हरियाणा की दयालु-2 योजना में 5 लाख तक मदद, कुत्ते के काटने पर भी मिलेगा मुआवजा; जानें पूरे नियम
हरियाणा की दयालु-2 योजना में कुत्ते के काटने और आवारा पशु से दुर्घटना पर आर्थिक मदद मिलती है। जानें मुआवजा, पात्रता, दस्तावेज और 90 दिन में आवेदन का नियम।

लोकल हरियाणा, गुरुग्राम, 3 सितंबर। हरियाणा में कुत्ते के काटने या आवारा पशु के हमले और उससे हुई दुर्घटना में घायल होने, दिव्यांगता या मौत होने पर पीड़ित परिवार को सरकार से आर्थिक मदद मिल सकती है। दयालु-2 योजना में गंभीर मामलों में उम्र के हिसाब से 1 लाख से 5 लाख रुपये तक सहायता का प्रावधान है, जबकि मामूली चोट और डॉग बाइट के लिए भी अलग मुआवजा तय किया गया है। आवेदन घटना के 90 दिन के अंदर करना जरूरी है।
गुरुग्राम में दीन दयाल उपाध्याय अंत्योदय परिवार सुरक्षा योजना यानी दयालु-2 के मामलों को लेकर जिला स्तरीय कमेटी की बैठक हुई। एसडीएम हितेंद्र कुमार की अध्यक्षता में 11 मामलों की जांच की गई, जिनमें दस्तावेज और सत्यापन रिपोर्ट देखने के बाद 3 पात्र मामलों में आर्थिक सहायता देने की मंजूरी दी गई।
बैठक में खास तौर पर कुत्ते के काटने के मामलों की मेडिकल रिपोर्ट पूरी तरह स्पष्ट बनाने के निर्देश दिए गए। डॉक्टरों से कहा गया कि चोट की गंभीरता के साथ कुत्ते के दांतों के निशानों की संख्या और घाव का पूरा विवरण दर्ज किया जाए, क्योंकि डॉग बाइट में मुआवजे की रकम तय करने में ये जानकारियां महत्वपूर्ण हैं।
दयालु-2 योजना क्या है और किन लोगों को मिलता है लाभ?
हरियाणा सरकार की दयालु-2 योजना उन मामलों में आर्थिक सहायता देने के लिए है, जहां किसी व्यक्ति की कुत्ते के काटने या आवारा पशु के कारण हुई दुर्घटना में चोट, दिव्यांगता या मौत हो जाती है।
2026 में जारी सरकारी जानकारी में गाय, बैल, सांड, गधा, कुत्ता, नीलगाय और भैंस जैसे आवारा पशुओं के साथ जंगली एवं परित्यक्त पशुओं से हुई घटनाओं को भी इसके दायरे में बताया गया है। लाभ लेने वाले व्यक्ति का हरियाणा निवासी होना और परिवार पहचान पत्र यानी पीपीपी होना जरूरी है।
यहां ध्यान रखना जरूरी है कि दयालु-2 को सामान्य सड़क दुर्घटना की योजना नहीं समझना चाहिए। इसका मौजूदा फोकस कुत्ते के काटने और पशुओं के कारण होने वाली दुर्घटनाओं पर है। हर तरह के एक्सीडेंट पर दयालु-2 का लाभ नहीं मिलता।
दयालु-2 योजना में कितने रुपये मिलते हैं?
