हरियाणा में नर्सरी लाइसेंस अनिवार्य, जानें आवेदन फीस, जमीन और जरूरी शर्तें
हरियाणा बागवानी पौधशाला नियम 2026 के तहत नर्सरी लाइसेंस अनिवार्य है। जानें ऑनलाइन आवेदन, फीस, जमीन, प्रशिक्षण, QR कोड और जुर्माने के नियम।
हरियाणा में अब बिना लाइसेंस बागवानी नर्सरी चलाना मान्य नहीं होगा। फलदार पौधों के साथ फूल, सब्जी, सजावटी, औषधीय और सुगंधित पौधों की नर्सरी चलाने वाले संचालकों को भी निर्धारित प्रक्रिया के तहत पंजीकरण करवाकर लाइसेंस लेना होगा।
हरियाणा सरकार ने 30 जून 2026 को हरियाणा बागवानी पौधशाला नियम, 2026 अधिसूचित किए थे। इन नियमों का उद्देश्य केवल नर्सरियों का रिकॉर्ड तैयार करना नहीं, बल्कि किसानों और दूसरे खरीदारों को सही किस्म के रोगमुक्त एवं गुणवत्तापूर्ण पौधे उपलब्ध करवाना है।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब पौधा बेचने वाली नर्सरी को उसकी किस्म, स्रोत और गुणवत्ता की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। यदि किसान को बिल में लिखी किस्म के स्थान पर कोई दूसरा या घटिया पौधा दिया जाता है तो नर्सरी संचालक के खिलाफ कार्रवाई के साथ मुआवजे का प्रावधान भी है।
किन नर्सरियों के लिए लाइसेंस लेना जरूरी है?
नए नियम केवल फलदार पौधों की नर्सरियों तक सीमित नहीं हैं। इनके दायरे में मुख्य रूप से ये पौधशालाएं आएंगी—
- फलदार पौधों की नर्सरी
- सब्जियों और कंद वाली फसलों की पौध
- फूल एवं सजावटी पौधे
- मसाले और सुगंधित फसलें
- औषधीय पौधे
- सरकार द्वारा बागवानी पौध के रूप में अधिसूचित अन्य पौधे
एक ही संचालक की अलग-अलग स्थानों पर एक से अधिक नर्सरियां हैं तो प्रत्येक पौधशाला के लिए अलग लाइसेंस लेना होगा।
हरियाणा में नर्सरी का लाइसेंस कैसे मिलेगा?
लाइसेंस के लिए नर्सरी संचालक को हरियाणा बागवानी विभाग की वेबसाइट hortharyana.gov.in पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा। आवेदन नर्सरी में बेचे या तैयार किए जाने वाले पौधों की श्रेणी के अनुसार किया जाएगा।
फलदार पौधों की नर्सरी चलाने वाले संचालक को आवेदन में पौधे की किस्म और उपकिस्म की जानकारी भी देनी होगी। आवेदन मिलने के बाद सक्षम प्राधिकारी स्वयं अथवा किसी अधिकृत अधिकारी से नर्सरी का निरीक्षण करवाएगा।
निरीक्षण अधिकारी अपनी रिपोर्ट ऑनलाइन दर्ज करेगा। निर्धारित मानक पूरे मिलने पर लाइसेंस ऑनलाइन जारी किया जाएगा। लाइसेंस स्वीकार या अस्वीकार करने का निर्णय आवेदन मिलने के 90 दिन के भीतर किया जाना है।
नर्सरी लाइसेंस बनवाने में कितनी फीस लगेगी?
