शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 | 01:29 ISTFollow us at:
योजना

हरियाणा में आवारा पशु से हादसे पर मिलेंगे 5 लाख रुपये, 90 दिन में ऐसे करें आवेदन

हरियाणा की दयालु-2 योजना में आवारा पशु से दुर्घटना, मौत, दिव्यांगता या कुत्ते के काटने पर 10 हजार से 5 लाख रुपये तक सहायता मिलती है। जानें पात्रता, दस्तावेज, आवेदन और स्टेटस देखने की प्रक्रिया।

हरियाणा में आवारा पशु से दुर्घटना पर दयालु-2 योजना के तहत मिलने वाली आर्थिक सहायता
दयालु-2 योजना में आवारा पशु से हुई दुर्घटना पर चोट के लिए न्यूनतम 10 हजार और मृत्यु या गंभीर दिव्यांगता पर पांच लाख रुपये तक सहायता मिल सकती है।

हरियाणा में सड़क पर आवारा पशु आने से दुर्घटना हो जाए, सांड हमला कर दे या कुत्ता काट ले तो पीड़ित को दयालु-2 योजना के तहत आर्थिक सहायता मिल सकती है। मृत्यु अथवा 70 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता के मामले में उम्र के अनुसार एक लाख से पांच लाख रुपये तक दिए जाते हैं। मामूली चोट के लिए न्यूनतम 10 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान है।

योजना का लाभ अपने आप नहीं मिलेगा। पीड़ित या उसके पात्र परिजन को घटना की तारीख से 90 दिनों के भीतर ऑनलाइन दावा करना होगा। एफआईआर, मेडिकल रिपोर्ट अथवा घाव की पूरी जानकारी नहीं होने पर आवेदन जिला स्तरीय समिति के पास अटक सकता है।

हरियाणा की दयालु-2 योजना क्या है?

दयालु-2 यानी दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना का उद्देश्य कुत्ते के काटने या आवारा पशु के कारण हुई मृत्यु, चोट और दिव्यांगता से प्रभावित हरियाणा के परिवारों को आर्थिक सहायता देना है।

इस योजना में गाय, बैल, सांड, भैंस, गधा, कुत्ता और नीलगाय जैसे पशुओं को शामिल किया गया है। जंगली और परित्यक्त पशुओं के कारण हुई दुर्घटना भी इसके दायरे में आ सकती है।

दयालु और दयालु-2 अलग-अलग श्रेणियां हैं। सामान्य दयालु योजना में परिवार की सत्यापित वार्षिक आय से संबंधित शर्त है, जबकि आवारा पशुओं वाली दयालु-2 योजना की आधिकारिक जानकारी के अनुसार इसका उद्देश्य परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत सभी परिवारों को कवर करना है। इसलिए आवेदन करते समय पोर्टल पर योजना के प्रकार में DAYALU-2 का चयन करना जरूरी है।

दयालु-2 योजना के लिए कौन पात्र है?

योजना का लाभ लेने के लिए पीड़ित का हरियाणा का निवासी होना और परिवार पहचान पत्र में पंजीकृत होना आवश्यक है। दुर्घटना का संबंध आवारा, जंगली अथवा परित्यक्त पशु या कुत्ते के काटने से होना चाहिए।

सड़क पर पशु आने से वाहन दुर्घटनाग्रस्त होने के मामले में पुलिस रिकॉर्ड में यह दर्ज होना जरूरी है कि हादसा पशु के कारण हुआ। एफआईआर अथवा डीडीआर में केवल “सड़क दुर्घटना” लिखी होने और पशु का उल्लेख नहीं मिलने पर दावे का सत्यापन मुश्किल हो सकता है।

अंतिम सहायता राशि और पात्रता पर फैसला जिला स्तरीय समिति करती है। केवल ऑनलाइन आवेदन जमा कर देने से मुआवजा स्वीकृत नहीं माना जाएगा।

दीनदयाल योजना में कितने पैसे मिलते हैं?

मृत्यु या 70 प्रतिशत अथवा इससे अधिक दिव्यांगता की स्थिति में सहायता पीड़ित की उम्र के आधार पर तय होगी।

पीड़ित की आयु मिलने वाली सहायता
0 से 12 वर्ष तक 1 लाख रुपये
12 से 18 वर्ष तक 2 लाख रुपये
18 से 25 वर्ष तक 3 लाख रुपये
25 से 45 वर्ष तक 5 लाख रुपये
45 वर्ष से अधिक 3 लाख रुपये

70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता की स्थिति में सहायता राशि दिव्यांगता के प्रतिशत और निर्धारित नियमों के अनुसार तय की जाएगी। दावा मंजूर होने के बाद पैसा डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजा जाएगा।

कुत्ते के काटने और सामान्य चोट पर कितना मुआवजा मिलेगा?

