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हरियाणा

कुरुक्षेत्र में 465 करोड़ से बनेगा देश का पहला AYUSH विश्वविद्यालय कैंपस, मिलेगी ये सुविधाएं

कुरुक्षेत्र के फतुहपुर में करीब 100 एकड़ पर श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का स्थायी कैंपस बनेगा। जानिए 465 करोड़ के पहले चरण में कौन-से अस्पताल, कॉलेज, हॉस्टल और शोध सुविधाएं मिलेंगी।

कुरुक्षेत्र के फतुहपुर में प्रस्तावित श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय के नए कैंपस का दृश्य
कुरुक्षेत्र के फतुहपुर में करीब 100 एकड़ भूमि पर श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का स्थायी कैंपस तीन चरणों में विकसित किया जाएगा।

हरियाणा के कुरुक्षेत्र में देश के पहले श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय का स्थायी कैंपस बनने का रास्ता साफ हो गया है। जिले के फतुहपुर गांव में लगभग 100 एकड़ जमीन पर बनने वाले कैंपस के पहले चरण पर करीब 465 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। निर्माण एजेंसी साइट का निरीक्षण कर चुकी है और मिट्टी की जांच, सर्वे तथा पर्यावरण संबंधी मंजूरी लेने की प्रक्रिया चल रही है।

नए कैंपस में पढ़ाई और शोध के साथ मरीजों के इलाज की भी व्यवस्था होगी। पहले चरण में 250 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल, आयुर्वेदिक पीजी कॉलेज, रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर, केंद्रीय पुस्तकालय, ऑडिटोरियम और विद्यार्थियों के लिए छात्रावास बनाए जाएंगे। इस चरण को 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

अभी पुराने आयुर्वेदिक कॉलेज से चल रहा विश्वविद्यालय

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2017 में कुरुक्षेत्र में देश का पहला AYUSH विश्वविद्यालय स्थापित करने की घोषणा की थी। इसके बाद श्रीकृष्ण राजकीय आयुर्वेदिक महाविद्यालय को अपग्रेड करके श्रीकृष्ण आयुष विश्वविद्यालय बनाया गया।

फतुहपुर में नए परिसर की आधारशिला 12 फरवरी 2019 को रखी गई थी। लेकिन स्थायी कैंपस तैयार नहीं होने के कारण विश्वविद्यालय अभी कुरुक्षेत्र के मौजूदा आयुर्वेदिक कॉलेज परिसर से संचालित हो रहा है।

हरियाणा विधानसभा की शिक्षा संबंधी विषय समिति की रिपोर्ट में नए कैंपस के लिए लगभग 95 एकड़ जमीन का उल्लेख है, जबकि हाल की रिपोर्टों में इसे करीब 100 एकड़ बताया गया है। इसलिए 100 एकड़ का आंकड़ा अनुमानित और राउंड फिगर के रूप में समझना चाहिए।

पहले चरण में बनेंगी ये सुविधाएं

विश्वविद्यालय के पहले चरण में मुख्य रूप से आयुर्वेद की पढ़ाई, शोध और उपचार से संबंधित आधारभूत ढांचा तैयार किया जाएगा। इसमें शामिल हैं:

  • 250 बेड का आयुर्वेदिक अस्पताल
  • आयुर्वेदिक स्नातकोत्तर कॉलेज
  • रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर
  • कुलपति और कुलसचिव कार्यालय
  • प्रशासनिक भवन और परीक्षा शाखा
  • केंद्रीय पुस्तकालय
  • आधुनिक ऑडिटोरियम
  • पीजी और पीएचडी शोधार्थियों के लिए छात्रावास
  • विद्यार्थियों के लिए डाइनिंग हॉल
  • विश्वविद्यालय मार्केट और पावर हाउस
  • कुलपति और कुलसचिव के आवास
  • अधिकारियों एवं कर्मचारियों के आवास
  • सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम

इस कैंपस को पर्यावरण मानकों के अनुरूप विकसित करने की योजना है। इसमें सौर ऊर्जा और वर्षा जल संचयन की व्यवस्था भी की जाएगी।

योग और प्राकृतिक चिकित्सा समेत बाकी संस्थान कब बनेंगे?

