हरियाणा के 4 जिलों में दूध 100 रुपये लीटर करने की मुहिम, जानें कब से बदलेंगे रेट
हरियाणा के हिसार, जींद, कैथल और कुरुक्षेत्र में दूध का भाव 100 रुपये लीटर करने की मुहिम शुरू हुई है। जानें किन गांवों में कब से नया रेट लागू होगा और क्या Vita दूध भी महंगा होगा।
हरियाणा के कई गांवों में अब भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर से कम नहीं बेचने की मुहिम शुरू हो गई है। हिसार, जींद और कैथल के कुछ गांवों में पशुपालकों ने अपने स्तर पर दूध के न्यूनतम भाव तय किए हैं, जबकि कुरुक्षेत्र में इस मुद्दे पर 10 सितंबर को महापंचायत बुलाने की तैयारी है।
पशुपालकों का कहना है कि पशु आहार, हरा चारा, खल-बिनौला, दवाइयों और पशुओं की देखभाल का खर्च लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उसके मुकाबले उन्हें दूध का उचित भाव नहीं मिल रहा। इसी वजह से भैंस का दूध 100 रुपये और गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर बेचने की बात कही गई है।
यहां ध्यान रखने वाली बात यह है कि यह हरियाणा सरकार या वीटा की ओर से जारी कोई नया रेट नहीं है। फिलहाल अलग-अलग गांवों के पशुपालकों ने सामूहिक बैठक कर अपने स्तर पर ये भाव तय किए हैं।
जींद और कैथल के इन गांवों में 1 सितंबर से नया भाव
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार जींद जिले की जुलाना तहसील के सिरसा खेड़ी गांव में पशुपालकों ने 1 सितंबर से भैंस का दूध 100 रुपये प्रति लीटर बेचने का फैसला किया है। तय भाव से कम कीमत पर दूध बेचने वाले पशुपालक पर 5,100 रुपये जुर्माना लगाने की बात भी कही गई है।
कैथल जिले के धनौरी गांव में भी दुग्ध उत्पादकों ने 1 सितंबर से भैंस के दूध का न्यूनतम भाव 100 रुपये तय करने पर सहमति जताई है।
इसका मतलब यह नहीं है कि 1 सितंबर से जींद और कैथल जिले के प्रत्येक शहर और गांव में दूध 100 रुपये लीटर हो जाएगा। अभी यह फैसला संबंधित गांवों और वहां इस मुहिम से जुड़े पशुपालकों तक सीमित है।
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हिसार के गांवों में भैंस का दूध 100 रुपये और गाय का 80 रुपये
हिसार जिले के राजथल और भैणी अमीरपुर गांवों में भी पशुपालकों ने दूध, लस्सी और देसी घी के न्यूनतम बिक्री भाव तय किए हैं। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार इन गांवों में भैंस का दूध 100 रुपये और गाय का दूध 80 रुपये प्रति लीटर से कम नहीं बेचने का फैसला हुआ है।
देसी घी का न्यूनतम भाव 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम और लस्सी का भाव 20 रुपये प्रति लीटर तय किया गया है। निर्धारित कीमत से कम पर बिक्री करने वाले पशुपालक पर 5,100 रुपये जुर्माना लगाने की बात भी कही गई है।
एक अन्य रिपोर्ट में राजथल गांव में नए भाव 4 सितंबर से लागू करने की जानकारी दी गई है। इसलिए हिसार और जींद-कैथल के गांवों में शुरुआत की तारीख एक जैसी नहीं मानी जानी चाहिए।
कुरुक्षेत्र में 10 सितंबर को होगी महापंचायत
कुरुक्षेत्र के पिहोवा में भी दूध का खरीद भाव बढ़ाने की मांग उठी है। पशुपालकों और किसानों ने आगे की रणनीति तय करने के लिए 10 सितंबर को महापंचायत बुलाने की घोषणा की है।
कुरुक्षेत्र में अभी 100 रुपये प्रति लीटर का भाव लागू नहीं हुआ है। यहां फिलहाल पशुपालक अपनी मांग को संगठित तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं।
क्या Vita का दूध भी ₹100 लीटर हो जाएगा?