सरकार ने फलदार और अन्य बागवानी पौधों की नर्सरी के लिए अलग-अलग फीस निर्धारित की है।
| नर्सरी की श्रेणी | नए लाइसेंस की फीस | नवीनीकरण फीस |
|---|---|---|
| फलदार पौधों की नर्सरी | 20,000 रुपये | 10,000 रुपये |
| फलदार पौधों के अलावा अन्य बागवानी पौधे | 10,000 रुपये | 5,000 रुपये |
लाइसेंस पांच वर्ष तक वैध रहेगा। शर्तें पूरी होने पर इसे अगले पांच वर्ष के लिए नवीनीकृत करवाया जा सकेगा।
नवीनीकरण का आवेदन लाइसेंस समाप्त होने से कम से कम 30 दिन पहले करना होगा। निर्धारित अवधि के बाद आवेदन करने पर 2,000 रुपये विलंब फीस देनी पड़ेगी।
यदि लाइसेंस या नवीनीकरण का आवेदन अस्वीकार होता है तो प्रसंस्करण लागत के रूप में जमा फीस का पांच प्रतिशत काटकर बाकी राशि वापस करने का प्रावधान है।
फलदार पौधों की नर्सरी के लिए क्या शर्तें हैं?
फलदार पौधों की नर्सरी का लाइसेंस लेने के लिए संचालक के पास संबंधित पौधे की ज्ञात वंशावली वाले कम से कम 25 मातृ पौधे होने चाहिए।
इसके अलावा न्यूनतम एक एकड़ जमीन स्वयं के नाम होनी चाहिए। यदि जमीन पट्टे पर ली गई है तो उसका कम से कम 10 वर्ष की अवधि का पंजीकृत पट्टा होना जरूरी है।
नर्सरी संचालक को मान्यता प्राप्त संस्थान से कम से कम एक सप्ताह का प्रशिक्षण भी लेना होगा। यह प्रशिक्षण इनमें से किसी संस्थान से प्राप्त किया जा सकता है—
- बागवानी विभाग का बागवानी प्रशिक्षण संस्थान
- उत्कृष्टता केंद्र
- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद का संस्थान
- राज्य कृषि या बागवानी विश्वविद्यालय
इसके साथ मान्यता प्राप्त प्रयोगशाला की ऐसी जांच रिपोर्ट देनी होगी, जिसमें नर्सरी की मिट्टी को मृदा जनित रोगजनकों से मुक्त बताया गया हो।
फूल और सजावटी पौधों की नर्सरी के लिए कितनी जमीन चाहिए?
फलदार पौधों से अलग फूल, सजावटी, औषधीय अथवा दूसरी बागवानी पौध सामग्री की नर्सरी के लिए कम से कम 1,000 वर्ग मीटर जमीन जरूरी होगी।
जमीन नर्सरी संचालक की अपनी हो सकती है। पट्टे की जमीन पर नर्सरी चलाई जा रही है तो उसका कम से कम तीन वर्ष का पंजीकृत पट्टा होना चाहिए।
इस श्रेणी के संचालकों को भी निर्धारित प्रशिक्षण और मिट्टी की जांच से संबंधित मानक पूरे करने होंगे।
हर फलदार पौधे पर मिलेगी किस्म और स्रोत की जानकारी
नए नियमों का सीधा लाभ पौधे खरीदने वाले किसानों को मिलेगा। नर्सरी से बेचे जाने वाले प्रत्येक फलदार पौधे पर जलरोधक लेबल अथवा QR कोड लगाना जरूरी होगा।
इस लेबल या QR कोड में पौधे से संबंधित ये जानकारियां उपलब्ध होंगी—
- पौधे की किस्म और उपकिस्म
- पौधे की आयु
- पौधा या प्रवर्धन सामग्री प्राप्त करने का स्रोत
- मूलवृंत यानी रूटस्टॉक का विवरण
पौधों के पैकेज अथवा पात्र पर भी संबंधित किस्म की स्पष्ट पहचान देनी होगी। इससे किसान पौधा खरीदते समय ही उसकी पहचान जांच सकेगा और बाद में गलत किस्म निकलने पर खरीद का प्रमाण भी प्रस्तुत कर सकेगा।
नर्सरी संचालक को देना होगा प्रत्येक बिक्री का बिल
हर नर्सरी संचालक को पौधों और पौध सामग्री की खरीद-बिक्री का पूरा रिकॉर्ड रखना होगा। फलदार पौधों की नर्सरी को मूलवृंत और सांकुर शाखा के स्रोत का विवरण भी दर्ज करना होगा।
प्रत्येक खरीदार को निर्धारित प्रारूप में बिक्री रसीद देना अनिवार्य होगा। नर्सरी संचालक को पौध संरक्षण के लिए किए गए उपायों तथा निरीक्षण अधिकारी के निर्देशों का रिकॉर्ड भी रखना पड़ेगा।
किसानों को पौधा खरीदने के बाद बिल सुरक्षित रखना चाहिए। भविष्य में पौधा बिल में लिखी किस्म से अलग निकलने अथवा उसकी गुणवत्ता को लेकर विवाद होने पर यही बिल शिकायत और मुआवजे के दावे का महत्वपूर्ण प्रमाण बनेगा।
गलत किस्म या घटिया पौधा मिलने पर क्या होगा?
