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हरियाणा में फिर लंपी वायरस का खतरा, पशुओं में ये लक्षण दिखें तो तुरंत हो जाएं सतर्क; जानें बचाव और इलाज

हरियाणा में पशुओं में लंपी जैसे लक्षण मिलने के बाद जांच तेज हुई है। जानें लंपी वायरस के लक्षण, यह कैसे फैलता है, इलाज, बचाव और पशुपालकों के लिए जरूरी सावधानी।

हरियाणा में पशुओं में फिर दिखे लंपी जैसे लक्षण, शरीर पर गांठ दिखे तो तुरंत करें ये काम
हरियाणा में पशुओं में फिर दिखे लंपी जैसे लक्षण, शरीर पर गांठ दिखे तो तुरंत करें ये काम

चंडीगढ़, 9 सितंबर। हरियाणा में गोवंश में लंपी जैसे लक्षण मिलने के बाद पशुपालन विभाग और लाला लाजपत राय पशु चिकित्सा एवं पशु विज्ञान विश्वविद्यालय हिसार ने निगरानी बढ़ा दी है। नारनौल, कुरुक्षेत्र, करनाल और यमुनानगर से अब तक करीब 230 सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 12 नमूने बीमारी की पुष्टि के लिए भोपाल स्थित राष्ट्रीय उच्च सुरक्षा पशु रोग संस्थान भेजे गए हैं।

हिसार, भिवानी और कुछ अन्य जिलों से भी ऐसे लक्षणों की शिकायतें मिली हैं। लुवास के अनुसार अभी तक राज्य में लंपी से किसी पशु की मौत की सूचना नहीं है। इससे पहले 31 अगस्त को हरियाणा सरकार ने विधानसभा में बताया था कि इस साल 1,356 संदिग्ध मामले सामने आए, लेकिन उस समय तक कोई पुष्ट मामला नहीं मिला था।

केंद्र सरकार ने भी 8 सितंबर को राज्यों के साथ लंपी की स्थिति की समीक्षा करते हुए टीकाकरण, बीमार पशुओं को अलग रखने और मक्खी-मच्छर व चिचड़ी पर नियंत्रण बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। केंद्र के अनुसार जुलाई के बाद हरियाणा सहित कुछ राज्यों में छिटपुट मामले सामने आए हैं।

शरीर पर गांठ के साथ इन लक्षणों पर रखें नजर

लंपी एक वायरल बीमारी है, जो मुख्य रूप से गाय और भैंस को प्रभावित करती है। इसकी सबसे पहचानने योग्य निशानी पशु के शरीर पर गोल और सख्त गांठें बनना है। ये गांठें आमतौर पर त्वचा पर साफ दिखाई देती हैं और गंभीर स्थिति में शरीर के दूसरे हिस्सों तक भी असर पहुंच सकता है।

बीमारी की शुरुआत में पशु को दो से तीन दिन तक बुखार रह सकता है। इसके बाद त्वचा पर करीब 2 से 5 सेंटीमीटर तक की गांठें बन सकती हैं। इसके साथ आंख और नाक से पानी आना, भूख कम होना, शरीर में सूजन, कमजोरी, लसीका ग्रंथियों में सूजन और दूध का उत्पादन घटना भी इसके प्रमुख लक्षणों में शामिल हैं।

हल्के मामलों में लक्षण दूसरी त्वचा संबंधी बीमारियों जैसे भी दिखाई दे सकते हैं। इसलिए केवल शरीर पर गांठ देखकर खुद से लंपी मानने के बजाय पशु चिकित्सक से जांच करवाना जरूरी है। केंद्रीय पशुपालन विभाग की गाइडलाइन में भी पुष्टि के लिए प्रयोगशाला जांच को अहम बताया गया है।

मच्छर, मक्खी और चिचड़ी से तेजी से फैल सकता है संक्रमण

लंपी वायरस के फैलने में सबसे बड़ी भूमिका खून चूसने वाले कीड़ों की मानी जाती है। मच्छर, काटने वाली मक्खियां और चिचड़ी संक्रमित पशु से वायरस दूसरे पशु तक पहुंचा सकते हैं। गर्म और नमी वाले मौसम में इनकी संख्या बढ़ने से संक्रमण फैलने का खतरा भी बढ़ सकता है।

