हरियाणा में 15 सितंबर से धान खरीद की मांग, गन्ने का रेट 600 रुपये
हरियाणा में किसानों ने 1 अक्टूबर के बजाय 15 सितंबर से धान की सरकारी खरीद शुरू करने और गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग रखी है। जानें धान का नया MSP और सरकार ने क्या फैसला लिया।
हरियाणा में खरीफ सीजन की सरकारी खरीद शुरू होने से पहले किसानों ने धान और गन्ने को लेकर सरकार पर दबाव बढ़ाना शुरू कर दिया है। भारतीय किसान यूनियन चढ़ूनी ने धान की सरकारी खरीद 1 अक्टूबर के बजाय 15 सितंबर से शुरू करने की मांग रखी है। इसके साथ ही आगामी पेराई सत्र के लिए गन्ने का भाव बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने को कहा गया है।
फिलहाल सरकार ने न तो 15 सितंबर से धान खरीद शुरू करने और न ही गन्ने का भाव 600 रुपये करने की घोषणा की है। ये किसान संगठन की ओर से सरकार के सामने रखी गई मांगें हैं।
किसान 1 अक्टूबर तक इंतजार क्यों नहीं करना चाहते?
किसान नेताओं का कहना है कि धान की जल्दी पकने वाली किस्में सितंबर में मंडियों में पहुंचने लगती हैं। यदि सरकारी खरीद 1 अक्टूबर से शुरू होती है तो किसानों को तैयार फसल कई दिनों तक संभालकर रखनी पड़ती है।
जिन किसानों के पास धान रखने की पर्याप्त जगह नहीं होती, उनके सामने फसल को निजी खरीदारों के हाथ बेचने की स्थिति बन सकती है। सरकारी खरीद शुरू नहीं होने पर किसान को न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम भाव मिलने का खतरा भी रहता है। इसी अंतर को खत्म करने के लिए खरीद 15 दिन पहले शुरू करने की मांग उठाई गई है।
भारतीय किसान संघ की ओर से भी हाल ही में 15 सितंबर से धान खरीद शुरू करने और मंडियों से समय पर फसल उठाने की मांग की गई थी। इससे स्पष्ट है कि सरकारी खरीद की तारीख इस बार अलग-अलग किसान संगठनों के प्रमुख मुद्दों में शामिल हो रही है।
धान का कितना मिलेगा सरकारी भाव?
केंद्र सरकार ने खरीफ मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए सामान्य धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,441 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। ग्रेड-ए धान के लिए एमएसपी 2,461 रुपये प्रति क्विंटल तय किया गया है।
पिछले सीजन में सामान्य धान का एमएसपी 2,369 रुपये और ग्रेड-ए का 2,389 रुपये प्रति क्विंटल था। इस तरह दोनों श्रेणियों के समर्थन मूल्य में 72 रुपये प्रति क्विंटल की वृद्धि हुई है।
हालांकि एमएसपी घोषित होना और मंडियों में सरकारी खरीद शुरू होना अलग-अलग बातें हैं। किसान अपनी फसल निर्धारित समर्थन मूल्य पर तभी बेच पाएगा, जब खरीद केंद्रों पर सरकारी एजेंसियों की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
बायोमेट्रिक और मंडियों की व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
किसान संगठन ने धान खरीद में लागू बायोमेट्रिक व्यवस्था के दौरान आने वाली व्यावहारिक परेशानियों का समाधान करने की मांग की है। इसके अतिरिक्त मंडियों में लंबे समय से कारोबार कर रहे पात्र आढ़तियों के बूथ लाइसेंस जारी करने अथवा उनका नवीनीकरण करने का मुद्दा भी उठाया गया।
किसानों के लिए खरीद शुरू होने की तारीख के साथ मंडियों से धान का समय पर उठान भी महत्वपूर्ण है। उठान में देरी होने पर मंडी में फसल जमा होती रहती है और नई आवक के लिए जगह कम पड़ सकती है। इसलिए खरीद सीजन शुरू होने से पहले एजेंसियों और मंडी प्रशासन की जिम्मेदारी स्पष्ट करने की मांग की जा रही है।
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₹415 से सीधे ₹600 क्यों मांग रहे गन्ना किसान?
हरियाणा में पेराई सत्र 2025-26 के दौरान अगेती किस्म के गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य 415 रुपये और मध्यम एवं पछेती किस्मों का भाव 408 रुपये प्रति क्विंटल है। अब किसान आगामी पेराई सत्र के लिए इसे बढ़ाकर 600 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग कर रहे हैं।
अगेती किस्म के मौजूदा भाव से तुलना करें तो किसानों की मांग 185 रुपये प्रति क्विंटल अधिक है। किसान संगठनों का तर्क है कि गन्ने की खेती में मजदूरी, खाद, दवा, सिंचाई और कटाई पर होने वाला खर्च बढ़ा है। इसलिए भाव भी उत्पादन लागत के अनुसार बढ़ाया जाना चाहिए।
सरकार ने नए पेराई सत्र के लिए गन्ने का राज्य परामर्श मूल्य अभी घोषित नहीं किया है। इसलिए 600 रुपये को नया सरकारी रेट समझना सही नहीं होगा।
सरकार के फैसले का इंतजार
भाकियू ने धान और गन्ने के अलावा सरसों की सरकारी खरीद 1 फरवरी तथा सूरजमुखी की खरीद 15 मई से शुरू करने की मांग भी रखी है। आलू भावांतर भरपाई योजना की लंबित राशि और कृषि यंत्रों पर मिलने वाली सब्सिडी का मुद्दा भी उठाया गया है।
फिलहाल किसानों के लिए सबसे जरूरी सवाल धान खरीद की वास्तविक तारीख है। सरकार की ओर से खरीफ खरीद का विस्तृत कार्यक्रम जारी होने के बाद ही स्पष्ट होगा कि मांग स्वीकार करते हुए प्रक्रिया 15 सितंबर से शुरू की जाएगी या पहले की व्यवस्था जारी रहेगी।
सरकारी खरीद शुरू होने से पहले किसानों को अपनी फसल का पंजीकरण और संबंधित रिकॉर्ड पूरा रखना होगा। तारीख, मंडी तथा गेट पास से जुड़ी जानकारी के लिए किसानों को हरियाणा के आधिकारिक ई-खरीद और मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल पर जारी सूचना की जांच करनी चाहिए।