यदि नर्सरी संचालक बिल में दर्ज किस्म के अनुसार वास्तविक पौधा उपलब्ध नहीं करवाता तो इसे अधिनियम का उल्लंघन माना जाएगा।
गैर-सजावटी बागवानी पौधे के मामले में किसान को खेती पर आई लागत के दोगुने तक मुआवजे का प्रावधान है। सजावटी पौधे के मामले में मुआवजा पौधे की खरीद कीमत के दोगुने तक हो सकता है। मुआवजे का निर्णय निर्धारित समिति की सिफारिश के आधार पर होगा।
संक्रमित, अज्ञात वंशावली वाले या नियमों के विपरीत तैयार किए गए पौध स्टॉक को नष्ट भी करवाया जा सकता है।
बिना लाइसेंस नर्सरी चलाने पर कितना जुर्माना लगेगा?
अधिनियम या नियमों का उल्लंघन करने तथा अधिकृत अधिकारी को निरीक्षण या कार्रवाई से रोकने पर—
- एक वर्ष तक कारावास,
- एक लाख रुपये तक जुर्माना,
- अथवा दोनों सजाएं हो सकती हैं।
नियमों का पालन नहीं करने पर नर्सरी का लाइसेंस निलंबित या रद्द भी किया जा सकता है।
लाइसेंस आवेदन खारिज होने पर कहां अपील करें?
यदि किसी नर्सरी संचालक का नया लाइसेंस या नवीनीकरण आवेदन अस्वीकार होता है अथवा उसका लाइसेंस निलंबित या रद्द किया जाता है तो वह आदेश के 45 दिन के भीतर ऑनलाइन अपील कर सकता है।
अपील निर्धारित वेबसाइट के माध्यम से करनी होगी और इसके लिए 1,000 रुपये की अप्रतिदेय फीस देनी होगी।
पौधा खरीदते समय किसान इन पांच बातों की जांच करें
किसानों को अब केवल पौधे की कीमत देखकर खरीदारी नहीं करनी चाहिए। पौधा खरीदते समय ये बातें जरूर जांचें—
- नर्सरी के पास वैध लाइसेंस है या नहीं।
- पौधे की किस्म और उपकिस्म क्या है।
- फलदार पौधे पर लेबल या QR कोड लगा है या नहीं।
- पौधे की आयु, स्रोत और रूटस्टॉक की जानकारी उपलब्ध है या नहीं।
- नर्सरी द्वारा पक्का बिल दिया जा रहा है या नहीं।
इस व्यवस्था से किसानों को गलत किस्म, रोगग्रस्त पौध और बिना प्रमाण वाले रोपण स्टॉक से बचाने में मदद मिलेगी। साथ ही किसी गड़बड़ी की स्थिति में नर्सरी संचालक की जवाबदेही तय करना भी आसान होगा।








