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हरियाणा में यमुना का पानी कहां-कहां बिगड़ रहा? सरकारी आंकड़ों में सामने आई पूरी तस्वीर

हरियाणा में यमुना के पानी की गुणवत्ता को लेकर सरकारी आंकड़ों और हालिया रिपोर्ट में…

हरियाणा में यमुना का पानी कहां-कहां बिगड़ रहा? सरकारी आंकड़ों में पूरी तस्वीर

चंडीगढ़/फरीदाबाद। हरियाणा से गुजरते हुए यमुना के पानी की गुणवत्ता को लेकर सामने आए आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। हालिया रिपोर्ट में हरियाणा में नदी के अलग-अलग हिस्सों पर लिए गए पानी के नमूनों के आधार पर प्रदूषण की स्थिति का विश्लेषण किया गया है। खास बात यह है कि नदी में कई स्थानों पर नालों के मिलने के बाद पानी की गुणवत्ता और खराब होती दिखाई देती है।

Times of India की 17 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2021 से जून 2026 के बीच Haryana State Pollution Control Board के 14 मॉनिटरिंग पॉइंट से जुटाए गए आंकड़ों में 2026 के 57 BOD नमूनों में से 38 में स्तर 3 mg/l की निर्धारित bathing-water limit से ऊपर मिला। वहीं 55 नमूनों में से 35 में faecal coliform की मात्रा 500 MPN/100 ml की वांछित सीमा से अधिक पाई गई।

यमुना में प्रदूषण कहां ज्यादा बढ़ रहा है?

सरकारी रिकॉर्ड में यमुना के साथ मिलने वाले कई नालों के पहले और बाद के पानी की गुणवत्ता के आंकड़े दर्ज हैं। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि नदी के किन हिस्सों में प्रदूषण बढ़ रहा है।

राष्ट्रीय स्वच्छ गंगा मिशन (NMCG) पर उपलब्ध हरियाणा के मॉनिटरिंग रिकॉर्ड में फरीदाबाद और पलवल के कुछ स्थानों पर नाले के मिलने से पहले और बाद के BOD स्तर में अंतर दर्ज किया गया है। उदाहरण के लिए, एक मॉनिटरिंग रिकॉर्ड में फरीदाबाद में Budhiya Nallah से पहले BOD 70 mg/l और उसके बाद 76 mg/l दर्ज किया गया था। पलवल में Gaunchi Drain से पहले BOD 21 mg/l और बाद में 28 mg/l दर्ज हुआ।

हालांकि, इन आंकड़ों को एक ही दिन की लगातार जांच मानना सही नहीं होगा। अलग-अलग मॉनिटरिंग रिपोर्ट अलग समय की हैं, इसलिए इनका इस्तेमाल प्रदूषण के हॉटस्पॉट समझने के लिए किया जाना चाहिए, न कि एक ही समय की सीधी तुलना के तौर पर।

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Palwal में Gaunchi Drain के बाद क्या तस्वीर सामने आती है?

यमुना के Palwal हिस्से में Gaunchi Drain एक महत्वपूर्ण मॉनिटरिंग प्वाइंट है। उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड में इस ड्रेन के मिलने से पहले और बाद में पानी की गुणवत्ता की जांच की गई है।

पुराने सरकारी मॉनिटरिंग रिकॉर्ड में भी Gaunchi Drain के बाद BOD और faecal coliform के स्तर में बदलाव दर्ज किया गया है। 2023 के एक रिकॉर्ड में ड्रेन से पहले यमुना का BOD 45 mg/l और बाद में 41 mg/l दर्ज था, जबकि faecal coliform क्रमश: 8400 और 6700 MPN/100 ml था। इससे यह भी साफ होता है कि हर sampling में प्रदूषण का स्तर एक ही दिशा में नहीं बढ़ता; इसलिए किसी एक आंकड़े से पूरी नदी की स्थिति का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।

BOD ज्यादा होना क्यों चिंता की बात है?

BOD यानी Biochemical Oxygen Demand पानी में मौजूद जैविक पदार्थों को विघटित करने के लिए सूक्ष्मजीवों द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली ऑक्सीजन की मांग को दर्शाता है। सामान्य तौर पर BOD जितना अधिक होता है, पानी में जैविक प्रदूषण का स्तर उतना अधिक माना जाता है।

हालिया रिपोर्ट में जिन नमूनों का उल्लेख किया गया है, उनमें कई जगह BOD 3 mg/l के bathing-water benchmark से ऊपर पाया गया है।

इसका मतलब यह नहीं है कि हर स्थान पर यमुना का पानी एक जैसा प्रदूषित है। नदी की स्थिति स्थान, मौसम, पानी के बहाव और उसमें मिलने वाले नालों के आधार पर बदल सकती है।

नालों और सीवेज का कितना असर?

यमुना की स्थिति को समझने में सीवेज और नालों की भूमिका अहम है। हरियाणा की यमुना एक्शन प्लान से संबंधित सरकारी दस्तावेजों में नदी के प्रदूषित हिस्से और यमुना में मिलने वाले विभिन्न नालों की मॉनिटरिंग दर्ज है।

यानी समस्या सिर्फ नदी के पानी की नहीं है। शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों से निकलने वाले अपशिष्ट और सीवेज को पर्याप्त रूप से उपचारित करके नदी तक पहुंचने से रोकना भी बड़ी चुनौती है।

सरकार प्रदूषण कम करने के लिए क्या कर रही है?

हरियाणा सरकार की ओर से यमुना की सफाई और सीवेज प्रबंधन को लेकर अलग-अलग परियोजनाओं पर काम किया जा रहा है। हालिया समीक्षा में सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP), कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (CETP), गांवों की सीवेज व्यवस्था, ठोस कचरा प्रबंधन और जल स्रोतों के पुनरुद्धार जैसे मुद्दों की समीक्षा की गई है।

इसलिए यमुना की मौजूदा स्थिति को केवल “प्रदूषण बढ़ रहा है” तक सीमित करना पूरी तस्वीर नहीं होगी। एक तरफ मॉनिटरिंग आंकड़े कई जगह खराब पानी की स्थिति दिखाते हैं, वहीं दूसरी तरफ सरकार सीवेज और जल प्रबंधन से जुड़ी परियोजनाओं पर काम कर रही है।

आंकड़ों से क्या तस्वीर सामने आती है?

उपलब्ध सरकारी रिकॉर्ड और हालिया रिपोर्टों को साथ रखकर देखें तो हरियाणा में यमुना की स्थिति पूरे नदी मार्ग पर एक जैसी नहीं है। कई मॉनिटरिंग प्वाइंट पर पानी की गुणवत्ता निर्धारित मानकों से खराब पाई गई है और नालों व सीवेज का प्रबंधन बड़ी चुनौती बना हुआ है।

अब सबसे अहम बात यह होगी कि जिन स्रोतों की पहचान हो चुकी है, वहां उपचार व्यवस्था कितनी प्रभावी होती है और आने वाले मॉनिटरिंग आंकड़ों में इसका कितना असर दिखाई देता है।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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