66 हजार करोड़ के MoU के बाद हरियाणा में कहां बढ़ेगा कौन-सा उद्योग? सरकार ने चार हिस्सों का बताया प्लान
हरियाणा में ₹66 हजार करोड़ के MoU के बाद सरकार ने उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिम Haryana के लिए अलग औद्योगिक प्लान बताया है। जानें Godrej का निवेश कहां होगा और रोजगार कैसे मिलेगा।
हरियाणा में उद्योगों के विस्तार को लेकर सरकार ने बड़ा निवेश अभियान शुरू किया है। मुंबई में चल रहे ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ अभियान के दूसरे दिन विभिन्न कंपनियों के साथ 66 हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश समझौते (MoU) किए गए। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी और उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह की मौजूदगी में कंपनियों और सरकार के अधिकारियों ने इन समझौतों का आदान-प्रदान किया।
लेकिन 66 हजार करोड़ रुपये का आंकड़ा अपने आप में पूरी कहानी नहीं बताता। आम लोगों और खासकर युवाओं के लिए बड़ा सवाल यह है कि यह निवेश हरियाणा में कहां आएगा, किस क्षेत्र में कौन-से उद्योग बढ़ेंगे और रोजगार के मौके किन जिलों में बन सकते हैं। सरकार ने इसके लिए हरियाणा को उत्तर, मध्य, दक्षिण और पश्चिम—चार औद्योगिक हिस्सों में आगे बढ़ाने की रणनीति बताई है।
हरियाणा के चार हिस्सों में अलग-अलग उद्योगों पर रहेगा फोकस
सरकार की योजना पूरे प्रदेश में एक ही प्रकार के उद्योग लगाने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों की मौजूदा ताकत, जमीन, कौशल और सड़क-रेल संपर्क को देखते हुए औद्योगिक समूह विकसित करने की है।
| हरियाणा का क्षेत्र | जिन उद्योगों को बढ़ाने की योजना |
|---|---|
| उत्तर हरियाणा | खाद्य प्रसंस्करण, दवा उद्योग, वैज्ञानिक उपकरण, माल ढुलाई एवं भंडारण |
| मध्य हरियाणा | इंजीनियरिंग, कपड़ा उद्योग, ऑटोमोबाइल, माल भंडारण |
| दक्षिण हरियाणा | सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन, वैश्विक क्षमता केंद्र, उन्नत विनिर्माण |
| पश्चिमी हरियाणा | कृषि आधारित उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा, कपड़ा उद्योग, निर्यात आधारित इकाइयां |
सरकार का कहना है कि जिला-विशिष्ट औद्योगिक समूहों को जमीन, प्रशिक्षित कर्मचारियों और बेहतर संपर्क सुविधाओं से जोड़कर नए विकास केंद्र बनाए जाएंगे।
इस घोषणा में चारों क्षेत्रों के अंतर्गत आने वाले जिलों की अलग आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है। इसलिए किसी एक जिले को निश्चित रूप से किसी एक क्षेत्र में रखकर नई परियोजना घोषित मानना अभी सही नहीं होगा।
गुरुग्राम, फरीदाबाद और मानेसर की भूमिका क्या रहेगी?
दक्षिण हरियाणा पहले से प्रदेश का सबसे बड़ा औद्योगिक और सेवा केंद्र है। मुख्यमंत्री के मुताबिक गुरुग्राम वैश्विक सेवाओं और तकनीक, फरीदाबाद इंजीनियरिंग और विनिर्माण तथा मानेसर ऑटोमोबाइल और वाहन कलपुर्जा उद्योग के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित हो चुके हैं।
नई औद्योगिक रणनीति में दक्षिण हरियाणा को सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहनों, वैश्विक क्षमता केंद्रों और उन्नत विनिर्माण से और मजबूत करने की योजना है।
यह दिशा जून 2026 में लागू की गई नई Haryana industrial policies से भी मेल खाती है। इनमें इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा एवं चिकित्सा उपकरण, सूचना प्रौद्योगिकी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा सेंटर और वैश्विक क्षमता केंद्र जैसे क्षेत्रों के लिए अलग नीतियां बनाई गई हैं।
उत्तर हरियाणा में किन उद्योगों के बढ़ने की संभावना?