पूरे विश्वविद्यालय कैंपस को तीन चरणों में विकसित करने की योजना है। पहले चरण में आयुर्वेदिक अस्पताल, पीजी कॉलेज, प्रशासनिक और शोध सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई है।

इसके बाद अगले दो चरणों में योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा, होम्योपैथी, सिद्ध और यूनानी चिकित्सा पद्धतियों के अलग-अलग संस्थान और अस्पताल बनाए जाएंगे। इन चरणों में प्रस्तावित सुविधाएं हैं:

  • योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा संस्थान और अस्पताल
  • होम्योपैथी संस्थान और अस्पताल
  • सिद्ध चिकित्सा संस्थान और अस्पताल
  • यूनानी चिकित्सा संस्थान और अस्पताल
  • फार्मेसी
  • अतिरिक्त आवासीय सुविधाएं
  • खेल परिसर
  • गेस्ट हाउस

विश्वविद्यालय के अनुसार प्रत्येक चिकित्सा पद्धति का अपना विशेष अस्पताल होगा, जबकि रिसर्च एंड इनोवेशन सेंटर सभी विभागों के लिए साझा रहेगा। आयुर्वेदिक अस्पताल 250 बेड का होगा और अन्य चिकित्सा पद्धतियों के अस्पतालों में 50-50 बेड रखने की योजना है।

निर्माण कब शुरू और पूरा होगा?

विश्वविद्यालय के कुलपति वैद्य करतार सिंह धीमान के अनुसार पहले चरण का ठेका दिया जा चुका है। निर्माण एजेंसी ने साइट पर मिट्टी की जांच, सर्वे, पर्यावरण मंजूरी और अन्य औपचारिकताओं की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

वास्तविक निर्माण आवश्यक पर्यावरणीय मंजूरियां और दूसरी स्वीकृतियां मिलने के बाद शुरू होगा। पहले चरण को निर्माण शुरू होने से लगभग 30 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है। अभी निर्माण शुरू होने की निश्चित तारीख सार्वजनिक नहीं की गई है।

इसलिए परियोजना को निर्माणाधीन बताने के बजाय फिलहाल निर्माण से पहले की औपचारिकताएं पूरी होने के चरण में कहना अधिक सही होगा।

465 करोड़ केवल पहले चरण की लागत

करीब 465 करोड़ रुपये का आंकड़ा पूरे विश्वविद्यालय परिसर की लागत नहीं, बल्कि वर्तमान में बताए गए पहले चरण के निर्माण से संबंधित है। पूरा कैंपस तीन चरणों में विकसित होना है।

परियोजना की लागत को लेकर उपलब्ध सार्वजनिक रिकॉर्ड में अलग-अलग आंकड़े भी दिखाई देते हैं। विश्वविद्यालय और हाल की मीडिया रिपोर्टों में पहले चरण का निर्माण ठेका लगभग 465 करोड़ रुपये बताया गया है। वहीं, निर्माण कंपनी से संबंधित पहले की शेयर बाजार सूचना में GST सहित EPC बोली करीब 559.50 करोड़ रुपये बताई गई थी। अंतिम लागत संबंधित अनुबंध, कर और कार्यक्षेत्र के आधार पर अलग हो सकती है।

हरियाणा विधानसभा की विषय समिति की पहले की रिपोर्ट में तीनों चरणों वाली पूरी परियोजना की अनुमानित लागत करीब 1,296 करोड़ रुपये बताई गई थी। यह पुराना अनुमान है और परियोजना पूरी होने तक वास्तविक लागत में बदलाव संभव है।

विद्यार्थियों और मरीजों को क्या फायदा होगा?

स्थायी कैंपस बनने के बाद पढ़ाई, शोध और मरीजों के उपचार की सुविधाएं एक ही परिसर में उपलब्ध हो सकेंगी। अभी विश्वविद्यालय में आयुर्वेद के साथ होम्योपैथी, यूनानी, सिद्ध और प्राकृतिक चिकित्सा की OPD सेवाएं चलाई जा रही हैं।

नए परिसर में विद्यार्थियों को प्रयोगशालाओं, पुस्तकालय, अस्पताल और रिसर्च सेंटर का साझा शैक्षणिक वातावरण मिलेगा। मरीजों को भी अलग-अलग AYUSH चिकित्सा पद्धतियों के विशेषज्ञ उपचार की सुविधा एक ही कैंपस में मिलने की योजना है।

विश्वविद्यालय में वर्तमान व्यवस्था के अनुसार BAMS की 63, स्नातकोत्तर स्तर की 82 और डिप्लोमा इन फार्मेसी की 63 सीटों का प्रावधान बताया गया है। नए परिसर में भविष्य में सीटों या नए पाठ्यक्रमों की संख्या कितनी बढ़ेगी, इसकी अंतिम जानकारी अभी घोषित नहीं की गई है।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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