हरियाणा में क्या पुराना लंबित इंतकाल भी 11वें दिन हो जाएंगे दर्ज, जाने क्या कहते है नए नियम
हरियाणा में रजिस्ट्री होते ही ऑटो इंतकाल शुरू होगा और पात्र मामला 11वें दिन जमाबंदी में दर्ज हो जाएगा। जानें किन मामलों में प्रक्रिया रुकेगी, स्टेटस कैसे देखें और शिकायत कहां करें।
हरियाणा में जमीन या संपत्ति की रजिस्ट्री कराने के बाद इंतकाल दर्ज करवाने के लिए अलग से आवेदन देने और बार-बार पटवारी या तहसील कार्यालय जाने की जरूरत कम होने वाली है। प्रदेश में लागू ऑटो म्यूटेशन सिस्टम के तहत रजिस्ट्री स्वीकृत होते ही संबंधित इंतकाल अपने आप तैयार होकर राजस्व अधिकारियों के ऑनलाइन लॉगिन में पहुंच जाएगा।
नई समयबद्ध व्यवस्था में अधिकारियों के स्तर पर निर्धारित अवधि के दौरान कार्रवाई नहीं होने और कोई वैध आपत्ति सामने नहीं आने पर पात्र इंतकाल 11वें दिन अपने आप जमाबंदी में शामिल हो जाएगा। इससे खरीदार का नाम राजस्व रिकॉर्ड में समय पर अपडेट हो सकेगा।
हालांकि, हर प्रकार का इंतकाल बिना जांच के 11वें दिन अपने आप मंजूर नहीं होगा। जमीन के मालिकाना हक पर विवाद, रिकॉर्ड में अंतर, हिस्सेदारी या खेवट विभाजन और किसी पक्ष की आपत्ति वाले मामलों में जांच या अलग कानूनी प्रक्रिया की जरूरत पड़ सकती है।
रजिस्ट्री होते ही मिलेगा इंतकाल नंबर
ऑटो म्यूटेशन प्रणाली में जमीन की रजिस्ट्री पूरी होते ही सिस्टम संबंधित इंतकाल तैयार कर देगा। खरीदार को रजिस्ट्री के बाद इंतकाल शुरू करवाने के लिए अलग से आवेदन देने की आवश्यकता नहीं होगी। रजिस्ट्री के समय ही एक इंतकाल नंबर भी उपलब्ध कराया जाएगा।
इसी नंबर की सहायता से जमीन का नया मालिक अपनी फाइल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा। इससे यह पता लगाया जा सकेगा कि इंतकाल पटवारी, कानूनगो या सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर के स्तर पर लंबित है अथवा जमाबंदी में दर्ज हो चुका है।
सरकार ने जून 2026 में ऑटो म्यूटेशन सिस्टम और Paperless Registration 2.0 शुरू करते समय बताया था कि जिन मामलों में संयुक्त खेवट का विभाजन आवश्यक नहीं है, उनमें इंतकाल 24 घंटे के भीतर स्वीकृत किया जा सकता है। अधिक जांच वाले पात्र मामलों के लिए अधिकतम समयबद्ध प्रक्रिया निर्धारित की गई है।
10 दिनों तक तीन स्तरों पर होगी जांच
रजिस्ट्री के बाद तैयार हुआ इंतकाल सबसे पहले संबंधित पटवारी के लॉगिन में जाएगा। हांसी जिला प्रशासन की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार पटवारी को कार्रवाई के लिए चार दिन का समय मिलेगा। निर्धारित अवधि में कार्रवाई नहीं होने पर पांचवें दिन मामला अपने आप कानूनगो के लॉगिन में पहुंच जाएगा।
कानूनगो को रिकॉर्ड की जांच के लिए दो दिन दिए जाएंगे। इसके बाद सातवें दिन फाइल सर्कल रेवेन्यू ऑफिसर यानी CRO के लॉगिन में पहुंच जाएगी। यहां कार्रवाई के लिए चार दिन का समय होगा।
यदि निर्धारित दस दिनों में किसी अधिकारी ने कार्रवाई नहीं की और मामले में कोई ऐसी आपत्ति या कमी नहीं है जिससे प्रक्रिया रोकना जरूरी हो, तो 11वें दिन पात्र इंतकाल अपने आप जमाबंदी में शामिल हो जाएगा।
अलग-अलग समाचार रिपोर्टों में अधिकारियों को दिए गए दिनों का विभाजन अलग बताया गया है, लेकिन पूरी प्रक्रिया के लिए दस दिन और इसके बाद 11वें दिन ऑटो अपडेट की समयसीमा समान है। नागरिक के लिए महत्वपूर्ण बात यह है कि फाइल किसी एक अधिकारी के लॉगिन में अनिश्चित समय तक लंबित नहीं रह सकेगी।
क्या सभी इंतकाल 11वें दिन अपने आप दर्ज होंगे?