उत्तर हरियाणा के लिए सरकार ने खाद्य प्रसंस्करण, दवा उद्योग, वैज्ञानिक उपकरण और माल ढुलाई से जुड़े कारोबार को प्राथमिकता दी है।
इसका संबंध यहां की कृषि और मौजूदा औद्योगिक गतिविधियों से भी है। सरकार ने विशेष रूप से पानीपत, यमुनानगर, अंबाला, करनाल और सोनीपत जैसे जिलों की अलग-अलग औद्योगिक और कृषि आधारित पहचान का उल्लेख किया है।
खाद्य प्रसंस्करण बढ़ने का सीधा मतलब केवल बड़ी फैक्ट्री नहीं है। इसके आसपास पैकिंग, शीत भंडारण, अनाज-सब्जी प्रसंस्करण, परिवहन और दूसरे सहायक कारोबार भी विकसित हो सकते हैं।
पश्चिमी हरियाणा में खेती के साथ ऊर्जा और उद्योग पर जोर
पश्चिमी हरियाणा के लिए सरकार का फोकस कृषि आधारित उद्योग, नवीकरणीय ऊर्जा, कपड़ा और निर्यात आधारित इकाइयों पर रहेगा।
इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि पश्चिमी जिलों की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा खेती से जुड़ा है। कृषि उत्पाद को सिर्फ मंडी में बेचने के बजाय उसकी सफाई, ग्रेडिंग, प्रसंस्करण, पैकिंग और निर्यात से जोड़ने की योजना सरकार की औद्योगिक रणनीति का हिस्सा है।
सरकार ने कृषि तकनीक, ड्रोन, डेटा, भंडारण, पैकेजिंग और ब्रांडिंग के जरिए किसानों को प्रसंस्करण और बड़े बाजारों से जोड़ने की बात भी कही है।
Godrej के ₹20 हजार करोड़ कहां लगेंगे?
मुंबई निवेश अभियान के बीच सबसे बड़े अलग निवेश समझौतों में Godrej Industries Group का करीब 20 हजार करोड़ रुपये का MoU भी शामिल है। कंपनी का कहना है कि इससे हरियाणा में लगभग 40 हजार प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बनने की संभावना है।
इस निवेश का सबसे बड़ा हिस्सा Godrej Properties के जरिए आने वाला है। कंपनी हरियाणा में पहले करीब 11 हजार करोड़ रुपये लगा चुकी है और वित्त वर्ष 2027-28 तक करीब 16 हजार करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना है।
Godrej Properties के अभी हरियाणा के पांच शहरों में कुल 18 प्रोजेक्ट बताए गए हैं:
गुरुग्राम, सोनीपत, फरीदाबाद, पानीपत और कुरुक्षेत्र।
कंपनी के भविष्य के आवासीय प्रोजेक्ट से 11 हजार से अधिक रोजगार बनने का अनुमान जताया गया है।
गुरुग्राम में Godrej का ₹3,500 करोड़ का अलग प्लान
Godrej का निवेश केवल मकान और आवासीय परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहेगा।
समूह की रियल एस्टेट निवेश इकाई Godrej Ventures हरियाणा में पहले लगभग 1,000 करोड़ रुपये निवेश कर चुकी है और अब गुरुग्राम में उच्च श्रेणी के कार्यालय परिसर बनाने के लिए करीब 3,500 करोड़ रुपये और निवेश करने की योजना है।
इससे गुरुग्राम में बड़ी कंपनियों, बहुराष्ट्रीय कंपनियों और वैश्विक क्षमता केंद्रों के लिए नए कार्यालय स्थान तैयार होने की उम्मीद है।
Godrej Industries Group के मुताबिक इन प्रस्तावित निवेशों से गुरुग्राम के कारोबारी ढांचे में 30 हजार से अधिक प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार बनने की क्षमता है।
Godrej के नए 18 प्रोजेक्ट कहां आएंगे?
यहां एक जरूरी फर्क है। 18 प्रोजेक्ट नए नहीं हैं। कंपनी ने कहा है कि उसके फिलहाल हरियाणा में 18 प्रोजेक्ट गुरुग्राम, सोनीपत, फरीदाबाद, पानीपत और कुरुक्षेत्र में मौजूद हैं।
भविष्य में Godrej Properties के 16 हजार करोड़ रुपये के निवेश से नए प्रोजेक्ट विकसित होंगे, लेकिन कंपनी ने अभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं बताया है कि इनमें से हर नया प्रोजेक्ट किस शहर या किस सेक्टर में बनेगा।
फिलहाल जिस स्थान की स्पष्ट पुष्टि है, वह गुरुग्राम में 3,500 करोड़ रुपये की कार्यालय ढांचा योजना है।
इसलिए अभी से यह कहना कि Godrej का अगला housing project किसी खास Haryana शहर में ही आएगा, सही नहीं होगा।
₹66 हजार करोड़ का कितना पैसा किस जिले में जाएगा?
अभी सरकार ने 66 हजार करोड़ रुपये के सभी MoU का जिला-वार और कंपनी-वार पूरा सार्वजनिक बंटवारा जारी नहीं किया है।
इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि इसमें से गुरुग्राम को इतने हजार करोड़, हिसार को इतने या करनाल को इतनी राशि निश्चित रूप से मिलेगी।
सरकार ने अभी निवेश की दिशा बताई है—यानी किस क्षेत्र में किस प्रकार के उद्योग विकसित किए जाएंगे। अलग-अलग कंपनियों की परियोजनाएं जमीन चयन, अनुमति और परियोजना की तैयारी के साथ स्पष्ट होती जाएंगी।
Godrej ऐसा उदाहरण है जहां कंपनी ने रकम, निवेश अवधि और कुछ स्थानों के बारे में अलग से विस्तृत जानकारी जारी की है।
MoU होने का मतलब क्या पैसा हरियाणा में आ गया?
