फैमिली आईडी में अब गलतिया सही करवाना हुआ आसान, नहीं काटने पड़ेगें दफ्तरों के चक्कर
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा में फैमिली आईडी में जन्म तिथि के सत्यापन की प्रक्रिया आसान कर दी गई है। 15 सितंबर से ऐसे मामलों की जांच ब्लॉक स्तर से शुरू होकर एसडीएम स्तर पर ही पूरी की जाएगी। इससे लोगों को जन्म तिथि से…

- 15 सितंबर से जन्म तिथि सत्यापन ब्लॉक से एसडीएम स्तर पर पूरा होगा
- मामला अटकने पर एडीसी को विशेष अधिकार दिए गए
- सही जन्म तिथि से पेंशन, छात्रवृत्ति और दूसरी योजनाओं में पात्रता तय करने में मदद मिलेगी
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा में फैमिली आईडी में जन्म तिथि के सत्यापन की प्रक्रिया आसान कर दी गई है। 15 सितंबर से ऐसे मामलों की जांच ब्लॉक स्तर से शुरू होकर एसडीएम स्तर पर ही पूरी की जाएगी। इससे लोगों को जन्म तिथि से जुड़ी गलती ठीक करवाने के लिए बार-बार जिला मुख्यालय नहीं जाना पड़ेगा।
पीपीपी स्टेट कोऑर्डिनेटर डॉ. सतीश खोला के अनुसार मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के निर्देश पर प्रक्रिया को निचले स्तर पर लाया गया है, ताकि लंबित मामलों का जल्द निपटारा हो सके। अगर एसडीएम स्तर पर किसी मामले का सत्यापन नहीं हो पाता या अनावश्यक देरी होती है तो एडीसी को उसमें कार्रवाई के विशेष अधिकार दिए गए हैं।
पहले एडीसी स्तर पर पहुंचते थे लंबित मामले
नई व्यवस्था से पहले जन्म तिथि और आयु सत्यापन के लंबित मामलों में एडीसी स्तर की भूमिका ज्यादा थी। मई में मुख्यमंत्री की समीक्षा बैठक के दौरान भी सरकार ने लंबित आयु सत्यापन एडीसी के माध्यम से पूरा करवाने के निर्देश दिए थे।
अब इस प्रक्रिया को ब्लॉक और एसडीएम स्तर तक लाने से सामान्य मामलों का निपटारा स्थानीय स्तर पर ही हो सकेगा। केवल ऐसे मामले एडीसी तक जाएंगे, जिनमें सत्यापन नहीं हो रहा या मामला लंबे समय से अटका हुआ है।
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पेंशन और छात्रवृत्ति में सही जन्म तिथि जरूरी
फैमिली आईडी में दर्ज जन्म तिथि कई सरकारी योजनाओं में पात्रता तय करने के लिए इस्तेमाल होती है। गलत जन्म तिथि होने पर वृद्धावस्था पेंशन, छात्रवृत्ति या उम्र के आधार पर मिलने वाली दूसरी योजनाओं में परेशानी आ सकती है।
सरकार पहले से फैमिली आईडी में जन्म तिथि सत्यापन का अभियान चला रही है। ऐसे नागरिकों को संदेश भी भेजे गए हैं जिनकी जन्म तिथि अभी सत्यापित नहीं हुई है। पुराने निर्देशों में जन्म प्रमाण पत्र, स्कूल प्रमाण पत्र, दसवीं का प्रमाण पत्र, पुराने मतदाता पहचान पत्र, पासपोर्ट और पेंशन भुगतान आदेश जैसे दस्तावेज सत्यापन के लिए मान्य बताए गए हैं।
नई व्यवस्था का मुख्य उद्देश्य यही है कि जन्म तिथि से जुड़े सामान्य मामले जिले में ही न अटकें और पात्र लोगों को सरकारी योजनाओं का लाभ मिलने में देरी न हो।








