हरियाणा में अब जानकारी के लिए RTI लगाने की नहीं पड़ेगी जरूरत, ये 17 से अधिक ये महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक करने के आदेश
हरियाणा में RTI धारा 4 के तहत विभागों को बजट, सब्सिडी, वेतन और दूसरी तय जानकारी वेबसाइट पर सार्वजनिक और अपडेट रखने के आदेश दिए गए हैं।

लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा में सरकारी विभागों से जुड़ी कई ऐसी जानकारियों के लिए लोगों को बार-बार आरटीआई लगाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिन्हें कानून पहले ही सार्वजनिक करने को कहता है। मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को आरटीआई अधिनियम की धारा 4 का सख्ती से पालन कराने और तय सूचनाएं संबंधित विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। इनमें विभाग का बजट, योजनाएं, सब्सिडी, अधिकारियों-कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक, नियम, फैसला लेने की प्रक्रिया और परमिट-रियायत से जुड़ी जानकारी शामिल है।
हालांकि इसका मतलब आरटीआई व्यवस्था खत्म होना नहीं है। बिना आवेदन के केवल वही सूचनाएं सार्वजनिक होंगी जिन्हें धारा 4 के तहत विभाग को खुद प्रकाशित करना जरूरी है। किसी खास फाइल, आवेदन, कार्रवाई रिपोर्ट या दूसरी रिकॉर्ड आधारित जानकारी के लिए जरूरत पड़ने पर पहले की तरह आरटीआई लगाई जा सकेगी।
RTI धारा 4 क्या है?
आरटीआई अधिनियम की धारा 4 सरकारी विभागों और दूसरे सार्वजनिक प्राधिकरणों पर यह जिम्मेदारी डालती है कि वे अपने कामकाज से जुड़ी कई महत्वपूर्ण जानकारियां नागरिक के मांगने से पहले ही सार्वजनिक करें।
कानून की धारा 4(2) का उद्देश्य साफ है कि विभाग नियमित अंतराल पर ज्यादा से ज्यादा जानकारी खुद सार्वजनिक करें, ताकि लोगों को सूचना लेने के लिए आरटीआई कानून का कम से कम सहारा लेना पड़े।
हरियाणा राज्य सूचना आयोग ने इसी प्रावधान को लेकर 22 जून 2026 को शिकायत केस नंबर 603/2024 में आदेश दिया था। इसके बाद मुख्य सचिव कार्यालय की प्रशासनिक सुधार शाखा ने 27 अगस्त को संबंधित अधिकारियों को अनुपालन के निर्देश जारी किए।
वेबसाइट पर सार्वजनिक करनी होंगी ये महत्वपूर्ण जानकारियां
आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(बी) में अलग-अलग श्रेणियों की जानकारी सार्वजनिक करने का प्रावधान है।
इनमें मुख्य रूप से—
- विभाग का संगठन, काम और जिम्मेदारियां
- अधिकारियों और कर्मचारियों की शक्तियां और कर्तव्य
- फैसला लेने की पूरी प्रक्रिया
- निगरानी और जवाबदेही की व्यवस्था
- कामकाज के तय मानक
- नियम, रेगुलेशन, निर्देश, मैनुअल और रिकॉर्ड
- विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों की श्रेणियां
- नीति निर्माण में जनता से परामर्श की व्यवस्था
- बोर्ड, परिषद और समितियों की जानकारी
- अधिकारियों और कर्मचारियों की डायरेक्टरी
- अधिकारियों-कर्मचारियों का मासिक पारिश्रमिक
- विभाग और उसकी एजेंसियों का बजट
- योजनाओं का प्रस्तावित खर्च और राशि वितरण की रिपोर्ट
- सब्सिडी कार्यक्रम, आवंटित राशि और लाभार्थियों का विवरण
- रियायत, परमिट और अनुमति पाने वालों का विवरण
- इलेक्ट्रॉनिक रूप में उपलब्ध जानकारी
- सूचना प्राप्त करने की सुविधा और जन सूचना अधिकारी की जानकारी
शामिल है।
इसका सीधा फायदा यह है कि किसी विभाग का बजट या वहां लागू नियम देखने के लिए नागरिक को पहले यह जांचना चाहिए कि जानकारी विभाग की वेबसाइट पर धारा 4 के सेक्शन में पहले से उपलब्ध तो नहीं है।
अफसरों की सैलरी में क्या-क्या सार्वजनिक होगा?
