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हरियाणा में नया वोटर कार्ड बनवाना है या बदलना है पता, फोटो, नंबर, या गलती करवानी है सही, यहां जाने पूरी जानकारी

हरियाणा में वोटर कार्ड बनवाने और सुधार के लिए 30 सितंबर तक मौका है। जानें फॉर्म-6, 7, 8, जरूरी डॉक्यूमेंट, शादी के बाद पता बदलने और वोट शिफ्ट करने का तरीका।

हरियाणा वोटर कार्ड 2026 पूरी जानकारी
हरियाणा वोटर कार्ड 2026 पूरी जानकारी

चंडीगढ़, 3 सितंबर। हरियाणा में वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर-2026 के तहत नए वोटर बनने, छूटा नाम जुड़वाने, पता बदलने और वोटर लिस्ट में गलत जानकारी ठीक करवाने का अभियान चल रहा है। चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 30 सितंबर 2026 कर दी है। इनका निपटारा 28 अक्टूबर तक होगा और हरियाणा की फाइनल वोटर लिस्ट 6 नवंबर को प्रकाशित की जाएगी।

प्रदेश में अभियान को लेकर बड़ी संख्या में आवेदन आ रहे हैं। 29 अगस्त तक नया नाम जुड़वाने के लिए 87,262 फॉर्म-6, नाम हटाने या आपत्ति के 6,167 फॉर्म-7 और सुधार या पता बदलने के 79,246 फॉर्म-8 मिल चुके थे। चुनाव आयोग ने नागरिकों से कहा है कि अंतिम तारीख का इंतजार करने के बजाय अपने और परिवार के सभी पात्र सदस्यों का नाम व विवरण अभी चेक कर लें।

नए वोटरों के साथ सबसे ज्यादा परेशानी उन लोगों को होती है जिनका वोट पहले किसी दूसरे गांव या शहर में बना हुआ है, शादी के बाद पता बदल गया है या वोटर कार्ड पर नाम, उम्र और फोटो गलत है। ऐसे में सबसे जरूरी है कि सही काम के लिए सही फॉर्म भरा जाए।

Table of Contents

वोटर कार्ड के लिए फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 में क्या फर्क है?

चुनाव आयोग के मौजूदा नियमों में तीनों फॉर्म के काम अलग हैं।

आपको क्या करवाना हैकौन-सा फॉर्म भरें
पहली बार वोटर बनना हैफॉर्म-6
ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नाम नहीं आयाफॉर्म-6
पुराने पते से नए पते पर वोट शिफ्ट करना हैफॉर्म-8
नाम, उम्र, जन्मतिथि, फोटो या दूसरी जानकारी ठीक करनी हैफॉर्म-8
वोटर कार्ड खो गया या खराब हो गयाफॉर्म-8
अपना डुप्लीकेट वोट हटवाना हैफॉर्म-7
मृत या स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके व्यक्ति के नाम पर आपत्तिफॉर्म-7

सबसे बड़ी गलती पुराने पते पर वोट बने होने के बावजूद दूसरी जगह नया फॉर्म-6 भरना है। अगर व्यक्ति पहले से वोटर है और केवल पता बदला है तो फॉर्म-8 से वोट शिफ्ट कराया जाना चाहिए।

नया वोटर कार्ड कौन बनवा सकता है?

भारतीय नागरिक जो संबंधित क्षेत्र में सामान्य रूप से रहता है और तय पात्रता तारीख पर 18 वर्ष का हो चुका है, वह वोटर बनने के लिए आवेदन कर सकता है।

अब साल में केवल 1 जनवरी ही पात्रता तारीख नहीं है। चुनाव आयोग के अनुसार 1 जनवरी, 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर चार पात्रता तारीख हैं। आने वाले महीनों में 18 वर्ष पूरे करने वाले युवा भी एडवांस में फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं।

हरियाणा के मौजूदा एसआईआर में जिन पात्र युवाओं का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है, वे जरूरी दस्तावेज और घोषणा-पत्र के साथ फॉर्म-6 भर सकते हैं।

नया वोटर कार्ड बनवाने के लिए कौन-कौन से डॉक्यूमेंट चाहिए?

