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हरियाणा में इंतकाल की प्रक्रिया हुई आसान, रजिस्ट्री होते ही अधिकतम 10 दिन में ऑटोमेटिक दर्ज होगा इंतकाल

हरियाणा में ऑटो म्यूटेशन सिस्टम लागू होने से रजिस्ट्री के बाद इंतकाल का अलग आवेदन नहीं करना होगा। जानें किसका इंतकाल 24 घंटे और किसका अधिकतम 10 दिनों में होगा।

हरियाणा में रजिस्ट्री के बाद ऑटो म्यूटेशन से जमीन का इंतकाल दर्ज कराने की प्रक्रिया
हरियाणा में रजिस्ट्री होते ही इंतकाल की फाइल स्वतः बनेगी; सामान्य मामलों में 24 घंटे और खेवट विभाजन वाले मामलों में अधिकतम 10 दिन लगेंगे।

हरियाणा में जमीन या प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री करवाने वाले लोगों को अब इंतकाल दर्ज कराने के लिए अलग से आवेदन लेकर पटवारी और तहसील कार्यालय के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। प्रदेश में लागू ऑटो म्यूटेशन सिस्टम के तहत रजिस्ट्री पूरी होते ही इंतकाल की फाइल अपने आप बन जाएगी और उसी समय उसका नंबर भी मिल जाएगा।

हालांकि प्रत्येक इंतकाल तत्काल मंजूर नहीं होगा। जिन मामलों में संयुक्त खेवट के विभाजन की आवश्यकता नहीं है, उनका इंतकाल 24 घंटे में स्वीकृत करने की व्यवस्था है। खेवट विभाजन या अतिरिक्त जांच वाले मामलों का निपटारा अधिकतम 10 दिनों में किया जाएगा।

रजिस्ट्री होते ही अपने आप शुरू होगी इंतकाल प्रक्रिया

पहले जमीन की रजिस्ट्री और राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज कराने की प्रक्रिया अलग-अलग होती थी। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद खरीदार को इंतकाल के लिए आवेदन करना पड़ता था। इसके कारण कई मामलों में राजस्व रिकॉर्ड लंबे समय तक पुराने मालिक के नाम पर ही रहता था।

ऑटो म्यूटेशन सिस्टम में रजिस्ट्री और इंतकाल की प्रक्रिया को आपस में जोड़ दिया गया है। जैसे ही जमीन की रजिस्ट्री पूरी होगी, सॉफ्टवेयर संबंधित जानकारी के आधार पर इंतकाल की एंट्री तैयार कर देगा। नागरिक को इसके लिए दूसरा आवेदन जमा करने की जरूरत नहीं होगी।

सरकार के अनुसार, सिस्टम के शुरुआती चरण में करीब 50 हजार इंतकाल स्वतः दर्ज किए जा चुके हैं।

किसका इंतकाल 24 घंटे और किसका 10 दिन में होगा?

इंतकाल पूरा होने का समय जमीन के रिकॉर्ड और हिस्सेदारी की स्थिति पर निर्भर करेगा।

  • जिस रजिस्ट्री में संयुक्त खेवट के बंटवारे की आवश्यकता नहीं है, उसका इंतकाल 24 घंटे में स्वीकृत किया जा सकता है।
  • जिस मामले में खेवट विभाजन जरूरी है, उसका निपटारा अधिकतम 10 दिनों में किया जाएगा।
  • विरासत, पारिवारिक बंटवारे और अदालत की डिक्री पर आधारित इंतकाल भी अधिकतम 10 दिनों में निपटाने की व्यवस्था बताई गई है।
  • रिकॉर्ड या दस्तावेज में गड़बड़ी मिलने पर सिस्टम फाइल को स्वतः होल्ड कर सकता है। ऐसे मामले में जांच पूरी होने तक इंतकाल मंजूर नहीं होगा।

इसलिए “ऑटो म्यूटेशन” का अर्थ यह नहीं है कि प्रत्येक रजिस्ट्री के साथ बिना किसी जांच के मालिक का नाम तुरंत बदल जाएगा। सॉफ्टवेयर इंतकाल की प्रक्रिया अपने आप शुरू करेगा, लेकिन जरूरी मामलों में राजस्व अधिकारी रिकॉर्ड की जांच और निर्णय करेंगे।

अब अलग से आवेदन देना पड़ेगा या नहीं?