यहां “अफसरों की सैलरी सार्वजनिक” होने का मतलब किसी कर्मचारी के बैंक खाते या निजी वित्तीय रिकॉर्ड को सार्वजनिक करना नहीं है।
आरटीआई अधिनियम की धारा 4(1)(बी)(x) में प्रत्येक अधिकारी और कर्मचारी को मिलने वाले मासिक पारिश्रमिक और लागू मुआवजा व्यवस्था के प्रकाशन का प्रावधान है।
हरियाणा लोक भवन की वेबसाइट इसका मौजूदा उदाहरण है। वहां आरटीआई सेक्शन में अलग-अलग पदों के पे-स्केल और सातवें वेतन आयोग के अनुसार पे-मैट्रिक्स की जानकारी सार्वजनिक है। उसी पेज पर 2026-27 का बजट भी दिया गया है।
यानी आदेश पूरी तरह नई व्यवस्था बनाने का नहीं है, बल्कि सभी संबंधित विभागों से पहले से मौजूद कानूनी जिम्मेदारी का लगातार और सही पालन कराने का है।
बजट से सब्सिडी लाभार्थियों तक क्या देख सकेंगे?
कानून में विभाग या उसकी एजेंसियों को आवंटित बजट के साथ योजनाओं, प्रस्तावित खर्च और राशि वितरण की रिपोर्ट सार्वजनिक करने का प्रावधान है।
इसी तरह सब्सिडी कार्यक्रम कैसे चलाया जाता है, उसके लिए कितनी राशि आवंटित है और उसके लाभार्थियों का विवरण भी धारा 4 में शामिल है। रियायत, परमिट या प्राधिकरण पाने वालों का तय विवरण भी इस दायरे में आता है।
हालांकि यहां भी वही जानकारी सार्वजनिक होगी जिसे कानून सार्वजनिक करने की अनुमति देता है। किसी व्यक्ति की संरक्षित निजी जानकारी स्वतः प्रकाशित करने का यह आदेश नहीं है।
RTI में क्या पूछ सकते हैं और क्या नहीं?
आरटीआई के जरिए वही सूचना मांगी जा सकती है जो किसी सरकारी या अन्य संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण के पास रिकॉर्ड के रूप में मौजूद है या उसके नियंत्रण में है।
इसमें रिकॉर्ड, दस्तावेज, मेमो, ई-मेल, आदेश, सर्कुलर, कॉन्ट्रैक्ट, रिपोर्ट और इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड जैसी जानकारी शामिल हो सकती है। नागरिक रिकॉर्ड का निरीक्षण और प्रमाणित कॉपी भी मांग सकता है।
लेकिन आरटीआई में हर जानकारी सार्वजनिक करना जरूरी नहीं है।
धारा 8 में राष्ट्रीय सुरक्षा, अदालत द्वारा रोकी गई सूचना, कुछ व्यापारिक गोपनीय जानकारी, जांच को प्रभावित करने वाली सूचना और कुछ निजी जानकारियों समेत अलग-अलग छूट दी गई हैं।
इसलिए मौजूदा हरियाणा आदेश को “अब हर सरकारी रिकॉर्ड इंटरनेट पर दिखाई देगा” समझना गलत होगा।
जनता पर असर डालने वाली नीति में तथ्य भी बताने होंगे
धारा 4 केवल अधिकारियों की डायरेक्टरी और बजट तक सीमित नहीं है।
कानून में यह भी प्रावधान है कि सरकार महत्वपूर्ण नीतियां बनाते समय या जनता को प्रभावित करने वाले फैसलों की घोषणा करते समय उससे जुड़े प्रासंगिक तथ्य सार्वजनिक करे।