नए वोटर के लिए मुख्य रूप से फोटो, उम्र का प्रमाण और मौजूदा पते का प्रमाण चाहिए।

पते के प्रमाण के तौर पर इनमें से कोई एक डॉक्यूमेंट दिया जा सकता है—

  • आधार कार्ड
  • कम से कम एक साल पुराना बिजली, पानी या गैस कनेक्शन बिल
  • बैंक या पोस्ट ऑफिस की मौजूदा पासबुक
  • भारतीय पासपोर्ट
  • जमीन का रिकॉर्ड या किसान बही
  • रजिस्टर्ड किरायानामा
  • मकान की रजिस्टर्ड सेल डीड

अच्छी बात यह है कि एड्रेस प्रूफ केवल आवेदक के नाम होना जरूरी नहीं है। उसी पते पर पहले से वोटर बने माता-पिता, पति-पत्नी या वयस्क बच्चे के नाम का निर्धारित एड्रेस प्रूफ भी लगाया जा सकता है।

अगर निर्धारित सूची वाला कोई एड्रेस डॉक्यूमेंट उपलब्ध नहीं है तो दूसरे प्रमाण का विकल्प भी दिया गया है। ऐसे मामलों में फील्ड वेरिफिकेशन किया जा सकता है।

पहले से वोटर कार्ड बना है, अब दूसरे गांव या शहर में रहते हैं तो क्या करें?

अगर वोट पहले से बना है और व्यक्ति अब दूसरे गांव, शहर या विधानसभा क्षेत्र में रहने लगा है तो उसे पुराने वोट को अलग से कटवाकर नया फॉर्म-6 भरने की जरूरत नहीं है।

इसके लिए फॉर्म-8 में शिफ्टिंग ऑफ रेजिडेंस का विकल्प है।

आवेदन मंजूर होने के बाद पुराने पते से नाम हटाकर मौजूदा पते की वोटर लिस्ट में शिफ्ट किया जाता है। साथ ही नए पते वाला रिप्लेसमेंट वोटर कार्ड जारी किया जा सकता है।

याद रखने का आसान तरीका है—

पहली बार वोट बन रहा है = फॉर्म-6

पहले वोट बना है, केवल पता बदला है = फॉर्म-8

शादी के बाद महिला का वोटर कार्ड कैसे बदलेगा?

शादी के बाद यह सवाल बहुत आम है कि पहले मायके का वोट कटवाएं या ससुराल के पते पर नया वोट बनवाएं।

अगर महिला का वोट पहले से मायके के पते पर बना है और अब वह ससुराल में सामान्य रूप से रहने लगी है तो उसे नया फॉर्म-6 नहीं भरना चाहिए। फॉर्म-8 से पुराने पते वाला वोट नए पते पर शिफ्ट कराया जा सकता है।

नए पते के प्रमाण में पति के नाम का निर्धारित एड्रेस प्रूफ भी लगाया जा सकता है, अगर पति उसी पते पर पहले से वोटर है।

अगर शादी के बाद नाम या सरनेम भी बदलना है तो फॉर्म-8 के जरिए नाम में सुधार के लिए आवेदन किया जा सकता है।

वहीं अगर महिला का पहले कभी वोट बना ही नहीं था तो वह अपने मौजूदा निवास स्थान से फॉर्म-6 के जरिए पहली बार वोटर बनने के लिए आवेदन करेगी।

शादी के बाद पहले वोट कटवाना जरूरी है?

अगर पुराना वोट पहले से बना है और केवल निवास बदला है तो आम तौर पर पहले फॉर्म-7 से वोट कटवाने और फिर नया फॉर्म-6 भरने की जरूरत नहीं है।

फॉर्म-8 में ही यह घोषणा होती है कि व्यक्ति ने निवास बदला है और वह चाहता है कि उसका नाम पिछले पते से हटाकर मौजूदा पते पर शिफ्ट किया जाए।

इससे एक ही व्यक्ति के दो अलग-अलग जगह वोट बनने की समस्या से बचा जा सकता है।

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अगर दो जगह वोट बन गया है तो क्या करें?

