हरियाणा को 3 बांध परियोजनाओं से मिलेगा 1280 क्यूसेक पानी, किशाऊ पर 6 राज्यों का समझौता।
किशाऊ पर 6 राज्यों के समझौते के बाद जानें हरियाणा को 1280 क्यूसेक पानी किन 3 परियोजनाओं से मिलेगा, किशाऊ बांध की क्षमता और 1994 से अब तक की स्थिति।

- रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ से हरियाणा को करीब 1,280 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलने का अनुमान
- तीनों परियोजनाओं में हरियाणा का कुल हिस्सा करीब 1,143 MCM, अकेले किशाऊ में tentative share 633 MCM
- किशाऊ पर 15 सितंबर 2026 को छह राज्यों ने समझौता किया, water component का करीब 90 प्रतिशत खर्च केंद्र उठाएगा
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़, 16 सितंबर। हरियाणा को यमुना बेसिन की रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ तीन बड़ी बांध परियोजनाओं से भविष्य में करीब 1280 क्यूसेक अतिरिक्त पानी मिलने का रास्ता साफ हुआ है। 15 सितंबर को किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को लेकर हरियाणा सहित छह राज्यों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इनमें उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली शामिल हैं।
केंद्र सरकार की ओर से जारी आधिकारिक जानकारी के अनुसार समझौता केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में हुआ। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के अनुसार तीनों परियोजनाओं से हरियाणा का कुल पानी हिस्सा करीब 1,143 MCM होगा। इनसे कुल 2,676 क्यूसेक अतिरिक्त पानी की उपलब्धता बढ़ने का अनुमान है, जिसमें हरियाणा का हिस्सा करीब 1,280 क्यूसेक रहेगा।
सरकार इस अतिरिक्त पानी का उपयोग प्रदेश में सिंचाई और पेयजल की जरूरतों को पूरा करने में करना चाहती है। हालांकि 1280 क्यूसेक पानी अभी तुरंत मिलने वाला नहीं है। यह अनुमान तीनों परियोजनाओं के पूरा होने और पानी के भंडारण व बंटवारे की व्यवस्था लागू होने के बाद की उपलब्धता पर आधारित है।
हरियाणा को 1280 क्यूसेक पानी कहां से मिलेगा?
1280 क्यूसेक का आंकड़ा केवल किशाऊ बांध से मिलने वाले पानी का नहीं है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार यह रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ परियोजनाओं से हरियाणा को मिलने वाले संयुक्त लाभ का अनुमान है।
रेणुकाजी और लखवार परियोजनाओं पर काम पहले से चल रहा है, जबकि किशाऊ परियोजना को आगे बढ़ाने में राज्यों के बीच सहमति बड़ी बाधा बनी हुई थी। अब छह राज्यों के बीच समझौता होने के बाद इस परियोजना के आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है। तीनों परियोजनाओं से हरियाणा को करीब 1,143 MCM पानी मिलने का अनुमान लगाया गया है।
हरियाणा के लिए इन परियोजनाओं का महत्व इसलिए भी अधिक है क्योंकि राज्य सिंचाई और बढ़ती पेयजल जरूरतों के लिए यमुना के पानी पर निर्भर है। ऊपरी यमुना क्षेत्र में पानी स्टोर करने की क्षमता बढ़ने से मानसून के दौरान उपलब्ध पानी को रोककर बाद में जरूरत के अनुसार छोड़ा जा सकेगा।
किशाऊ बांध में 1562 MCM पानी स्टोर करने की क्षमता
किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की सीमा से गुजरने वाली टोंस नदी पर प्रस्तावित है। PIB की 15 सितंबर की आधिकारिक जानकारी के अनुसार यहां करीब 232.6 मीटर ऊंचा concrete gravity dam बनाया जाना है और परियोजना में लगभग 1,562 MCM पानी संग्रहित करने की क्षमता प्रस्तावित है।
परियोजना से करीब 97 हजार हेक्टेयर जमीन में सिंचाई और सालाना 1,476 मिलियन यूनिट स्वच्छ जलविद्युत उत्पादन का अनुमान दिया गया है। किशाऊ को National Project घोषित किया जा चुका है और इसके water component के खर्च का करीब 90 प्रतिशत केंद्र सरकार उठाएगी। बाकी 10 प्रतिशत वित्तीय भार भागीदार राज्यों के बीच बांटा जाएगा।
हरियाणा के लिए किशाऊ परियोजना का पानी हिस्सा कितना होगा, इसे लेकर जनवरी 2026 के केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय की Expert Appraisal Committee के रिकॉर्ड में 633 MCM का tentative allocation दिया गया है। इसी रिकॉर्ड में revised project configuration के तहत चार 105.5 MW units यानी कुल 422 MW क्षमता बताई गई है।
इसलिए पुराने रिकॉर्ड में दिखाई देने वाली 660 MW क्षमता को मौजूदा revised configuration नहीं माना जाना चाहिए। Kishau Corporation के current project page पर भी परियोजना को 4×105.5 MW के रूप में दिखाया गया है।
1994 से चला आ रहा था पानी और लागत का मामला
किशाऊ परियोजना को लेकर राज्यों के बीच विवाद नया नहीं है। ऊपरी यमुना बेसिन के राज्यों के बीच 12 मई 1994 को पानी के बंटवारे और storage projects को लेकर समझौता हुआ था। इसके बाद रेणुकाजी, लखवार और किशाऊ जैसी परियोजनाओं के लिए अलग-अलग व्यवस्था आगे बढ़नी थी।
लेकिन किशाऊ में पानी, बिजली और परियोजना की लागत के बंटवारे से जुड़े मुद्दों पर लंबे समय तक सहमति नहीं बन सकी।
इस साल 16 जून 2026 को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में हुई बैठक में हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और राजस्थान परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए समझौते पर सहमत हुए थे। केंद्र सरकार की उस बैठक की जानकारी के अनुसार तब यह भी तय हुआ था कि water component की 90 प्रतिशत लागत केंद्र सरकार वहन करेगी।
अब 15 सितंबर को छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों के हस्ताक्षर के बाद उस सहमति को आगे बढ़ाया गया है। परियोजना अभी पूरी नहीं हुई है, इसलिए हरियाणा के लिए बताए गए 1280 क्यूसेक को मौजूदा पानी की उपलब्धता नहीं बल्कि तीनों storage projects के पूरा होने के बाद मिलने वाला अनुमानित अतिरिक्त हिस्सा समझना चाहिए।