इसके अलावा प्रशासनिक या अर्ध-न्यायिक फैसले से प्रभावित व्यक्ति को फैसले के कारण बताने का भी प्रावधान है।
यह हिस्सा आम आदमी के लिहाज से महत्वपूर्ण है क्योंकि पारदर्शिता का मतलब केवल पुराने रिकॉर्ड वेबसाइट पर डालना नहीं, बल्कि जनता को प्रभावित करने वाले फैसलों का आधार भी स्पष्ट करना है।
एक विभाग की कई शाखाओं में जानकारी है तो SPIO जिम्मेदारी से नहीं बच सकेगा
राज्य सूचना आयोग के जिस केस से मौजूदा निर्देश निकले हैं, उसमें एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई।
मांगी गई सूचना अगर किसी विभाग की कई अलग-अलग शाखाओं या विंग में मौजूद है तो नामित राज्य जन सूचना अधिकारी केवल यह कहकर अपनी जिम्मेदारी से नहीं बच सकता कि पूरी सूचना उसके पास नहीं है।
आयोग के अनुसार संबंधित शाखाओं से जानकारी जुटाकर आवेदक को समेकित और बिंदुवार जवाब देना चाहिए। दैनिक ट्रिब्यून ने आयोग के आदेश के इस हिस्से को विस्तार से रिपोर्ट किया है।
यह तथ्य मूल सरकारी प्रेस रिलीज के संक्षिप्त विवरण से आगे जाता है और आरटीआई लगाने वाले व्यक्ति के लिए सीधे उपयोगी है।
सरकारी वेबसाइट पर जानकारी कहां देखें?
हर विभाग की वेबसाइट की बनावट एक जैसी नहीं है, लेकिन आमतौर पर आरटीआई, धारा 4, प्रोएक्टिव डिस्क्लोजर या स्वप्रेरित प्रकटीकरण जैसा सेक्शन तलाशना चाहिए।
उदाहरण के तौर पर हरियाणा स्कूल शिक्षा विभाग की वेबसाइट पर धारा 4 के तहत अलग से सेक्शन मौजूद है। वहां बजट आवंटन, मासिक पारिश्रमिक, अधिकारी-कर्मचारी डायरेक्टरी, सब्सिडी प्रोग्राम, परमिट-रियायत और नागरिकों के लिए उपलब्ध सूचना सुविधाओं जैसी अलग-अलग श्रेणियां दी गई हैं।
इसी तरह हरियाणा लोक भवन की वेबसाइट पर बजट, पे-स्केल, पीआईओ और दूसरी धारा 4 की जानकारी एक ही आरटीआई सेक्शन में देखी जा सकती है।
इससे यह भी साफ होता है कि नए निर्देश का असली असर तभी होगा जब बाकी विभाग भी अपनी जानकारी इसी तरह आसानी से खोजने योग्य और अपडेटेड रखें।
पुरानी जानकारी वेबसाइट पर छोड़ देने से नहीं चलेगा काम
मुख्य सचिव के निर्देश में केवल दस्तावेज वेबसाइट पर अपलोड करने की बात नहीं कही गई है।
सभी सार्वजनिक प्राधिकरणों को उपलब्ध जानकारी की समय-समय पर समीक्षा, अपडेट और मेंटेन करना होगा, ताकि नागरिक को वर्तमान और सही जानकारी मिले।
यानी कई साल पुरानी अधिकारी सूची, पिछला बजट या बंद हो चुकी योजना की जानकारी रखकर विभाग धारा 4 के लगातार अनुपालन की जिम्मेदारी पूरी नहीं मान सकता।
हरियाणा में ऑनलाइन RTI कैसे लगाएं?