एक व्यक्ति का नाम एक से ज्यादा जगह वोटर लिस्ट में नहीं होना चाहिए।

अगर पुराने और नए दोनों पते पर नाम दिखाई दे रहा है तो डुप्लीकेट एंट्री हटवाने के लिए फॉर्म-7 के जरिए आवेदन या आपत्ति दर्ज की जा सकती है। चुनाव आयोग ने फॉर्म-7 को वोटर लिस्ट से नाम हटाने या किसी नाम पर आपत्ति के लिए रखा है।

वोटर कार्ड में नाम, उम्र, फोटो या पता गलत है तो क्या करें?

इसके लिए फॉर्म-8 भरना है।

फॉर्म-8 से वोटर लिस्ट में मौजूद जानकारी में सुधार, पता बदलना, वोटर कार्ड का रिप्लेसमेंट और दिव्यांग मतदाता की मार्किंग जैसे काम किए जा सकते हैं।

यानी नाम की स्पेलिंग गलत है, जन्मतिथि गलत है, फोटो बदलनी है या पता अपडेट करना है तो नया वोट बनवाने की जरूरत नहीं है।

वोटर कार्ड खो गया है तो नया कैसे मिलेगा?

अगर वोटर कार्ड खो गया या खराब हो गया है तो भी नया वोट बनाने की जरूरत नहीं है।

फॉर्म-8 में रिप्लेसमेंट ईपीआईसी का विकल्प है। खोए हुए कार्ड के मामले में चुनाव आयोग की गाइडलाइन में एफआईआर या पुलिस रिपोर्ट की कॉपी देने का प्रावधान है। खराब कार्ड के मामले में पुराना कार्ड वापस किया जा सकता है।

ऑनलाइन आवेदन की स्थिति भी वोटर्स सर्विस पोर्टल पर चेक की जा सकती है।

हरियाणा की वोटर लिस्ट में नाम नहीं आया तो क्या करें?

अगर कोई पात्र नागरिक हरियाणा की एसआईआर-2026 ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में अपना नाम नहीं देख पा रहा है तो वह 30 सितंबर तक फॉर्म-6 के जरिए दावा कर सकता है।

इसके साथ जरूरी दस्तावेज और घोषणा-पत्र देना होगा। चुनाव आयोग का मौजूदा वोटर्स सर्विस पोर्टल एसआईआर-2026 के लिए फॉर्म और नोटिस के खिलाफ डॉक्यूमेंट जमा करने की सुविधा भी दिखा रहा है।

अंतिम तारीख का इंतजार करना ठीक नहीं है, क्योंकि आवेदन के बाद दस्तावेज और पात्रता का वेरिफिकेशन भी होता है।

30 सितंबर के बाद वोटर कार्ड नहीं बनेगा?

नहीं। यह एक जरूरी भ्रम है।

30 सितंबर 2026 मौजूदा हरियाणा एसआईआर के तहत दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की संशोधित आखिरी तारीख है।

इसका मतलब यह नहीं है कि इसके बाद जिंदगी भर नया वोट नहीं बन सकेगा। मतदाता सूची में लगातार अपडेट की व्यवस्था रहती है।

लेकिन जो व्यक्ति मौजूदा एसआईआर के बाद प्रकाशित होने वाली 6 नवंबर की फाइनल वोटर लिस्ट में अपना सही रिकॉर्ड चाहता है, उसके लिए 30 सितंबर महत्वपूर्ण तारीख है।

30 सितंबर, 28 अक्टूबर और 6 नवंबर की तारीखों का क्या मतलब है?

