हरियाणा में बिछेंगी 2 नई रेल लाइनें, करनाल-यमुनानगर और जींद-हांसी के बीच बनेंगे 11 स्टेशन
हरियाणा में करनाल-यमुनानगर और जींद-हांसी के बीच 111 किलोमीटर लंबी दो नई रेल लाइनें प्रस्तावित हैं। जानें 11 नए स्टेशन कहां बनेंगे, लागत कितनी होगी और काम कब शुरू हो सकता है।
हरियाणा में रेल कनेक्टिविटी बढ़ाने के लिए करनाल-यमुनानगर और जींद-हांसी के बीच दो नई रेल लाइनें बिछाने की तैयारी आगे बढ़ गई है। हरियाणा रेल अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड (HRIDC) ने दोनों परियोजनाओं का विस्तृत सर्वेक्षण करने के बाद डिटेल्ड प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार कर ली है। राज्य सरकार की मंजूरी के बाद रिपोर्ट रेल मंत्रालय को भेजी गई है।
दोनों प्रस्तावित रेल लाइनों की कुल लंबाई करीब 111 किलोमीटर और अनुमानित लागत लगभग 2,096 करोड़ रुपये है। परियोजनाओं के अंतर्गत रास्ते में कुल 11 नए रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है। इससे करनाल, यमुनानगर, जींद और हांसी के साथ इंद्री, लाडवा, रादौर तथा नारनौंद जैसे कई क्षेत्रों को सीधी रेल कनेक्टिविटी मिल सकती है।
हालांकि, DPR रेल मंत्रालय को भेजे जाने के बाद भी निर्माण शुरू होने के लिए केंद्रीय स्तर पर अंतिम मंजूरी और दूसरी जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं। दोनों रेल लाइनों के निर्माण की शुरुआत या पूरा होने की कोई नई समयसीमा अभी घोषित नहीं की गई है।
करनाल-यमुनानगर रेल लाइन पर बनेंगे 5 नए स्टेशन
प्रस्तावित करनाल-यमुनानगर नई रेल लाइन की लंबाई लगभग 61 किलोमीटर बताई गई है। परियोजना पर करीब 1,173 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। यह रेल लाइन दिल्ली-अंबाला रेलवे मार्ग पर स्थित भैनी खुर्द स्टेशन को अंबाला-सहारनपुर रेल मार्ग के जगाधरी वर्कशॉप स्टेशन से जोड़ेगी।
इस मार्ग पर पांच नए रेलवे स्टेशन बनाने का प्रस्ताव है:
- राम्भा
- इंद्री
- लाडवा
- रादौर
- दमला
इन क्षेत्रों में अभी सीधी रेल कनेक्टिविटी सीमित है। नई लाइन बनने के बाद स्थानीय निवासियों को करनाल, यमुनानगर और आसपास के शहरों तक पहुंचने के लिए रेल का नया विकल्प मिल सकेगा। इससे सड़क मार्ग पर निर्भरता भी कम हो सकती है।
ये अभी DPR में प्रस्तावित स्टेशन हैं। रेल मंत्रालय से परियोजना की अंतिम स्वीकृति मिलने और तकनीकी समीक्षा पूरी होने के दौरान स्टेशनों के स्थान या संख्या में बदलाव संभव है।
करनाल और यमुनानगर के बीच सफर होगा आसान
करनाल और यमुनानगर सड़क मार्ग से जुड़े हुए हैं, लेकिन दोनों शहरों के बीच सीधा रेल संपर्क नहीं है। रेल से यात्रा करने वाले लोगों को मौजूदा मार्गों और दूसरे स्टेशनों पर निर्भर रहना पड़ता है। प्रस्तावित लाइन इस कमी को दूर कर सकती है।
नई रेल लाइन से इंद्री, लाडवा और रादौर जैसे क्षेत्रों के विद्यार्थियों, कर्मचारियों, व्यापारियों और दैनिक यात्रियों को फायदा मिलने की उम्मीद है। कृषि और औद्योगिक सामान की ढुलाई के लिए भी एक अतिरिक्त परिवहन मार्ग उपलब्ध हो सकता है।
परियोजना का एक महत्वपूर्ण लाभ हरिद्वार की दिशा में बेहतर रेल संपर्क के रूप में भी देखा जा रहा है। लाइन बनने के बाद करनाल और आसपास के क्षेत्र यमुनानगर-जगाधरी के रास्ते उत्तराखंड की ओर जाने वाले रेलवे नेटवर्क से अधिक सीधे जुड़ सकते हैं। वास्तविक ट्रेन मार्ग और समय-सारणी रेल लाइन तैयार होने के बाद रेलवे द्वारा तय की जाएगी।
