हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल पर बड़ा अपडेट, सरकार ने ज्यादातर मांगें मानीं; फिर भी नहीं बनी बात
हरियाणा में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल जारी है। सरकार ने 14 में से 13 मांगों पर सहमति जताई, लेकिन कर्मचारियों को पक्का करने के मुद्दे पर बात अटक गई।
हरियाणा में कई दिनों से चल रही सफाई और नगर निकाय कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने की उम्मीद शनिवार को भी पूरी नहीं हो सकी। कुरुक्षेत्र में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई लंबी बातचीत में 14 में से 13 मांगों पर सहमति बन गई, लेकिन कर्मचारियों को पक्का करने की मुख्य मांग पर फैसला नहीं हो पाया। इसके बाद कर्मचारी संघ ने हड़ताल जारी रखने का ऐलान किया है।
सरकार की ओर से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री कृष्ण कुमार बेदी ने यूनियन प्रतिनिधियों से बातचीत की। सरकार का कहना है कि नियमितीकरण के मामले में कानूनी राय ली जा रही है। वहीं कर्मचारी नेताओं का कहना है कि उनके लिए यही सबसे अहम मांग है और ठोस फैसला होने तक वे काम पर वापस नहीं लौटेंगे।
आखिर एक मांग पर क्यों अटकी पूरी बात?
कर्मचारियों को नियमित यानी पक्का करने के मुद्दे पर सरकार और यूनियन के बीच सहमति नहीं बन सकी।
मंत्री कृष्ण बेदी के मुताबिक इस मांग पर फैसला करते समय सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के आदेशों तथा कानूनी प्रावधानों को ध्यान में रखना जरूरी है। सरकार इस पर कानूनी राय ले रही है और उसके बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि जल्द ही यूनियन पदाधिकारियों की मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ बैठक कराई जाएगी।
दूसरी ओर नगरपालिका कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रदेश अध्यक्ष नरेश शास्त्री ने साफ किया है कि कर्मचारियों को पक्का करना उनकी प्रमुख मांग है। संघ ठेका व्यवस्था समाप्त करने की मांग भी उठा रहा है और उसका कहना है कि केवल आश्वासन मिलने से हड़ताल समाप्त नहीं होगी।
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6 अगस्त से क्यों हड़ताल पर हैं कर्मचारी?
मौजूदा आंदोलन की जड़ मई में सरकार और कर्मचारी संगठनों के बीच हुई बातचीत में है। कर्मचारी संघ का आरोप है कि 13 मई को जिन मांगों पर सहमति बनी थी, उन्हें तय समय में लागू करने के आदेश जारी नहीं किए गए। इसी के विरोध में 6 अगस्त से प्रदेशभर में आंदोलन शुरू हुआ।
कर्मचारी संगठनों की प्रमुख मांगों में कच्चे कर्मचारियों को नियमित करना, ठेका प्रथा खत्म करना, खाली पदों पर भर्ती, श्रम कानूनों के तहत मिलने वाले लाभ और पहले से स्वीकार मांगों के आदेश जारी करना शामिल हैं। कई जगह कर्मचारियों ने न्यूनतम वेतन और जोखिम भत्ते की मांग भी उठाई है।
हड़ताल लंबी खिंचने के कारण प्रदेश के कई शहरों में इसका असर सफाई व्यवस्था पर भी पड़ा है। गुरुग्राम सहित कई शहरों में कचरा उठाने का काम प्रभावित होने और सार्वजनिक स्थानों पर कचरा जमा होने की रिपोर्ट सामने आई हैं।
अब आगे क्या होगा?
शनिवार की बैठक के बाद मामला अब मुख्यमंत्री स्तर की बातचीत तक पहुंच सकता है। कृष्ण बेदी ने कहा है कि यूनियन पदाधिकारियों की जल्द मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी से बातचीत कराई जाएगी।
इसलिए फिलहाल सबसे अहम नजर दो बातों पर रहेगी—नियमितीकरण को लेकर सरकार की कानूनी राय क्या आती है और मुख्यमंत्री के साथ प्रस्तावित बैठक में कोई ठोस फैसला होता है या नहीं।
जब तक इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनती, कर्मचारी संघ ने हड़ताल जारी रखने की बात कही है। यानी 14 में से 13 मांगों पर सहमति के बावजूद प्रदेश में सफाई कर्मचारियों का आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है।