11वें दिन स्वतः जमाबंदी में दर्ज होने वाली व्यवस्था मुख्य रूप से ऐसी पंजीकृत डीड से जुड़े पात्र और निर्विवाद इंतकाल के लिए है जिनमें रिकॉर्ड को लेकर कोई कानूनी बाधा नहीं है।
इन परिस्थितियों में प्रक्रिया रुक सकती है:
- जमीन या हिस्सेदारी के रिकॉर्ड में अंतर हो।
- किसी संबंधित पक्ष ने इंतकाल पर आपत्ति दर्ज कराई हो।
- मालिकाना हक को लेकर विवाद चल रहा हो।
- खेवट या संयुक्त जमीन का विभाजन जरूरी हो।
- रजिस्ट्री में दर्ज जानकारी और जमाबंदी के रिकॉर्ड का मिलान न हो।
- मामला सक्षम राजस्व अधिकारी के निर्णय या न्यायिक प्रक्रिया में भेजना पड़े।
आपत्ति मिलने पर इंतकाल को बिना सुनवाई के स्वतः मंजूर नहीं किया जाना चाहिए। संबंधित अधिकारी आपत्ति और रिकॉर्ड की जांच करने के बाद फैसला करेगा। विवादित मामला होने पर निपटारे में सामान्य ऑटो म्यूटेशन समयसीमा से अधिक समय लग सकता है।
क्या पुराना लंबित इंतकाल भी 11वें दिन पूरा हो जाएगा?
नई ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था को रजिस्ट्री से जोड़कर लागू किया गया है। इसलिए नई रजिस्ट्री के बाद इंतकाल अपने आप शुरू होगा। पहले से लंबित प्रत्येक पुराने मामले के 11वें दिन स्वतः जमाबंदी में शामिल होने का दावा नहीं किया जा सकता।
पुराने लंबित इंतकालों को निपटाने के लिए राजस्व विभाग अलग अभियान चला चुका है। सरकार के अनुसार प्रदेश में लाखों लंबित मामलों में से बड़ी संख्या का निपटारा किया गया है। पुराने मामले में रिकॉर्ड की कमी, विवाद या तकनीकी समस्या होने पर संबंधित राजस्व अधिकारी से कार्रवाई करवानी पड़ सकती है।
इसलिए वर्षों पुराने लंबित इंतकाल को नई रजिस्ट्री से शुरू होने वाले ऑटो म्यूटेशन के समान नहीं समझना चाहिए।
हरियाणा में जमीन का इंतकाल ऑनलाइन कैसे देखें?
Google पर इस विषय से जुड़ा एक प्रमुख सवाल है कि हरियाणा में जमीन का इंतकाल ऑनलाइन कैसे देखा जा सकता है। नागरिक हरियाणा के आधिकारिक जमाबंदी पोर्टल पर स्वीकृत इंतकाल और जमीन का रिकॉर्ड देख सकते हैं।
पोर्टल पर उपलब्ध विकल्पों के अनुसार रिकॉर्ड को मालिक के नाम, खेवट नंबर या खसरा नंबर जैसी जानकारी से खोजा जा सकता है। नई रजिस्ट्री के साथ मिला इंतकाल नंबर संभालकर रखना चाहिए, क्योंकि इससे फाइल की पहचान और स्थिति जानने में सुविधा होगी।
सरकार ने नागरिकों को इंतकाल की प्रगति ऑनलाइन ट्रैक करने और स्वीकृति के बाद उसकी प्रति डाउनलोड करने की सुविधा देने की बात कही है। पोर्टल पर उपलब्ध सेवा और विकल्प समय के साथ अपडेट हो सकते हैं।
11 दिन बाद भी इंतकाल न हो तो कहां शिकायत करें?
राजस्व विभाग ने समय पर इंतकाल पूरा नहीं होने की स्थिति में ऑनलाइन शिकायत निवारण व्यवस्था शुरू करने की घोषणा की है। इसके माध्यम से नागरिक अपनी शिकायत और संबंधित दस्तावेज ऑनलाइन जमा कर सकेंगे।
जिला प्रशासन के अनुसार शिकायत पर दस दिनों के भीतर कार्रवाई की जाएगी। इंतकाल स्वीकृत होने योग्य मिला तो उसकी प्रति उपलब्ध कराई जाएगी। आवेदन स्वीकार नहीं किया जा सकता तो CRO को कारण सहित आदेश जारी करना होगा।
हालांकि, विशेष शिकायत पोर्टल का सार्वजनिक लिंक अभी स्पष्ट रूप से उपलब्ध नहीं कराया गया है। लिंक जारी होने तक नागरिक अपने इंतकाल की स्थिति जमाबंदी पोर्टल पर देख सकते हैं और आवश्यकता होने पर संबंधित तहसील या राजस्व अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।
इंतकाल और जमाबंदी की ऑनलाइन कॉपी की फीस कितनी है?
इंतकाल की फीस को लेकर भी लोग Google पर जानकारी खोज रहे हैं। यहां इंतकाल दर्ज होने की प्रक्रिया और उसकी प्रमाणित प्रति प्राप्त करने की फीस को अलग-अलग समझना जरूरी है।
हरियाणा सरकार द्वारा जुलाई 2026 में शुरू की गई ऑनलाइन प्रमाणित रिकॉर्ड सेवा के तहत इंतकाल, पंजीकृत सेल डीड और फर्द बदर की डिजिटल प्रमाणित प्रति के लिए 100 रुपये शुल्क तय किया गया है। जमाबंदी की प्रमाणित प्रति के पहले दस पृष्ठों के लिए 100 रुपये और इसके बाद प्रत्येक अतिरिक्त पृष्ठ के लिए पांच रुपये शुल्क देना होगा।
यह प्रमाणित प्रति प्राप्त करने का शुल्क है। इसे हर तरह के इंतकाल पर लगने वाली कुल सरकारी फीस नहीं समझना चाहिए, क्योंकि जमीन के हस्तांतरण और दस्तावेज के प्रकार के अनुसार दूसरे शुल्क अलग हो सकते हैं।