जींद-हांसी रेल लाइन पर प्रस्तावित हैं 6 स्टेशन
दूसरी परियोजना जींद और हांसी के बीच लगभग 50 किलोमीटर लंबी नई रेल लाइन बिछाने की है। इस पर करीब 923 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान लगाया गया है।
यह लाइन दिल्ली-बठिंडा रेल मार्ग पर स्थित जींद स्टेशन को हांसी स्टेशन से जोड़ेगी। प्रस्तावित रेल मार्ग पर छह नए स्टेशन बनाने की योजना है:
- ईंटल कलां
- राजपुरा
- नारनौंद
- माढ़ा
- खेड़ी गगन
- शेखपुरा
नई लाइन से जींद, नारनौंद और हांसी क्षेत्र के कई गांव सीधे रेलवे नेटवर्क से जुड़ सकते हैं। इसका सबसे अधिक लाभ उन लोगों को मिल सकता है जिन्हें अभी जींद से हांसी या हिसार की तरफ जाने के लिए सड़क परिवहन अथवा लंबे रेल मार्ग का इस्तेमाल करना पड़ता है।
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जींद से हिसार की दूरी हो सकती है कम
जींद-हांसी रेल लाइन बनने के बाद जींद और हिसार के बीच रेल यात्रा का मार्ग छोटा होने की उम्मीद है। प्रस्तावित लाइन हांसी में मौजूदा रेलवे नेटवर्क से जुड़कर यात्रियों को हिसार की दिशा में नया रास्ता दे सकती है।
इससे यात्रियों के समय की बचत होने के साथ कृषि उत्पाद, खाद और दूसरी व्यावसायिक सामग्री की ढुलाई आसान हो सकती है। नारनौंद और आसपास के ग्रामीण क्षेत्र में वेयरहाउस, व्यापार और परिवहन से जुड़ी गतिविधियां बढ़ने की भी संभावना है।
ये संभावित लाभ परियोजना के पूरा होने और इस मार्ग पर यात्री एवं मालगाड़ियों का संचालन शुरू होने पर निर्भर करेंगे। अभी रेलवे ने इस लाइन पर चलने वाली ट्रेनों, उनके स्टॉपेज या यात्रा समय की घोषणा नहीं की है।
दोनों रेल परियोजनाओं पर कौन खर्च करेगा पैसा?
HRIDC हरियाणा सरकार और रेल मंत्रालय का संयुक्त उपक्रम है। उपलब्ध परियोजना विवरण के अनुसार दोनों रेल लाइनों को राज्य सरकार और रेल मंत्रालय की भागीदारी से विकसित किया जाना है। लागत साझा करने का अंतिम अनुपात और जमीन से संबंधित वित्तीय जिम्मेदारी केंद्रीय मंजूरी एवं अंतिम समझौते से स्पष्ट होगी।
DPR में रेल लाइन का संभावित मार्ग, स्टेशन, पुल, जमीन की जरूरत, निर्माण लागत और परियोजना से मिलने वाले लाभ जैसी जानकारियां शामिल होती हैं। रेल मंत्रालय DPR की तकनीकी और वित्तीय समीक्षा करने के बाद परियोजना पर अगला निर्णय लेगा।
नई रेल लाइनों का निर्माण कब शुरू होगा?
करनाल-यमुनानगर और जींद-हांसी रेल लाइनों के निर्माण की निश्चित तारीख अभी घोषित नहीं हुई है। DPR तैयार होकर रेल मंत्रालय तक पहुंचना महत्वपूर्ण चरण है, लेकिन इसके बाद भी परियोजनाओं को केंद्रीय स्वीकृति, वित्तीय मंजूरी, भूमि उपलब्धता और निर्माण से संबंधित टेंडर जैसी प्रक्रियाओं से गुजरना होगा।
रेल मंत्रालय से अंतिम स्वीकृति मिलने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि जमीन अधिग्रहण और निर्माण कार्य कब शुरू किया जाएगा। इसलिए फिलहाल किसी निश्चित वर्ष में ट्रेन चलने या परियोजना पूरी होने का दावा करना सही नहीं होगा।
दोनों परियोजनाएं धरातल पर उतरती हैं तो हरियाणा के उन इलाकों को सबसे अधिक फायदा मिलेगा जो अभी सीधे रेलवे नेटवर्क से नहीं जुड़े हैं। 11 प्रस्तावित स्टेशनों के कारण स्थानीय यात्रियों के साथ कृषि, उद्योग और व्यापार के लिए भी परिवहन के नए रास्ते खुल सकते हैं।