नई रजिस्ट्री के आधार पर होने वाले सामान्य इंतकाल के लिए अलग आवेदन देने की जरूरत नहीं होगी। रजिस्ट्री पूरी होने के बाद इंतकाल नंबर उसी प्रक्रिया में तैयार हो जाएगा।

व्यक्ति अपने इंतकाल की स्थिति ऑनलाइन देख सकेगा। प्रक्रिया पूरी होने के बाद इंतकाल की कॉपी घर बैठे डाउनलोड और प्रिंट करने की सुविधा भी उपलब्ध कराई गई है। इससे केवल इंतकाल की स्थिति पूछने या उसकी प्रति लेने के लिए तहसील कार्यालय जाने की जरूरत कम होगी।

हरियाणा सरकार ने ऑटो म्यूटेशन के साथ पेपरलेस रजिस्ट्रेशन 2.0 भी लागू किया है। इसमें आधार आधारित ई-केवाईसी, डिजिटल हस्ताक्षर, बायोमेट्रिक सत्यापन और क्यूआर कोड से दस्तावेजों की जांच जैसी सुविधाएं जोड़ी गई हैं।

पुरानी लंबित फाइलों का क्या होगा?

ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था मुख्य रूप से नई रजिस्ट्री के बाद इंतकाल प्रक्रिया स्वतः शुरू करने के लिए है। इसका यह अर्थ नहीं है कि हर पुराना लंबित इंतकाल बिना जांच के अपने आप मंजूर हो जाएगा।

सरकार ने पुराने लंबित मामलों को निपटाने के लिए अलग अभियान चलाया है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रदेश में छह लाख से अधिक लंबित इंतकाल मामलों में से करीब चार लाख का निपटारा किया जा चुका था। शेष मामलों की जिला और प्रदेश स्तर पर ऑनलाइन निगरानी की जा रही है।

यदि किसी व्यक्ति की पुरानी रजिस्ट्री का इंतकाल अभी तक दर्ज नहीं हुआ है तो उसे केवल नई ऑटो म्यूटेशन व्यवस्था के भरोसे नहीं रहना चाहिए। संबंधित रिकॉर्ड की स्थिति ऑनलाइन जांचने के बाद आवश्यकता पड़ने पर तहसील कार्यालय से संपर्क करना होगा।

इंतकाल और रजिस्ट्री में क्या अंतर है?

रजिस्ट्री संपत्ति की खरीद-बिक्री का पंजीकृत दस्तावेज है, जबकि इंतकाल के माध्यम से जमीन के राजस्व रिकॉर्ड में नए मालिक का नाम दर्ज किया जाता है। केवल रजिस्ट्री होने से राजस्व रिकॉर्ड तत्काल अपडेट नहीं होता था। नई व्यवस्था इसी अंतर को कम करने के लिए लाई गई है।

ऑटो म्यूटेशन से इंतकाल की फाइल अपने आप बनने लगेगी, लेकिन जमीन के स्वामित्व से संबंधित विवाद का अंतिम फैसला केवल सॉफ्टवेयर नहीं करेगा। विवाद, आपत्ति या रिकॉर्ड में अंतर वाले मामले संबंधित कानूनी और राजस्व प्रक्रिया के अनुसार ही निपटाए जाएंगे।

आधिकारिक जानकारी के लिए नागरिक हरियाणा के जमाबंदी पोर्टल पर जमीन का रिकॉर्ड और उपलब्ध ऑनलाइन सेवाएं देख सकते हैं।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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