शुक्रवार, 21 अगस्त 2026 | 23:25 ISTFollow us at:
खेती-बाड़ी

हरियाणा में सेमग्रस्त जमीन फिर होगी खेती योग्य, 2 लाख एकड़ में लगेंगे ड्रेनेज सिस्टम, जाने किन जिलों से होगी शुरुवात

हरियाणा में जलभराव और सेमग्रस्त जमीन सुधारने की जल संरक्षित हरियाणा परियोजना
हरियाणा में जलभराव और सेमग्रस्त जमीन सुधारने की जल संरक्षित हरियाणा परियोजना

चंडीगढ़। हरियाणा में जलभराव और सेम की समस्या से प्रभावित किसानों के लिए सरकार ने बड़ा जल प्रबंधन कार्यक्रम तैयार किया है। ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना के तहत प्रदेश में 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार किया जाएगा। छह साल की इस परियोजना में नहरों के पुनर्वास, खालों के सुधार, सूक्ष्म सिंचाई, भूजल रिचार्ज और पानी की कम खपत वाली खेती को भी शामिल किया गया है।

इस परियोजना की कुल लागत करीब ₹5,714 करोड़ है। विश्व बैंक ने इसमें ₹4,000 करोड़ के ऋण को मंजूरी दी है। बाकी राशि राज्य सरकार अपने संसाधनों से खर्च करेगी। परियोजना को 2026 से 2032 के बीच चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा।

Table of Contents

सेमग्रस्त जमीन के लिए क्या होगा?

परियोजना के तहत प्रदेश की 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार किया जाना है। इसका उद्देश्य ऐसी जमीन का बेहतर उपयोग संभव बनाना है, जहां लंबे समय से पानी जमा रहने के कारण खेती प्रभावित होती है।

यहां एक बात समझना जरूरी है कि सरकार ने 2 लाख एकड़ जमीन के सुधार का लक्ष्य घोषित किया है, लेकिन उपलब्ध आधिकारिक जानकारी में हर जिले के लिए कितने एकड़ और किस गांव में कौन-सा काम होगा, इसकी पूरी जिला-वार सूची नहीं दी गई है।

इसलिए अभी यह कहना सही नहीं होगा कि 2 लाख एकड़ की पूरी जमीन केवल कुछ चुनिंदा जिलों में है।

ड्रेनेज सिस्टम से सेमग्रस्त जमीन को कैसे फायदा होगा?

जलभराव वाली जमीन में लंबे समय तक अतिरिक्त पानी जमा रहने से खेती प्रभावित होती है। ऐसे क्षेत्रों में जलनिकासी व्यवस्था बेहतर करना भूमि सुधार का महत्वपूर्ण हिस्सा हो सकता है।

हालांकि, उपलब्ध सरकारी घोषणा में 2 लाख एकड़ के लिए गांव-वार या खेत-वार ड्रेनेज सिस्टम की सूची जारी नहीं की गई है। इसलिए इसे इस तरह नहीं लिखना चाहिए कि हर प्रभावित खेत में निश्चित रूप से कोई विशेष drainage system लगाया जाएगा।

परियोजना का व्यापक उद्देश्य जल प्रबंधन, सिंचाई और जलभराव की समस्या को एक साथ सुधारना है। इसमें नहरों और वाटर कोर्स के पुनर्वास के साथ जलभराव वाली भूमि सुधार भी शामिल है।

किसानों को इस परियोजना से क्या फायदा होगा?

सरकार की योजना का असर सिर्फ पानी निकालने तक सीमित नहीं है। अलग-अलग घटकों के जरिए किसानों को बेहतर जल प्रबंधन और सिंचाई सुविधा देने का लक्ष्य है।

परियोजना में:

  • 2 लाख एकड़ जलभराव वाली भूमि का सुधार होगा।
  • 620 वाटर कोर्स यानी खालों का पुनरुद्धार किया जाएगा।
  • इससे करीब 3.18 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा मिलने का लक्ष्य है।
  • 120 नहर आधारित सूक्ष्म सिंचाई परियोजनाएं लागू की जाएंगी।
  • इनसे करीब 56,830 एकड़ भूमि को सिंचाई लाभ मिलने का अनुमान है।

इसका मतलब है कि सरकार जमीन, नहर और खेत तक पानी पहुंचाने वाली व्यवस्था को अलग-अलग योजनाओं की बजाय एक व्यापक जल प्रबंधन कार्यक्रम के रूप में देख रही है।

किन जिलों में नई Water Bodies बनेंगी?