अगर जरूरी सूचना विभाग की वेबसाइट पर नहीं मिलती तो हरियाणा सरकार के ऑनलाइन आरटीआई पोर्टल से आवेदन और प्रथम अपील की जा सकती है।
पोर्टल केवल भारतीय नागरिकों के लिए है और हरियाणा सरकार के विभागों तथा सार्वजनिक प्राधिकरणों से संबंधित आवेदन ऑनलाइन दाखिल किए जा सकते हैं।
ऑनलाइन आवेदन के लिए पहले नागरिक रजिस्ट्रेशन करना होता है। इसके बाद संबंधित सार्वजनिक प्राधिकरण चुनकर मांगी गई सूचना का विवरण भरा जा सकता है।
सामान्य श्रेणी के आवेदक के लिए ऑनलाइन आरटीआई आवेदन शुल्क 10 रुपये है। बीपीएल श्रेणी के आवेदक से आवेदन शुल्क नहीं लिया जाता। ऑनलाइन भुगतान इंटरनेट बैंकिंग, कार्ड या यूपीआई जैसे माध्यम से किया जा सकता है।
अगर जिला या मंडल स्तर के कार्यालय से सूचना चाहिए तो हरियाणा पोर्टल नागरिकों को संबंधित मुख्यालय या निदेशालय चुनने की सलाह देता है।
RTI का जवाब कितने दिन में मिलता है?
सामान्य मामलों में आरटीआई आवेदन पर सूचना देने की समय सीमा 30 दिन है। अगर मामला किसी व्यक्ति के जीवन या स्वतंत्रता से जुड़ा है तो सूचना 48 घंटे के भीतर उपलब्ध कराने का प्रावधान है।
हरियाणा सरकार ने 1 सितंबर को ऑनलाइन आरटीआई आवेदनों को लेकर अलग से भी सख्त निर्देश जारी किए हैं।
सभी प्रशासनिक सचिवों और विभागाध्यक्षों को ऑनलाइन आवेदनों की नियमित मॉनिटरिंग कराने को कहा गया है। राज्य सूचना आयोग ने साफ किया है कि ऑनलाइन आवेदन बिना कार्रवाई पड़ा रहता है तो उसे मानी गई अस्वीकृति माना जा सकता है। संबंधित एसपीआईओ भविष्य में यह बहाना भी नहीं बना सकेगा कि ऑनलाइन आवेदन उसकी जानकारी में नहीं आया था।
यानी राज्य में एक तरफ धारा 4 के जरिए ज्यादा जानकारी बिना आवेदन वेबसाइट पर देने के निर्देश हैं और दूसरी तरफ जहां आरटीआई लगानी पड़े, वहां ऑनलाइन आवेदन को समय पर निपटाने की जिम्मेदारी भी तय की जा रही है।
30 दिन में जवाब न मिले तो आगे क्या होगा?
समय सीमा में सूचना नहीं मिलने या जवाब से संतुष्ट नहीं होने पर नागरिक प्रथम अपील कर सकता है। हरियाणा का ऑनलाइन पोर्टल आरटीआई आवेदन के साथ प्रथम अपील की सुविधा भी देता है।
मौजूदा हरियाणा पोर्टल पर दूसरी अपील ऑनलाइन दाखिल करने की सुविधा अभी उपलब्ध नहीं बताई गई है। पोर्टल के अनुसार दूसरी अपील राज्य सूचना आयोग के सामने निर्धारित प्रक्रिया से मैनुअल तरीके से दाखिल करनी होती है।
आम आदमी के लिए इस आदेश का असली मतलब
अब सबसे पहले किसी सरकारी जानकारी के लिए आरटीआई फॉर्म भरने की बजाय संबंधित विभाग की वेबसाइट पर धारा 4 वाला सेक्शन देखना उपयोगी होगा।
अगर आपको विभाग का बजट, नियम, अधिकारियों की डायरेक्टरी, पे-स्केल, योजनाओं का खर्च, सब्सिडी कार्यक्रम या पीआईओ जैसी जानकारी चाहिए और वह धारा 4 में आती है तो विभाग को उसे खुद सार्वजनिक और अपडेट रखना है।
लेकिन अगर मामला आपके किसी खास आवेदन पर हुई कार्रवाई, किसी विशेष फाइल की कॉपी, रिकॉर्ड या ऐसी सूचना का है जो स्वतः प्रकाशित होने वाली सूची में नहीं आती, तो आरटीआई का अधिकार पहले की तरह बना रहेगा।
इसलिए हरियाणा में आरटीआई की जरूरत पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। बदलाव यह है कि जिन सूचनाओं को कानून पहले से सार्वजनिक करने को कहता है, उनके लिए नागरिक को बार-बार आरटीआई लगाने की नौबत कम होनी चाहिए।