नहीं। MoU निवेश की प्रतिबद्धता है, पूरा निवेश उसी दिन जमीन पर खर्च हो जाना नहीं।
इसके बाद आम तौर पर परियोजना के लिए जमीन, विभिन्न मंजूरियां, निर्माण, मशीनरी और संचालन जैसे कई चरण आते हैं।
सरकार ने इस सवाल के जवाब में अपने पुराने MoU का उदाहरण भी दिया है। जून में औद्योगिक नीति शुरू करते समय करीब 1.10 लाख करोड़ रुपये के MoU 123 कंपनियों के साथ किए गए थे। मुख्यमंत्री के मुताबिक उनमें से 108 कंपनियों को जमीन दी जा चुकी है।
इसी आधार पर सरकार का कहना है कि उसका जोर केवल समझौता करने पर नहीं बल्कि परियोजनाओं को जमीन पर उतारने पर है।
66 हजार करोड़ का निवेश कब तक आएगा?
सभी MoU के लिए अभी कोई एक साझा अंतिम तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है। अलग-अलग कंपनियों की अपनी निवेश अवधि होगी।
Godrej के मामले में सबसे स्पष्ट समयसीमा सामने आई है। Godrej Properties ने वित्त वर्ष 2027-28 तक अतिरिक्त 16 हजार करोड़ रुपये निवेश करने की योजना बताई है।
बाकी परियोजनाओं की तारीखें कंपनी, जमीन और मंजूरी की प्रक्रिया के अनुसार अलग हो सकती हैं।
युवाओं को नौकरी कैसे मिलेगी?
66 हजार करोड़ रुपये के MoU का अर्थ यह नहीं है कि इसके साथ कोई एक सरकारी भर्ती फार्म भी जारी हो गया है।
नौकरियां तब निकलेंगी जब संबंधित कंपनियां अपनी परियोजनाओं के लिए निर्माण, उत्पादन, कार्यालय, तकनीकी सेवाओं, बिक्री, परिवहन या दूसरे कामों के लिए भर्ती शुरू करेंगी।
हरियाणा सरकार ने निवेशकों को दी अपनी पांच प्रमुख प्रतिबद्धताओं में निवेश को स्थानीय रोजगार, छोटे उद्योगों, कौशल और क्षेत्रीय विकास से जोड़ने की बात कही है।
Godrej में नौकरी की तलाश करने वाले उम्मीदवार कंपनी के आधिकारिक career portal पर उपलब्ध vacancies देख सकते हैं। Godrej Industries का career portal location और काम के अनुसार पद दिखाता है और इस समय भी गुरुग्राम समेत विभिन्न स्थानों की नौकरियां वहां सूचीबद्ध हैं।
लेकिन 40 हजार संभावित रोजगार के लिए कोई अलग Haryana application अभी शुरू नहीं हुआ है।
आने वाले समय में किन क्षेत्रों में ज्यादा रोजगार बन सकते हैं?
सरकार की चार-क्षेत्रीय रणनीति को देखें तो रोजगार केवल फैक्ट्री मजदूर या इंजीनियर तक सीमित नहीं रहेगा।
दक्षिण हरियाणा में तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन और वैश्विक क्षमता केंद्रों से आईटी, इंजीनियरिंग, प्रबंधन और कार्यालय नौकरियां बढ़ सकती हैं।
मध्य हरियाणा में वाहन उद्योग, कपड़ा, इंजीनियरिंग और माल भंडारण से उत्पादन, मशीन संचालन, रखरखाव और परिवहन के अवसर बन सकते हैं।
उत्तर हरियाणा में खाद्य प्रसंस्करण, दवा उद्योग और माल ढुलाई से उत्पादन, गुणवत्ता जांच, पैकिंग और भंडारण के रोजगार बढ़ सकते हैं।
पश्चिमी हरियाणा में कृषि प्रसंस्करण, सौर एवं दूसरी नवीकरणीय ऊर्जा, वस्त्र और निर्यात इकाइयों से ग्रामीण और औद्योगिक रोजगार दोनों की संभावना बन सकती है।
सरकार की नई औद्योगिक नीतियां भी इलेक्ट्रॉनिक्स, दवा एवं चिकित्सा उपकरण, खिलौना एवं खेल उपकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, वैश्विक क्षमता केंद्र और दूसरे उभरते क्षेत्रों में निवेश बढ़ाने पर केंद्रित हैं।
इसलिए 66 हजार करोड़ रुपये के MoU का असर किसी एक जिले या एक उद्योग तक सीमित रहने के बजाय अलग-अलग क्षेत्रों में चरणबद्ध तरीके से दिखाई देने की उम्मीद है।