यहां किसानों के लिए एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है।

सरकार ने भूजल पुनर्भरण को मजबूत करने के लिए सात जिलों में करीब 147 नई Water Bodies बनाने की योजना बताई है। इनमें शामिल हैं:

  • भिवानी
  • जींद
  • कैथल
  • महेंद्रगढ़
  • रेवाड़ी
  • चरखी दादरी
  • सिरसा

इन Water Bodies का उद्देश्य बारिश के पानी को संरक्षित करना और भूजल रिचार्ज को मजबूत करना है।

ध्यान दें: ये सात जिले 147 नई Water Bodies वाले component से संबंधित हैं। इन्हें 2 लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन सुधार की पूरी जिला-वार सूची समझना सही नहीं होगा।

यही अंतर इस खबर को पढ़ने वाले किसानों के लिए महत्वपूर्ण है।

सिरसा के किसानों के लिए क्या खास है?

सिरसा उन सात जिलों में शामिल है जहां नई Water Bodies विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य स्थानीय स्तर पर वर्षा जल संरक्षण और भूजल रिचार्ज को मजबूत करना है।

हालांकि, अभी उपलब्ध सरकारी घोषणा में सिरसा के किस गांव में Water Body बनेगी या कितने एकड़ जमीन को इससे लाभ मिलेगा, इसकी जानकारी नहीं दी गई है।

इसलिए गांवों की सूची जारी होने पर ही इस हिस्से को आगे अपडेट किया जाना चाहिए।

5 लाख एकड़ में धान की सीधी बिजाई क्यों होगी?

‘जल संरक्षित हरियाणा’ सिर्फ जलभराव वाली जमीन सुधारने की परियोजना नहीं है। इसमें कृषि में पानी की खपत कम करने के उपाय भी शामिल किए गए हैं।

सरकार ने 5 लाख एकड़ भूमि पर धान की सीधी बिजाई यानी DSR को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा है। इसके साथ 1.12 लाख एकड़ भूमि पर फसल विविधीकरण को बढ़ावा दिया जाएगा।

इसका उद्देश्य जल संरक्षण आधारित खेती को बढ़ावा देना है।

यानी परियोजना में एक तरफ ऐसी जमीन को सुधारने पर जोर है जहां पानी की अधिकता समस्या है, तो दूसरी तरफ उन क्षेत्रों में पानी की खपत कम करने के उपाय किए जा रहे हैं जहां भूजल पर दबाव है।

हरियाणा के किसानों के लिए बड़ी अपडेट, समय पर मिलेगा गेहूं का बीज और खाद; पराली मशीनों की सब्सिडी पर भी आदेश

हरियाणा में मकान की मरम्मत के लिए 80 हजार की मदद, जानें कौन पात्र और आवेदन से पहले क्या जरूरी

620 खालों के सुधार से क्या बदलेगा?

किसानों के खेत तक नहर का पानी पहुंचाने में वाटर कोर्स यानी खाल महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

परियोजना के तहत 620 वाटर कोर्स के पुनरुद्धार का लक्ष्य रखा गया है। सरकारी अनुमान के अनुसार इससे करीब 3.18 लाख एकड़ भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

इसके अलावा 120 नहर आधारित माइक्रो इरिगेशन परियोजनाएं भी लागू की जाएंगी, जिनसे करीब 56,830 एकड़ भूमि को सिंचाई लाभ मिलने की बात कही गई है।

678 नहरों का भी होगा पुनर्वास

परियोजना का एक बड़ा हिस्सा नहरों के पुनर्वास पर खर्च होगा। सरकार के अनुसार राज्य की शेष 678 नहरों के पुनर्वास का काम परियोजना में शामिल है।

इनमें:

  • 106 नहरों का काम विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से
  • 293 नहरों का काम राज्य बजट से
  • 279 नहरों का काम नाबार्ड के माध्यम से

करने की योजना बताई गई है।

इससे परियोजना का दायरा सिर्फ सेमग्रस्त जमीन तक सीमित नहीं रहता, बल्कि प्रदेश की सिंचाई व्यवस्था को भी मजबूत करने की कोशिश की जा रही है।

फसल विविधीकरण और DSR को साथ क्यों जोड़ा गया?

हरियाणा में पानी की उपलब्धता और भूजल स्तर को देखते हुए खेती में पानी की खपत कम करना भी परियोजना का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

इसीलिए सरकार ने:

5 लाख एकड़ — DSR
1.12 लाख एकड़ — फसल विविधीकरण

का लक्ष्य रखा है।

फसल विविधीकरण के जरिए किसानों को ऐसी फसलों की ओर बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा जिनमें क्षेत्र और परिस्थितियों के अनुसार पानी की जरूरत कम हो सकती है।

उपचारित पानी का भी होगा इस्तेमाल

परियोजना में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से उपचारित पानी के दोबारा उपयोग की योजना भी शामिल है।

सरकारी जानकारी के अनुसार जींद में दो, कैथल में एक और गुरुग्राम के धनवापुर में एक प्रमुख STP से उपचारित पानी का पुन: उपयोग किया जाएगा। इन चार STP से करीब 28,000 एकड़ भूमि को कवर करने का लक्ष्य है और इस component की लागत ₹282.13 करोड़ बताई गई है।

इससे साफ है कि परियोजना में केवल नए जल स्रोत बनाने के बजाय मौजूदा पानी के दोबारा उपयोग पर भी जोर दिया गया है।

परियोजना पर कितने पैसे खर्च होंगे?

‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना का कुल आकार करीब ₹5,714 करोड़ है।

जानकारी लक्ष्य/राशि
कुल परियोजना करीब ₹5,714 करोड़
विश्व बैंक ऋण ₹4,000 करोड़
परियोजना अवधि 2026 से 2032
परियोजना क्षेत्र 15 क्लस्टर, 48.94 लाख एकड़
जलभराव वाली भूमि सुधार 2 लाख एकड़
DSR 5 लाख एकड़
फसल विविधीकरण 1.12 लाख एकड़
वाटर कोर्स 620
नहर आधारित माइक्रो इरिगेशन 120 परियोजनाएं
नई Water Bodies करीब 147

क्या किसानों को सीधे पैसे मिलेंगे?

नहीं, उपलब्ध जानकारी से ऐसा नहीं कहा जा सकता।

₹5,714 करोड़ की यह राशि मुख्य रूप से नहरों, जल निकासी/जल प्रबंधन, सिंचाई, Water Bodies, माइक्रो इरिगेशन, DSR और फसल विविधीकरण जैसे कार्यों के लिए है।

इसलिए इसे ऐसी योजना नहीं समझना चाहिए जिसमें 2 लाख एकड़ जमीन वाले किसानों के खातों में कोई निश्चित रकम सीधे भेजी जाएगी।

अगर भविष्य में किसी component के तहत किसानों को अलग से subsidy या financial assistance दी जाती है, तो उसकी पात्रता और आवेदन प्रक्रिया सरकार द्वारा अलग से बताई जाएगी।

अगर किसान की जमीन में सेम या जलभराव की समस्या है तो अभी क्या करें?

अभी सबसे जरूरी बात यह है कि किसान किसी व्यक्ति या एजेंट को पैसे देकर परियोजना में अपना नाम जुड़वाने की कोशिश न करें।

क्योंकि उपलब्ध सरकारी घोषणा में अभी 2 लाख एकड़ के लिए गांव-वार लाभार्थी सूची या खेत-वार आवेदन प्रक्रिया जारी नहीं की गई है।

किसान:

  1. अपनी जमीन और स्वामित्व से जुड़े रिकॉर्ड अपडेट रखें।
  2. जलभराव/सेम से प्रभावित जमीन की स्थिति की जानकारी स्थानीय कृषि या सिंचाई विभाग से लें।
  3. विभाग द्वारा क्षेत्रवार सर्वे या कार्ययोजना जारी होने पर उसकी जांच करें।
  4. किसी भी आवेदन या सहायता के लिए केवल आधिकारिक सरकारी सूचना पर भरोसा करें।

एक नजर में समझें ‘जल संरक्षित हरियाणा’ परियोजना

क्या है? — प्रदेश की जल व्यवस्था और कृषि जल प्रबंधन सुधारने की बड़ी परियोजना।
कितने समय की? — 2026 से 2032 तक।
कुल लागत? — करीब ₹5,714 करोड़।
विश्व बैंक की हिस्सेदारी? — ₹4,000 करोड़ ऋण।
जलभराव वाली जमीन? — 2 लाख एकड़ सुधार का लक्ष्य।
DSR? — 5 लाख एकड़।
फसल विविधीकरण? — 1.12 लाख एकड़।
खालों का सुधार? — 620 वाटर कोर्स।
नई Water Bodies? — सात जिलों में करीब 147।

किसानों के लिए सबसे जरूरी बात

इस पूरी परियोजना को केवल “2 लाख एकड़ सेमग्रस्त जमीन को खेती योग्य बनाने” तक सीमित करके देखना सही नहीं होगा। यह हरियाणा की नहर, जलनिकासी, सिंचाई, भूजल रिचार्ज और खेती में पानी के इस्तेमाल को एक साथ सुधारने की कोशिश है।

वहीं, सिरसा समेत सात जिलों में 147 Water Bodies का प्रावधान भूजल रिचार्ज से जुड़ा अलग हिस्सा है। इसलिए किसान यह उम्मीद न करें कि सात जिलों की सूची ही 2 लाख एकड़ जलभराव वाली जमीन की जिला-वार सूची है।

लेखक

Kuldeep Singh

कुलदीप सिंह LocalHaryana.com पर लेखक के रुप में कार्यरत हैं। वे वर्ष 2021 से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

और पढ़ें

सभी देखें