मृत्यु या 70 प्रतिशत अथवा इससे अधिक दिव्यांगता की स्थिति में मौजूदा सरकारी जानकारी के अनुसार उम्र के आधार पर सहायता राशि तय होती है।
| पीड़ित की उम्र | आर्थिक सहायता |
|---|---|
| 12 वर्ष तक | 1 लाख रुपये |
| 12 से 18 वर्ष तक | 2 लाख रुपये |
| 18 से 25 वर्ष तक | 3 लाख रुपये |
| 25 से 45 वर्ष तक | 5 लाख रुपये |
| 45 वर्ष से अधिक | 3 लाख रुपये |
यानी दयालु-2 योजना में अधिकतम 5 लाख रुपये की मदद 25 से 45 वर्ष की उम्र वाले पात्र व्यक्ति की मृत्यु या गंभीर दिव्यांगता जैसे मामलों में मिल सकती है।
70 प्रतिशत से कम दिव्यांगता की स्थिति में सहायता दिव्यांगता के प्रतिशत और लागू मुआवजा प्रावधानों के अनुसार तय की जाती है।
कुत्ते के काटने पर कितना मुआवजा मिलता है?
दयालु-2 योजना की सबसे महत्वपूर्ण जानकारी डॉग बाइट से जुड़े मामलों की है। केवल मृत्यु या दिव्यांगता होने पर ही सहायता नहीं मिलती, बल्कि चोट के लिए भी मुआवजे का प्रावधान है।
सरकारी जानकारी के मुताबिक मामूली चोट पर न्यूनतम 10 हजार रुपये की मदद का प्रावधान है। वहीं कुत्ते के काटने पर प्रत्येक दांत के निशान के लिए 10 हजार रुपये और घाव के आकार के आधार पर भी सहायता तय की जा सकती है। सरकारी रिलीज में हर 0.2 सेंटीमीटर घाव के लिए न्यूनतम 20 हजार रुपये के प्रावधान की जानकारी दी गई है।
इसी वजह से गुरुग्राम प्रशासन ने डॉक्टरों से मेडिकल रिपोर्ट में दांतों के निशान और चोट की गंभीरता साफ-साफ दर्ज करने को कहा है।
डॉग बाइट के बाद मेडिकल रिपोर्ट में क्या जरूर होना चाहिए?
अगर कोई व्यक्ति कुत्ते के काटने पर मुआवजा हरियाणा की दयालु-2 योजना के तहत लेना चाहता है, तो केवल यह लिखी मेडिकल पर्ची कि “डॉग बाइट” हुआ है, कई मामलों में पर्याप्त जानकारी नहीं दे सकती।
मेडिकल और दूसरे रिकॉर्ड में चोट की जगह, घाव की गंभीरता, दांतों के निशान और इलाज से जुड़ी जानकारी स्पष्ट होनी चाहिए। सरकारी निर्देशों में कुत्ते के हमले का प्रमाण देने के लिए घाव की फोटो, फटे हुए कपड़ों और हमले से बने दूसरे निशानों की तस्वीरें भी उपयोगी दस्तावेजों में शामिल की गई हैं।
इसलिए घटना के तुरंत बाद इलाज करवाने के साथ मेडिकल रिकॉर्ड और उपलब्ध सबूत सुरक्षित रखना महत्वपूर्ण है।
दयालु-2 योजना के लिए कौन-कौन से दस्तावेज चाहिए?
दयालु-2 योजना दस्तावेज मामले के प्रकार के हिसाब से अलग हो सकते हैं।
मृत्यु के मामले में मृत्यु प्रमाण पत्र और एफआईआर या डीडीआर की कॉपी चाहिए, जिसमें यह स्पष्ट हो कि घटना कुत्ते के काटने या संबंधित पशु के कारण हुई।
दिव्यांगता के मामले में मेडिकल बोर्ड या सक्षम मेडिकल अधिकारी द्वारा जारी दिव्यांगता प्रमाण पत्र, अस्पताल की डिस्चार्ज समरी और एफआईआर/डीडीआर की जरूरत पड़ती है।
चोट या डॉग बाइट के मामले में अस्पताल में हुए इलाज के दस्तावेज, घटना को साबित करने वाले सबूत, घाव की तस्वीरें और एफआईआर/डीडीआर जैसी जानकारी मांगी जा सकती है। जिला स्तरीय कमेटी मामले की जांच के दौरान जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त दस्तावेज भी मांग सकती है।
दयालु-2 योजना में ऑनलाइन आवेदन कैसे करें?
