हरियाणा के व्यापारियों को बड़ी राहत, 1 लाख रुपये तक पुराना टैक्स होगा पूरा माफ; 28 सितंबर तक मौका
हरियाणा में वन टाइम सेटलमेंट स्कीम के तहत एक लाख रुपये तक पुराना टैक्स, ब्याज और जुर्माना पूरा माफ होगा। बड़े बकाया पर भी छूट, 28 सितंबर अंतिम तारीख।

रेवाड़ी, 12 सितंबर। हरियाणा में पुराने टैक्स बकाया और उससे जुड़े विवादों में फंसे व्यापारियों के पास वन टाइम सेटलमेंट स्कीम का लाभ लेने के लिए 28 सितंबर तक का समय है। योजना में छोटे करदाताओं को सबसे बड़ी राहत दी गई है। किसी संबंधित कर कानून के तहत किसी एक वर्ष का टैक्स बकाया एक लाख रुपये तक है तो पूरा टैक्स, ब्याज और जुर्माना माफ होगा। ऐसे करदाता को इसके लिए अलग से आवेदन भी नहीं करना पड़ेगा।
एक लाख रुपये से अधिक बकाया वाले व्यापारियों को भी टैक्स में स्लैब के हिसाब से छूट मिलेगी, जबकि पात्र मामलों में ब्याज और जुर्माने पर 100 प्रतिशत छूट रखी गई है। पुराने टैक्स मामलों में अपील या मुकदमा लड़ रहे व्यापारी भी निर्धारित शर्तों के साथ योजना का लाभ ले सकते हैं।
एक लाख तक बकाया है तो आवेदन भी नहीं करना होगा
रेवाड़ी के डीसी अभिषेक मीणा के अनुसार वन टाइम सेटलमेंट स्कीम 1 जून से लागू है और 28 सितंबर तक चलेगी। इसके दायरे में सात पुराने कर अधिनियमों के तहत लंबित बकाया मामले रखे गए हैं।
अगर किसी करदाता पर संबंधित अधिनियम में किसी एक वर्ष के लिए एक लाख रुपये तक टैक्स बकाया है तो उस वर्ष का टैक्स, ब्याज और जुर्माना पूरा माफ हो जाएगा। इसके लिए व्यापारी को ओटीएस के तहत आवेदन करने की जरूरत नहीं है।
पुराने हरियाणा सामान्य बिक्री कर अधिनियम, 1973 के मामलों में एक लाख रुपये से अधिक टैक्स बकाया होने पर 70 प्रतिशत तक कर छूट दी जा रही है।
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बड़े टैक्स बकाया पर भी मिलेगी छूट
अन्य संबंधित कर अधिनियमों में एक लाख रुपये से अधिक बकाया पर टैक्स छूट अलग-अलग स्लैब में मिलेगी।
एक लाख से 10 लाख रुपये तक के टैक्स बकाया पर 60 प्रतिशत, 10 लाख से एक करोड़ रुपये तक 50 प्रतिशत और एक करोड़ से 10 करोड़ रुपये तक 40 प्रतिशत छूट का प्रावधान है।
10 करोड़ से 30 करोड़ रुपये तक 35 प्रतिशत और 30 करोड़ से 60 करोड़ रुपये तक बकाया पर 30 प्रतिशत टैक्स छूट मिलेगी। 60 करोड़ रुपये से अधिक टैक्स बकाया पर कर में छूट नहीं मिलेगी। हालांकि पात्र मामलों में ब्याज और जुर्माने पर 100 प्रतिशत छूट का प्रावधान रखा गया है।
पुराने फॉर्म जमा करने पर भी घट सकता है बकाया
कई व्यापारियों के पुराने मामले फॉर्म-सी, फॉर्म-एफ, फॉर्म-एच, फॉर्म-ई1, ई2 और वैट से जुड़े दस्तावेज जमा नहीं होने के कारण लंबित हैं।
अगर व्यापारी अब ऐसे वैध फॉर्म उपलब्ध करा सकता है तो सत्यापन के बाद टैक्स की मांग कम हो सकती है। इसका लाभ हरियाणा मूल्य वर्धित कर अधिनियम, 2003 और केंद्रीय बिक्री कर अधिनियम, 1956 से जुड़े पात्र मामलों में मिलेगा।
फर्जी फर्म के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू होने या पहले ही प्राधिकरण द्वारा संबंधित फॉर्म खारिज किए जाने की स्थिति में यह राहत नहीं मिलेगी।
निपटान की राशि किस्तों में भी दे सकेंगे
पांच लाख रुपये तक की निपटान राशि एक बार में जमा करनी होगी। पांच लाख से अधिक और 25 लाख रुपये तक की राशि दो समान किस्तों में दी जा सकेगी।
25 लाख रुपये से अधिक की निपटान राशि तीन किस्तों में जमा करने की सुविधा है। आवेदन के समय 40 प्रतिशत राशि देनी होगी। इसके बाद 30 प्रतिशत की दूसरी और बची 30 प्रतिशत राशि तीसरी किस्त में जमा की जा सकेगी।
जिन व्यापारियों ने पुराने टैक्स आदेश के खिलाफ अपील या मुकदमा कर रखा है, वे भी योजना में शामिल हो सकते हैं। इसके लिए संबंधित अपील या मुकदमा वापस लेना होगा।
हरियाणा आबकारी एवं कराधान विभाग के पोर्टल पर ओटीएस योजना की अधिसूचना भी उपलब्ध है। आवेदन करने वाले पात्र करदाता को विभाग के पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन कर ओटीएस-1 फॉर्म ऑनलाइन जमा करना होगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2025 में भी ऐसी निपटान योजना का 1,15,223 व्यापारियों ने लाभ उठाया था। उसी के बाद सरकार ने पुराने बकाया और लंबित टैक्स विवादों के निपटारे के लिए 2026 में दोबारा योजना लागू की है।