हरियाणा में एसआईआर-2026 का ताजा संशोधित शेड्यूल इस प्रकार है—

प्रक्रियातारीख
दावे और आपत्तियां दर्ज कराने की आखिरी तारीख30 सितंबर 2026
दावे-आपत्तियों का निपटारा28 अक्टूबर 2026 तक
फाइनल वोटर लिस्ट का प्रकाशन6 नवंबर 2026

यह कार्यक्रम पूरे हरियाणा के लिए है। हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारी ए. श्रीनिवास ने भी प्रदेश स्तर पर यही संशोधित तारीखें जारी की हैं।

कहीं 30 अगस्त की तारीख दिख रही है तो कौन-सी तारीख सही मानें?

यह सवाल अभी कई वोटरों के लिए महत्वपूर्ण हो सकता है।

हरियाणा के एसआईआर का पहले वाला शेड्यूल 30 अगस्त तक दावे और आपत्तियां लेने का था। बाद में भारत निर्वाचन आयोग ने तारीख बढ़ा दी।

इसलिए सीईओ हरियाणा की वेबसाइट के कुछ पुराने पेज या पहले जारी जिला नोटिस अभी भी 30 अगस्त दिखा सकते हैं। लेकिन सबसे नया संशोधित आधिकारिक कार्यक्रम 30 सितंबर 2026 तक दावे-आपत्तियां लेने का है।

इसी संशोधन के बाद फाइनल वोटर लिस्ट की तारीख भी 3 अक्टूबर से बदलकर 6 नवंबर हो गई है।

परिवार के सभी वोटर का नाम भी चेक करना जरूरी

चुनाव विभाग ने लोगों से केवल अपना नाम देखने के बजाय परिवार के सभी पात्र सदस्यों का रिकॉर्ड चेक करने को कहा है।

खासकर परिवार में किसी युवा की उम्र 18 वर्ष हो चुकी है, किसी महिला की हाल में शादी हुई है, कोई सदस्य दूसरे शहर में शिफ्ट हुआ है या परिवार में किसी की मृत्यु हुई है तो वोटर लिस्ट को जरूर जांचना चाहिए।

नाम छूटा है तो फॉर्म-6, गलत जानकारी है तो फॉर्म-8 और मृत, डुप्लीकेट या स्थायी रूप से दूसरी जगह चले गए व्यक्ति के नाम को लेकर फॉर्म-7 का इस्तेमाल किया जा सकता है।

किराये के मकान में रहते हैं तो क्या वहां वोट बन सकता है?

हां, वोट बनाने के लिए मकान का मालिक होना जरूरी नहीं है।

अगर कोई व्यक्ति किसी पते पर सामान्य रूप से रहता है तो वह उस पते से वोटर बनने के लिए आवेदन कर सकता है। रजिस्टर्ड किरायानामा भी मान्य एड्रेस प्रूफ की सूची में शामिल है।

छात्र भी पात्रता पूरी होने पर माता-पिता के पते या उस हॉस्टल/मेस में वोट बनवा सकते हैं जहां वे सामान्य रूप से रह रहे हैं।

आधार कार्ड जरूरी है या आधार के बिना भी वोट बन सकता है?

फॉर्म में आधार की जानकारी देने का विकल्प मौजूद है, लेकिन यदि व्यक्ति के पास आधार नंबर नहीं है तो उसके लिए भी अलग विकल्प दिया गया है।

इसलिए केवल आधार न होने के कारण पात्र व्यक्ति को वोटर बनने का आवेदन छोड़ नहीं देना चाहिए।

हाथ में वोटर कार्ड है तो क्या वोटर लिस्ट में नाम होना जरूरी है?

हां। चुनाव में वोट डालने के लिए सबसे जरूरी है कि मतदाता का नाम वोटर लिस्ट में हो।

केवल पुराना वोटर कार्ड हाथ में होने से मतदान का अधिकार अपने आप नहीं मिल जाता। चुनाव आयोग भी साफ कहता है कि वोट तभी डाला जा सकता है जब नाम मतदाता सूची में दर्ज हो।

इसी वजह से मौजूदा एसआईआर के दौरान पुराने वोटर कार्ड वाले लोगों को भी अपना नाम एक बार जरूर चेक करना चाहिए।

वोटर लिस्ट में नाम और आवेदन का स्टेटस कैसे चेक करें?

