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दिल्ली से अंबाला 2 नई रेलवे लाइन व पुल प्रोजेक्ट को मिलेगी रफ्तार, जमीन अधिग्रहण की नीति में बड़ा बदलाव

दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के 5,983 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट में जमीन अधिग्रहण आगे बढ़ा। जानें रूट, प्रमुख स्टेशन, मौजूदा स्थिति और यात्रियों को होने वाला फायदा।

दिल्ली से अंबाला रेल सफर के लिए बड़ा प्रोजेक्ट, 2 नई लाइन से बढ़ेगी ट्रेनों की क्षमता; जमीन अधिग्रहण शुरू
दिल्ली से अंबाला रेल सफर के लिए बड़ा प्रोजेक्ट, 2 नई लाइन से बढ़ेगी ट्रेनों की क्षमता; जमीन अधिग्रहण शुरू

अंबाला, 9 सितंबर। दिल्ली से अंबाला के बीच तीसरी और चौथी रेलवे लाइन बिछाने की 5,983 करोड़ रुपये की परियोजना में जमीन अधिग्रहण और दूसरी मंजूरियों की प्रक्रिया तेज होने की उम्मीद बढ़ गई है। रेलवे बोर्ड ने निर्माण संगठनों में नई व्यवस्था लागू करते हुए जमीन अधिग्रहण के लिए राज्य के राजस्व अधिकारियों और वन मंजूरी के लिए भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की मदद लेने का फैसला किया है। बिजली, पानी और दूरसंचार जैसी सुविधाओं को शिफ्ट करने के लिए भी संबंधित विभागों के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर लगाया जा सकेगा।

दिल्ली-अंबाला तीसरी और चौथी लाइन को फरवरी 2026 में केंद्र की आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति से मंजूरी मिली थी। परियोजना पूरी होने के बाद मौजूदा दो लाइन वाले व्यस्त रेल कॉरिडोर पर चार लाइन उपलब्ध होंगी। हरियाणा सरकार के बजट दस्तावेज के मुताबिक इससे भविष्य में 36 अतिरिक्त यात्री और 40 मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता तैयार होने की उम्मीद है।

जमीन अधिग्रहण के लिए अब राजस्व अधिकारियों की मदद

रेलवे की बड़ी निर्माण परियोजनाओं में जमीन अधिग्रहण, वन मंजूरी और बिजली-पानी की लाइनें शिफ्ट करने में लगने वाला समय कई बार काम की रफ्तार प्रभावित करता है। रेल मंत्रालय ने संसद में भी जमीन अधिग्रहण, वन मंजूरी और रास्ते में आने वाली उपयोगिता सेवाओं की शिफ्टिंग को प्रोजेक्ट पूरा होने के समय को प्रभावित करने वाले कारणों में शामिल किया है।

नई व्यवस्था में क्षेत्रीय रेलवे राज्य के राजस्व विभाग के अधिकारियों को प्रतिनियुक्ति पर ले सकेंगे। हर क्षेत्रीय रेलवे में वरिष्ठ या कनिष्ठ प्रशासनिक स्तर के एक भारतीय वन सेवा अधिकारी की तैनाती का भी प्रावधान किया गया है। इसका काम रेलवे और वन विभाग के बीच लंबित मंजूरियों को आगे बढ़ाना होगा।

निर्माण संगठन में अधिकारियों का सामान्य कार्यकाल पांच साल रहेगा और बेहतर काम करने वालों का कार्यकाल सात साल तक बढ़ाया जा सकेगा। तैनाती से पहले परियोजना प्रबंधन, भूमि अधिग्रहण, पुल, सुरंग और आधुनिक रेलवे तकनीक से जुड़े विषयों की ट्रेनिंग भी दी जाएगी।

दिल्ली से अंबाला तक इन शहरों से गुजरेगा रेल कॉरिडोर

तीसरी और चौथी लाइन किसी नए अलग रेल रास्ते पर नहीं बनाई जा रही हैं। इन्हें मौजूदा दिल्ली-पानीपत-अंबाला रेल कॉरिडोर की क्षमता बढ़ाने के लिए बनाया जाना है।

प्रमुख रूट इस तरह है:

दिल्ली जंक्शन → सब्जी मंडी → आदर्श नगर → होलंबी कलां → नरेला → सोनीपत → गन्नौर → समालखा → पानीपत → घरौंडा → करनाल → तरावड़ी → नीलोखेड़ी → कुरुक्षेत्र → शाहाबाद मारकंडा → मोहड़ी → अंबाला कैंट

मौजूदा रेलवे सेक्शन के रिकॉर्ड में इसके बीच छोटे स्टेशन और हॉल्ट भी हैं। दिल्ली से अंबाला कैंट तक मौजूदा मुख्य कॉरिडोर की दूरी करीब 197 किलोमीटर दर्ज है।