दयालु-2 योजना ऑनलाइन आवेदन घटना के बाद तय समय के अंदर करना जरूरी है। सरकार ने इसके लिए ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध कराया है। आवेदक को अपनी पीपीपी आईडी के जरिए लॉगिन करके संबंधित सदस्य का चयन करना होता है और घटना तथा मांगे गए दस्तावेजों की जानकारी भरनी होती है।
सबसे महत्वपूर्ण नियम यह है कि घटना के 90 दिन के अंदर क्लेम करना होगा। देरी होने पर आवेदन पर असर पड़ सकता है, इसलिए घायल व्यक्ति या परिवार को दस्तावेज पूरे होने का लंबे समय तक इंतजार करने के बजाय तय समय सीमा का ध्यान रखना चाहिए।
ऑनलाइन आवेदन के लिए हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास के दयालु-2 पोर्टल का इस्तेमाल किया जा सकता है। दयालु-2 ऑनलाइन आवेदन पोर्टल
क्या दयालु-2 के लिए 1.80 लाख रुपये आय सीमा जरूरी है?
इस सवाल पर दयालु और दयालु-2 में फर्क समझना जरूरी है।
सामान्य दयालु योजना की मौजूदा सरकारी जानकारी में 1.80 लाख रुपये तक सालाना पारिवारिक आय की शर्त बताई जाती है। लेकिन हरियाणा परिवार सुरक्षा न्यास की दयालु-2 की ऑफिशियल स्कीम जानकारी और 2026 में जारी दयालु-2 की जिला स्तरीय सरकारी रिलीज में पात्रता के लिए हरियाणा निवासी और पीपीपी का उल्लेख है; इन ताजा दयालु-2 रिलीज में 1.80 लाख रुपये आय सीमा को पात्रता की शर्त के रूप में नहीं बताया गया है।
इसलिए दोनों योजनाओं की पात्रता को आपस में मिलाकर यह नहीं मानना चाहिए कि दयालु की हर शर्त अपने आप दयालु-2 पर भी लागू होगी।
आवेदन करने के बाद पैसा कैसे मिलेगा?
आवेदन जमा होने के बाद पुलिस रिकॉर्ड, मेडिकल रिपोर्ट और अन्य दस्तावेजों का सत्यापन किया जाता है। इसके बाद जिला स्तरीय कमेटी पात्रता और सहायता राशि पर फैसला करती है।
मंजूर सहायता राशि लाभार्थी के पीपीपी या आधार से जुड़े बैंक खाते में सीधे भेजने का प्रावधान है।
गुरुग्राम में सामने आए ताजा मामले इसका उदाहरण हैं। यहां कमेटी के सामने रखे गए 11 मामलों में से दस्तावेज और सत्यापन पूरा होने के बाद 3 मामलों को सहायता के लिए मंजूरी मिली है। बाकी मामलों में केवल आवेदन करना अपने आप मुआवजा मिलने की गारंटी नहीं है; अंतिम फैसला जांच और योजना के नियम पूरे होने पर होता है।
ज्यादा जानकारी के लिए कहां संपर्क करें?
सरकारी जानकारी के अनुसार दयालु-2 से संबंधित जानकारी के लिए 0172-2996024 और 01262-257692 हेल्पलाइन नंबर पर संपर्क किया जा सकता है। जिले में जिला सांख्यिकी अधिकारी कार्यालय से भी योजना और क्लेम प्रक्रिया की जानकारी ली जा सकती है।
कुत्ते के काटने या आवारा पशु के हमले की घटना होने पर सबसे जरूरी है कि पहले इलाज करवाया जाए, मेडिकल रिकॉर्ड और घटना के सबूत सुरक्षित रखे जाएं और 90 दिन की आवेदन सीमा निकलने से पहले दयालु-2 योजना का क्लेम जमा कर दिया जाए।








