हरियाणा के गन्ना किसानों के लिए चेतावनी, इस किस्म पर Red Rot का खतरा; वैज्ञानिकों ने बताए विकल्प
रियाणा में Co-0238 गन्ने पर Red Rot का खतरा बढ़ा है। वैज्ञानिक Co-0118, Co-15023 समेत विकल्प और रोग पहचान-बचाव की सलाह दे रहे हैं।
करनाल। हरियाणा में बड़े पैमाने पर बोई जाने वाली गन्ने की Co-0238 (करण-4) किस्म पर Red Rot यानी लाल सड़न रोग का खतरा बढ़ गया है। वैज्ञानिकों ने किसानों को एक ही किस्म पर ज्यादा निर्भर नहीं रहने और अगले रोपण में रोग प्रतिरोधी विकल्प अपनाने की सलाह दी है। Co-0238 वही अधिक उपज और बेहतर चीनी रिकवरी वाली किस्म है, जिसे करनाल स्थित ICAR-गन्ना प्रजनन संस्थान के क्षेत्रीय केंद्र ने विकसित किया था।
Co-0238 को वर्ष 2009 में हरियाणा, पंजाब, राजस्थान, उत्तराखंड और पश्चिमी-मध्य उत्तर प्रदेश के लिए जारी किया गया था। शुरुआती परीक्षणों में इसकी औसत गन्ना उपज करीब 81 टन प्रति हेक्टेयर रही थी। बेहतर पैदावार और चीनी रिकवरी के कारण यह उत्तर भारत में तेजी से किसानों की पसंद बनी, लेकिन लंबे समय तक बड़े क्षेत्र में एक ही किस्म की खेती ने रोग का जोखिम भी बढ़ाया।
हरियाणा के कई गन्ना क्षेत्रों में मिल चुका है Red Rot
ICAR के पिछले फील्ड सर्वे में हरियाणा के करनाल, पानीपत, शाहाबाद, भादसों और असंध से जुड़े चीनी मिल क्षेत्रों में Co-0238 पर Red Rot का हल्के से गंभीर स्तर तक प्रकोप दर्ज किया जा चुका है। कुछ सर्वे में बीमारी की गंभीरता 40 प्रतिशत तक दर्ज हुई थी। करनाल और पलवल क्षेत्र में भी Co-0238 पर संक्रमण दर्ज किया गया।
इसका असर केवल पौधे के सूखने तक सीमित नहीं रहता। बीमारी बढ़ने पर गन्ने का वजन, रस, सुक्रोज और चीनी रिकवरी प्रभावित होती है।
पानीपत में 2025-26 सीजन के दौरान गन्ने की प्रति एकड़ पैदावार में करीब 15 प्रतिशत गिरावट दर्ज की गई थी। किसानों और अधिकारियों ने इसके पीछे भारी बारिश के साथ Red Rot और Top Borer जैसे कारण भी बताए थे। हालांकि पूरी गिरावट को अकेले Red Rot से नहीं जोड़ा गया है।
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गन्ने में Red Rot की पहचान कैसे करें?
लाल सड़न की शुरुआती अवस्था में ऊपर की पत्तियां पीली पड़ने और धीरे-धीरे सूखने लग सकती हैं। रोग की सही पहचान के लिए संदिग्ध गन्ने को लंबाई में काटकर अंदर का हिस्सा देखना महत्वपूर्ण है।
संक्रमित गन्ने के अंदर का ऊतक लाल दिखाई देता है और बीच-बीच में सफेद पट्टियां या धब्बे नजर आते हैं। गंभीर संक्रमण में गन्ना हल्का और सिकुड़ा हुआ हो सकता है तथा अंदर से खट्टी या अल्कोहल जैसी गंध आ सकती है।
इसी गंभीर नुकसान के कारण Red Rot को गन्ने का “कैंसर” भी कहा जाता है।
Co-0238 की जगह कौन-सी किस्म लगा सकते हैं किसान?
करनाल स्थित गन्ना प्रजनन केंद्र के वैज्ञानिक पहले किसानों को Co-0118 और Co-15023 को Co-0238 के विकल्प के रूप में अपनाने की सलाह दे चुके हैं। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. रविंद्र कुमार के अनुसार Co-0238 में लाल सड़न का प्रकोप बढ़ने के बाद इन किस्मों को विकल्प के रूप में आगे बढ़ाया जा रहा है।
इसके अलावा उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए विकसित नई किस्मों में Co-16030 (करण-16), Ikshu-10 (CoLk-14201) और Ikshu-14 (CoLk-15206) जैसी किस्में भी Red Rot के प्रति प्रतिरोधी या मध्यम प्रतिरोधी पाई गई हैं। Co-16030 को हरियाणा सहित उत्तर-पश्चिम क्षेत्र के लिए लगभग 95 टन प्रति हेक्टेयर तक औसत उपज क्षमता वाली किस्म के रूप में दर्ज किया गया है।
हालांकि किसान को नई किस्म चुनने से पहले अपने क्षेत्र की मिट्टी, बुवाई का समय, पानी की स्थिति और संबंधित चीनी मिल या कृषि वैज्ञानिक की सिफारिश जरूर देखनी चाहिए। सभी किस्में हर खेत की स्थिति के लिए एक जैसी उपयुक्त नहीं होतीं।
खेत में अभी Co-0238 खड़ी है तो क्या करें?
वैज्ञानिकों की सलाह के अनुसार रोगग्रस्त गन्ने को अगली फसल के बीज के रूप में इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। संक्रमित पौधों या पूरे रोगग्रस्त झुंड को समय रहते खेत से हटाना बीमारी फैलने से रोकने में मदद करता है।
नई बुवाई के लिए स्वस्थ और प्रमाणित बीज का इस्तेमाल, बुवाई से पहले बीज उपचार और खेत में पानी निकासी की सही व्यवस्था जरूरी है। ICAR-IISR भी Red Rot नियंत्रण में स्वस्थ planting material, sett treatment और रोग प्रतिरोधी किस्मों के इस्तेमाल पर जोर देता है।
किसान को खेत में संदिग्ध पौधे दिखने पर नजदीकी कृषि विज्ञान केंद्र, गन्ना विकास अधिकारी या संबंधित चीनी मिल के गन्ना विभाग से रोग की पुष्टि करानी चाहिए। बीमारी की पुष्टि होने के बाद ही स्थानीय सिफारिश के अनुसार उपचार करना बेहतर रहेगा।
एक ही गन्ना किस्म पर निर्भरता बढ़ाती है खतरा
ICAR के वैज्ञानिक पहले भी गन्ना क्षेत्र में varietal diversity बढ़ाने की जरूरत बता चुके हैं। संस्थान की सलाह है कि किसी एक किस्म को बहुत बड़े क्षेत्र में लगातार बोने से रोगजनक की नई races के सामने पूरी फसल अधिक संवेदनशील हो सकती है। Red Rot के मामले में Co-0238 के साथ यही चुनौती सामने आई है।
इसी वजह से हरियाणा के गन्ना किसानों के लिए आने वाले रोपण सीजन में केवल अधिक पैदावार नहीं, बल्कि Red Rot resistance, स्थानीय परिस्थितियां और चीनी रिकवरी तीनों को देखकर किस्म चुनना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा।