चुनाव आयोग के वोटर्स सर्विस पोर्टल पर मतदाता अपना रिकॉर्ड देख सकते हैं। आवेदन करने के बाद मिले रेफरेंस नंबर से फॉर्म का स्टेटस भी ऑनलाइन चेक किया जा सकता है।

एसआईआर-2026 के लिए पुराने एसआईआर रिकॉर्ड में नाम खोजने और नोटिस मिलने पर दस्तावेज जमा करने की सुविधा भी चुनाव आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध है।

बीएलओ कौन है और उससे कैसे संपर्क करें?

अगर ऑनलाइन आवेदन समझ नहीं आ रहा, डॉक्यूमेंट को लेकर भ्रम है या वोटर लिस्ट में नाम नहीं मिल रहा है तो अपने क्षेत्र के बीएलओ, ईआरओ या एईआरओ से संपर्क किया जा सकता है।

हरियाणा निर्वाचन विभाग के मुताबिक मतदाता 1950 हेल्पलाइन से भी जानकारी ले सकते हैं। इसके अलावा ईसीआईनेट ऐप में ‘बुक ए कॉल’ की सुविधा उपलब्ध है।

फॉर्म भरने के बाद क्या होता है?

फॉर्म जमा होते ही वोट बन जाना तय नहीं है।

आवेदन मिलने के बाद चुनाव विभाग उसकी जांच करता है। जरूरत पड़ने पर बीएलओ फील्ड वेरिफिकेशन कर सकता है और दस्तावेजों की जांच की जा सकती है।

इसी प्रक्रिया के चलते हरियाणा में दावे-आपत्तियां 30 सितंबर तक लेने के बाद उनके निपटारे के लिए 28 अक्टूबर तक का समय रखा गया है। इसके बाद 6 नवंबर को फाइनल वोटर लिस्ट आएगी।

नया वोटर आवेदन करते समय किन गलतियों से बचें?

सबसे पहले यह चेक करें कि आपका नाम पहले से किसी वोटर लिस्ट में तो नहीं है। अगर वोट बना हुआ है और केवल पता बदला है तो फॉर्म-6 की जगह फॉर्म-8 भरें।

नाम हिंदी और अंग्रेजी दोनों में ध्यान से चेक करें। चुनाव आयोग की गाइडलाइन के अनुसार केवल एक भाषा में नाम भरने पर सिस्टम दूसरी भाषा में अपने आप नाम बदल सकता है, जिससे स्पेलिंग की गलती होने की संभावना रहती है।

पता पूरा भरें, सही पिन कोड दें और ऐसा मोबाइल नंबर दें जो चालू हो। आवेदन के बाद मिलने वाला रेफरेंस नंबर भी संभालकर रखें।

अभी हरियाणा के वोटरों को क्या करना चाहिए?

अगर परिवार में किसी की उम्र 18 वर्ष हो चुकी है तो उसका नाम चेक करें। पहली बार वोट बनना है तो फॉर्म-6 भरें।

शादी, नौकरी या दूसरे कारण से पता बदल गया है तो फॉर्म-8 से वोट शिफ्ट करें।

वोटर लिस्ट में नाम, उम्र, फोटो या पता गलत है तो फॉर्म-8 से सुधार करवाएं।

डुप्लीकेट, मृत या स्थायी रूप से स्थानांतरित वोटर की एंट्री पर फॉर्म-7 से आपत्ति की जा सकती है।

सबसे जरूरी बात यह है कि 30 सितंबर की आखिरी तारीख का इंतजार न करें। आवेदन में कोई दस्तावेज कम हुआ या वेरिफिकेशन की जरूरत पड़ी तो उसे पूरा करने के लिए समय मिल सकेगा।

लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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