संक्रमित पशुओं को एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाने से बीमारी लंबी दूरी तक पहुंच सकती है। सीधे संपर्क से फैलाव की भूमिका अपेक्षाकृत कम मानी गई है, लेकिन बीमारी का संदेह होने पर पशु को बाकी झुंड से अलग रखना जरूरी है।

नया पशु खरीदकर लाने पर उसे सीधे दूसरे पशुओं के बीच नहीं छोड़ना चाहिए। केंद्रीय पशु चिकित्सा गाइडलाइन में नए पशु को कम से कम 14 दिन अलग रखकर उसकी निगरानी करने की सलाह दी गई है।

लंपी की कोई खास दवा नहीं, लक्षण के हिसाब से होता है इलाज

लंपी वायरस को खत्म करने वाली कोई खास दवा उपलब्ध नहीं है। इलाज पशु की हालत और दिखाई दे रहे लक्षणों के आधार पर किया जाता है। पशु चिकित्सक बुखार और सूजन कम करने, घाव साफ रखने तथा दूसरे बैक्टीरियल संक्रमण को रोकने के लिए जरूरी इलाज देते हैं।

इसलिए पशु के शरीर पर गांठ या बुखार दिखने पर घरेलू नुस्खों पर निर्भर रहकर इलाज में देरी करना ठीक नहीं है। घाव खराब होने या दूसरे संक्रमण की स्थिति में पशु की परेशानी बढ़ सकती है।

केंद्रीय पशुपालन विभाग की सामान्य गाइडलाइन के अनुसार कई पशु करीब दो से तीन सप्ताह में ठीक हो जाते हैं। हालांकि बीमारी की गंभीरता, उम्र और पशु की पहले से मौजूद बीमारी के कारण समय अलग-अलग हो सकता है। वहीं 8 सितंबर के केंद्रीय अपडेट में मौजूदा छिटपुट मामलों में बीमारी की गंभीरता कम रहने और कई पशुओं के जल्दी ठीक होने की बात भी कही गई है।

हरियाणा में 14.61 लाख से ज्यादा गोवंश का टीकाकरण

हरियाणा सरकार ने इस साल 25 जुलाई से 30 अगस्त तक लंपी से बचाव के लिए विशेष टीकाकरण अभियान चलाया। विधानसभा में दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में 14,61,922 गोवंश को टीका लगाया जा चुका है। इनमें गौशालाओं के 1,14,655 पशु भी शामिल हैं।

अभियान में चार महीने से अधिक उम्र के स्वस्थ गोवंश को गोट पॉक्स वैक्सीन लगाई गई। केंद्र सरकार भी लंपी को नियंत्रित करने के लिए टीकाकरण को सबसे प्रभावी उपायों में शामिल करती है।

8 सितंबर को केंद्र ने राज्यों को विशेष रूप से युवा पशुओं के समय पर टीकाकरण, प्रभावित इलाके के आसपास टीकाकरण, पशुओं की आवाजाही पर नियंत्रण, बीमार पशुओं को अलग रखने और पशु बाड़े की सफाई पर जोर देने को कहा है।

पशु में लक्षण दिखें तो तुरंत करें ये काम

पशुपालक सबसे पहले बीमार या संदिग्ध पशु को स्वस्थ पशुओं से अलग रखें। बाड़े में मक्खी, मच्छर और चिचड़ी को बढ़ने से रोकें और साफ-सफाई रखें। बीमार पशु को पशु मेले या दूसरे स्थान पर न ले जाएं और उसकी बिक्री या आवाजाही से भी बचें।

हरियाणा में पशु चिकित्सा सहायता के लिए 1962 टोल फ्री नंबर की सुविधा भी उपलब्ध है। राज्य सरकार के अनुसार मोबाइल पशु चिकित्सा वैन के जरिए पशुपालकों को घर पर उपचार सुविधा उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।

पशुपालक नजदीकी राजकीय पशु अस्पताल या पशु चिकित्सक को भी तुरंत सूचना दें, क्योंकि लंपी जैसे लक्षण कई दूसरी बीमारियों में भी हो सकते हैं और सही पहचान जांच के बाद ही होती है।

इंसानों में नहीं फैलता लंपी वायरस

विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन के अनुसार लंपी इंसानों में फैलने वाली बीमारी नहीं है। यानी संक्रमित पशु के संपर्क में आने से इंसान को लंपी वायरस होने का खतरा नहीं माना जाता। हालांकि बीमारी से पशु का दूध उत्पादन, वजन और प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है, जिससे पशुपालक को आर्थिक नुकसान हो सकता है।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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