हरियाणा में शिक्षकों के प्रमोशन पर बड़ा आदेश, 30 सितंबर तक केस नहीं भेजा तो डीईईओ जिम्मेदार
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा में जेबीटी और सीएंडवी कैडर के शिक्षकों को टीजीटी पदों पर प्रमोशन देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने जिलों को 30 सितंबर 2026 तक सभी पात्र और वरिष्ठता में छूटे शि…

- जेबीटी और सीएंडवी के पात्र शिक्षकों के प्रमोशन केस 30 सितंबर तक भेजने के निर्देश
- टीजीटी गणित, हिंदी, अंग्रेजी, विज्ञान समेत 8 विषयों के मामले शामिल
- पात्र शिक्षक का केस छूटा तो संबंधित डीईईओ की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा में जेबीटी और सीएंडवी कैडर के शिक्षकों को टीजीटी पदों पर प्रमोशन देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। प्राथमिक शिक्षा निदेशालय ने जिलों को 30 सितंबर 2026 तक सभी पात्र और वरिष्ठता में छूटे शिक्षकों के प्रमोशन केस मुख्यालय भेजने के निर्देश दिए हैं। इसे अंतिम अवसर बताया गया है।
निदेशालय ने साफ किया है कि किसी जिले में पात्र शिक्षक का केस छूटता है या समय पर मुख्यालय नहीं भेजा जाता तो संबंधित जिला मौलिक शिक्षा अधिकारी यानी डीईईओ की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय होगी।

इन शिक्षकों के प्रमोशन केस भेजे जाएंगे
यह प्रक्रिया जेबीटी और सीएंडवी के आरओएच कैडर के उन योग्य शिक्षकों के लिए है, जो निर्धारित वरिष्ठता और पात्रता पूरी करते हैं।
इसमें टीजीटी गणित, अंग्रेजी, हिंदी, पंजाबी, विज्ञान, गृह विज्ञान, संस्कृत और उर्दू के पदों के लिए प्रमोशन केस शामिल हैं। निदेशालय ने पहले भी टीजीटी आर्ट और म्यूजिक जैसे विषयों के लिए जिलों से प्रमोशन केस मांगे थे।
शिक्षकों को अपना केस सीधे मुख्यालय नहीं भेजना है। संबंधित जिला कार्यालय को पात्र शिक्षकों का रिकॉर्ड पूरा करके निर्धारित समय में निदेशालय भेजना होगा।
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प्रमोशन नहीं लेना है तो देना होगा हलफनामा
अगर कोई पात्र शिक्षक प्रमोशन नहीं लेना चाहता तो उसका मामला भी लंबित नहीं छोड़ा जाएगा। ऐसे शिक्षक से लिखित सहमति और हलफनामा लेकर उसका प्रमोशन छोड़ने का केस मुख्यालय भेजना होगा। विभाग पहले भी ऐसे मामलों में प्रमोशन नहीं लेने वाले शिक्षक का हलफनामा भेजने के निर्देश देता रहा है।
इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जिले में कोई पात्र शिक्षक ऐसा न बचे, जिसके प्रमोशन या प्रमोशन छोड़ने के मामले पर विचार ही न हुआ हो।
केस छूटा तो डीईईओ की होगी जिम्मेदारी
निदेशालय ने इस बार जिला स्तर पर जिम्मेदारी भी साफ कर दी है। 30 सितंबर तक सभी पात्र मामलों को मुख्यालय भेजना होगा।
अगर किसी पात्र शिक्षक का केस छूट जाता है और वह बाद में प्रमोशन का दावा करता है या मामला अदालत तक पहुंचता है तो इसकी जिम्मेदारी संबंधित डीईईओ की होगी।
इससे पहले सितंबर में म्यूजिक, आर्ट और फिजिकल एजुकेशन से जुड़े प्रमोशन मामलों में भी विभाग जिला अधिकारियों की जवाबदेही तय कर चुका है। (hindusthansamachar.in)
इसलिए पात्र शिक्षक भी अपने जिला मौलिक शिक्षा कार्यालय से यह जरूर確認 कर लें कि उनका प्रमोशन केस रिकॉर्ड में शामिल है और तय समय में मुख्यालय भेजा जा रहा है।