करनाल-कुरुक्षेत्र में जमीन अधिग्रहण आगे बढ़ा

इस परियोजना की मौजूदा स्थिति सिर्फ कैबिनेट मंजूरी तक सीमित नहीं है। रेलवे ने मार्च 2026 में सोनीपत, पानीपत, करनाल, कुरुक्षेत्र और अंबाला जिलों के लिए जमीन अधिग्रहण से जुड़े सक्षम अधिकारी और मध्यस्थ नियुक्त कर दिए थे।

इसके बाद अगस्त में जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया और आगे बढ़ी। करनाल जिले में 8.4229 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण के लिए अधिसूचना जारी हुई। इसमें घरौंडा सहित रेल कॉरिडोर के रास्ते में आने वाली जमीन शामिल है।

इसी तरह कुरुक्षेत्र जिले में 9.8956 हेक्टेयर जमीन के अधिग्रहण की प्रक्रिया के लिए 20 अगस्त को अधिसूचना प्रकाशित हुई। संबंधित जमीन मालिकों को कानून के तहत आपत्ति दर्ज कराने के लिए 30 दिन का समय दिया गया।

इसका मतलब यह है कि परियोजना अभी जमीन अधिग्रहण और निर्माण से पहले की प्रक्रियाओं के चरण में आगे बढ़ रही है। पूरे दिल्ली-अंबाला सेक्शन पर तीसरी और चौथी पटरी बिछाने का काम शुरू हो चुका है, ऐसा कोई आधिकारिक ताजा रिकॉर्ड अभी नहीं मिला है।

पानीपत में रेलवे ओवरब्रिज की प्रक्रिया भी आगे बढ़ी

दिल्ली-अंबाला रेल सेक्शन पर पटरियों की क्षमता बढ़ाने के साथ सड़क यातायात के लिए रेलवे ओवरब्रिज के काम भी चल रहे हैं। पानीपत में जीटी रोड से दाहर और एनएच-709 की ओर मौजूदा रेलवे ओवरब्रिज के समानांतर नया पुल बनाने के लिए हरियाणा राज्य सड़क एवं पुल विकास निगम ने टेंडर जारी किया है।

8 सितंबर तक सरकारी ई-टेंडर रिकॉर्ड में इसकी तकनीकी बोली खोलने की प्रक्रिया चल रही थी। इस काम की टेंडर लागत करीब 19.42 करोड़ रुपये दर्ज है। हालांकि यह दिल्ली-अंबाला तीसरी-चौथी लाइन के 5,983 करोड़ रुपये वाले मुख्य प्रोजेक्ट से अलग सड़क-पुल परियोजना है।

नई लाइन बनने से यात्रियों को क्या फायदा होगा

दिल्ली-अंबाला रूट उत्तर भारत के सबसे महत्वपूर्ण रेल कॉरिडोर में शामिल है। इसी रास्ते से सोनीपत, पानीपत, करनाल और कुरुक्षेत्र होते हुए ट्रेनें अंबाला पहुंचती हैं और वहां से आगे चंडीगढ़, पंजाब तथा जम्मू की दिशा में जाती हैं।

अभी इसी कॉरिडोर पर यात्री और मालगाड़ियां दोनों चलती हैं। तीसरी और चौथी लाइन मिलने से रेलवे के पास ट्रेनों को चलाने के लिए अतिरिक्त ट्रैक क्षमता उपलब्ध होगी। कैबिनेट ने परियोजना मंजूर करते समय भी लाइन क्षमता बढ़ने, ट्रेनों के संचालन में सुधार और रेल नेटवर्क पर दबाव कम होने को इसके प्रमुख फायदे बताया था।

हरियाणा के बजट दस्तावेज में इस प्रोजेक्ट से 36 नई यात्री ट्रेन और 40 अतिरिक्त मालगाड़ियों के संचालन की क्षमता बनने की बात कही गई है। इसका अर्थ यह नहीं है कि ये सभी ट्रेनें अभी घोषित हो चुकी हैं। वास्तविक नई ट्रेन, उनका रूट और समय-सारणी परियोजना तैयार होने के बाद रेलवे अलग से तय करेगा।

2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य

केंद्र सरकार ने दिल्ली-अंबाला सहित फरवरी में मंजूर तीन मल्टीट्रैकिंग परियोजनाओं को 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा है। दिल्ली-अंबाला परियोजना की स्वीकृत लागत 5,983 करोड़ रुपये है।

रेलवे के अलग-अलग दस्तावेजों में इस प्रोजेक्ट की लंबाई को लेकर हल्का अंतर है। कैबिनेट मंजूरी और संसद के अगस्त 2026 के जवाब में इसे 194 किलोमीटर बताया गया है, जबकि जमीन अधिग्रहण की रेलवे अधिसूचनाओं में परियोजना का आधिकारिक नाम दिल्ली-पानीपत-अंबाला 198 किलोमीटर तीसरी एवं चौथी लाइन दर्ज किया गया है।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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