उपयोग करने का मौका दे सकती हैं। लेकिन “अच्छी कमाई” की कोई निश्चित गारंटी नहीं है—असली आमदनी उपज, लागत और बुवाई के समय मंडी में मिलने वाले भाव पर निर्भर करेगी।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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