नहीं, अभी वीटा के पैकेट वाले दूध को 100 रुपये प्रति लीटर करने का कोई फैसला सामने नहीं आया है। गांवों के पशुपालकों द्वारा तय किया गया भाव मुख्य रूप से सीधे बेचे जाने वाले गाय और भैंस के खुले दूध से संबंधित है।
डेयरी फार्मर्स एसोसिएशन ने वीटा के अलग-अलग प्लांटों में दूध की खरीद कीमत बढ़ाने की मांग जरूर रखी है। रिपोर्ट के अनुसार खरीद भाव में दो से तीन रुपये प्रति किलोग्राम की वृद्धि मांगी गई है, लेकिन वीटा की ओर से नए खरीद या बिक्री भाव की घोषणा नहीं हुई है।
वीटा पशुपालकों से दूध खरीदकर उसकी जांच, प्रोसेसिंग और पैकिंग के बाद बाजार में बेचता है। इसलिए वीटा का खरीद भाव और ग्राहकों को मिलने वाले पैकेट के दूध का खुदरा भाव अलग-अलग होते हैं। केवल पशुपालकों की मांग आने से वीटा का दूध अपने-आप महंगा नहीं होगा।
क्या पूरे हरियाणा में दूध 100 रुपये प्रति लीटर मिलेगा?
फिलहाल ऐसा कहना सही नहीं होगा। अभी हिसार, जींद और कैथल के कुछ गांवों में भाव तय करने की जानकारी सामने आई है। कुरुक्षेत्र में महापंचायत होनी बाकी है। प्रदेशभर में दूध का एक समान नया भाव लागू करने संबंधी कोई सरकारी आदेश जारी नहीं हुआ है।
खुले दूध का भाव गांव, शहर, दूध में फैट की मात्रा और सप्लायर के अनुसार पहले से अलग-अलग रहता है। इसलिए इस मुहिम का वास्तविक असर उन्हीं स्थानों पर दिखाई देगा, जहां अधिकतर पशुपालक सामूहिक रूप से नए भाव पर दूध बेचने लगेंगे।
दूध महंगा हुआ तो घी-पनीर पर कितना असर पड़ेगा?
यदि स्थानीय डेयरियों को मिलने वाला दूध 20 से 30 रुपये प्रति लीटर महंगा होता है तो पनीर, दही, मावा, मक्खन और मिठाइयों की उत्पादन लागत भी बढ़ सकती है। हालांकि इन उत्पादों का नया बाजार भाव अभी तय नहीं हुआ है।
देसी घी के मामले में हिसार के संबंधित गांवों में 1,500 रुपये प्रति किलोग्राम का न्यूनतम भाव तय होने की पुष्टि हुई है। कुछ रिपोर्टों में घी का भाव 1,500 से 2,000 रुपये तक रखने की चर्चा है, लेकिन यह पूरे हरियाणा का निर्धारित भाव नहीं है।
पशुपालक क्यों बढ़ाना चाहते हैं दूध का भाव?
पशुपालकों का कहना है कि चारा, खल-बिनौला, दवाइयां, बिजली, मजदूरी और पशुओं के रखरखाव का खर्च बढ़ गया है। मौजूदा बिक्री भाव में पशुपालन से पर्याप्त आमदनी नहीं हो रही। इसी कारण गांव स्तर पर न्यूनतम दूध मूल्य तय करने की मुहिम शुरू की गई है।
अब इस मामले में तीन बातों पर नजर रहेगी—कितने गांव इस मुहिम में शामिल होते हैं, स्थानीय दूध विक्रेता और उपभोक्ता नए भाव को स्वीकार करते हैं या नहीं और वीटा पशुपालकों की खरीद भाव बढ़ाने की मांग पर क्या निर्णय लेता है।