दयालु-2 योजना में मामूली चोट पर न्यूनतम 10 हजार रुपये की सहायता का प्रावधान किया गया है। कुत्ते के काटने पर प्रत्येक दांत के निशान के लिए न्यूनतम 10 हजार रुपये दिए जा सकते हैं।

यदि काटने से मांस त्वचा से अलग हो गया है तो प्रत्येक 0.2 सेंटीमीटर घाव के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये का प्रावधान है। वास्तविक सहायता चोट और उपलब्ध प्रमाणों की जांच के बाद समिति निर्धारित करेगी।

यहां मेडिकल रिपोर्ट सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेजों में से एक है। रिपोर्ट में केवल “डॉग बाइट” लिखवाना पर्याप्त नहीं हो सकता। इसमें दांतों के निशानों की संख्या, घाव का आकार और चोट की गंभीरता दर्ज होनी चाहिए। पंचकूला में मेडिकल रिकॉर्ड में दांतों के निशान का विवरण नहीं होने के कारण कई मुआवजा दावों में देरी सामने आ चुकी है।

पीड़ित को उपचार के समय ये प्रमाण सुरक्षित रखने चाहिए:

  • घाव और दांतों के निशान की स्पष्ट तस्वीरें
  • फटे कपड़े या हमले से बने दूसरे निशान
  • अस्पताल की पर्ची और उपचार रिकॉर्ड
  • मेडिकल अथवा मेडिको-लीगल रिपोर्ट
  • डिस्चार्ज सारांश

आवेदन के लिए कौन से दस्तावेज चाहिए?

आवश्यक दस्तावेज दावा मृत्यु, दिव्यांगता या चोट से संबंधित होने के अनुसार बदलेंगे।

मृत्यु के मामले में:

  • परिवार पहचान पत्र
  • मृत्यु प्रमाणपत्र
  • एफआईआर अथवा डीडीआर की प्रति
  • पशु के कारण दुर्घटना होने का उपलब्ध प्रमाण
  • दावेदार और बैंक खाते से संबंधित विवरण

दिव्यांगता के मामले में:

  • जिला मुख्य चिकित्सा अधिकारी या मेडिकल बोर्ड का दिव्यांगता प्रमाणपत्र
  • अस्पताल का डिस्चार्ज सारांश
  • एफआईआर अथवा डीडीआर
  • दुर्घटना और दिव्यांगता के बीच संबंध साबित करने वाले दस्तावेज

चोट या कुत्ते के काटने के मामले में:

  • मेडिकल रिपोर्ट और उपचार रिकॉर्ड
  • एफआईआर अथवा डीडीआर
  • दांतों के निशान और घाव की तस्वीरें
  • चोट की गंभीरता बताने वाले दस्तावेज
  • उपलब्ध होने पर फटे कपड़े और हमले के अन्य प्रमाण

पुलिस और मेडिकल रिकॉर्ड में पशु के हमले या उसके कारण हुई दुर्घटना का स्पष्ट उल्लेख होना चाहिए।

दयालु-2 योजना में आवेदन कैसे करें?

आवेदन दयालु योजना के आधिकारिक पोर्टल पर पूरी तरह निःशुल्क है। योजना का लाभ दिलाने के नाम पर किसी व्यक्ति को फीस देने की आवश्यकता नहीं है।

आवेदन की प्रक्रिया इस प्रकार है:

  1. आधिकारिक दयालु पोर्टल खोलें।
  2. Apply Scheme विकल्प चुनें।
  3. योजना के प्रकार में DAYALU-2 चुनें।
  4. परिवार पहचान पत्र का नंबर दर्ज करें।
  5. पंजीकृत मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी से सत्यापन करें।
  6. पीड़ित सदस्य और घटना से संबंधित जानकारी भरें।
  7. आवश्यक पुलिस, मेडिकल और दूसरे प्रमाण अपलोड करें।
  8. विवरण जांचने के बाद आवेदन जमा करें।

पोर्टल पर जन्मतिथि और परिवार के रिकॉर्ड का सत्यापन होने के बाद ही आवेदन आगे बढ़ेगा। यदि आवेदन में कोई गलती बताई जाती है तो पोर्टल के अनुसार उसे ठीक करने और दस्तावेज दोबारा अपलोड करने के लिए एक महीने का समय मिलता है।

आवेदन की अंतिम तारीख और स्टेटस कैसे देखें?

दयालु-2 योजना के लिए कोई एक वार्षिक अंतिम तारीख निर्धारित नहीं है। प्रत्येक मामले में अंतिम समय घटना की तारीख से तय होगा। पीड़ित या परिवार को घटना होने के 90 दिनों के भीतर दावा जमा करना होगा।

आवेदन का स्टेटस देखने के लिए:

  1. आधिकारिक पोर्टल पर View Request खोलें।
  2. योजना के प्रकार में DAYALU-2 चुनें।
  3. परिवार पहचान पत्र नंबर दर्ज करें।
  4. ओटीपी से सत्यापन करके आवेदन की स्थिति देखें।

योजना से संबंधित सहायता के लिए 0172-2996024 और 01262-257692 पर संपर्क किया जा सकता है।

लेखक

Kuldeep Singh

कुलदीप सिंह LocalHaryana.com पर लेखक के रुप में कार्यरत हैं। वे वर्ष 2021 से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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