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खेती-बाड़ी

फसल की पत्तियां ही बता देती हैं इस बार कितनी होगी पैदावार, किसान पतियां में इन बदलाव से पहचानें हर पोषक तत्व की कमी| Nutrient Deficiency Symptoms in Plants

फसल की पत्तियों का रंग बदलना, किनारों का जलना, नई पत्तियों का पीला पड़ना, पौधे का छोटा रह जाना और बढ़वार रुकना अक्सर पोषक तत्वों की कमी के शुरुआती संकेत होते हैं। यदि इन लक्षणों को समय रहते पहचान लिया जाए और सही पोषण दि…

फसल की पत्तियां ही बता देती हैं इस बार कितनी होगी पैदावार, किसान पतियां देख कर पहचानें हर पोषक तत्व की कमी

Nutrient Deficiency Symptoms in Plants: फसल में केवल समय पर बुवाई और खाद डालना ही पर्याप्त नहीं होता। कई बार पौधे उत्पादन घटने से पहले ही पत्तियों के जरिए संकेत देने लगते हैं। पत्तियों का पीला पड़ना, किनारों का जलना, रंग बदलना, नई पत्तियों का ठीक से विकसित न होना या पौधे की बढ़वार रुकना अक्सर किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी का संकेत होता है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय रहते इन लक्षणों की पहचान कर सही पोषण देने से उत्पादन और गुणवत्ता दोनों को बेहतर बनाए रखा जा सकता है।

केवल यूरिया और डीएपी से पूरी नहीं होती फसल की जरूरत

अच्छी बढ़वार के लिए पौधों को केवल नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश ही नहीं, बल्कि कैल्शियम, मैग्नीशियम, सल्फर तथा जिंक, आयरन, बोरॉन, मैंगनीज, कॉपर, मोलिब्डेनम, क्लोरीन और निकेल जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी चाहिए। यदि लंबे समय तक केवल कुछ चुनिंदा उर्वरकों का उपयोग किया जाए तो मिट्टी में दूसरे पोषक तत्वों की कमी बढ़ सकती है और इसका असर सीधे उत्पादन पर दिखाई देता है।

सबसे पहले यह समझना जरूरी है कि लक्षण पुरानी पत्तियों पर हैं या नई पत्तियों पर

पोषक तत्वों की कमी पहचानने का पहला आसान तरीका यह देखना है कि लक्षण पौधे की पुरानी पत्तियों पर दिखाई दे रहे हैं या नई पत्तियों पर।

जिन पोषक तत्वों का पौधे के भीतर आसानी से स्थानांतरण हो जाता है, उनकी कमी के लक्षण पहले पुरानी पत्तियों पर दिखाई देते हैं। इनमें नाइट्रोजन, फास्फोरस, पोटाश और मैग्नीशियम प्रमुख हैं। वहीं सल्फर, कैल्शियम, आयरन और अधिकांश सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी सबसे पहले नई पत्तियों में दिखाई देती है।

नाइट्रोजन की कमी होने पर क्या दिखाई देता है?

नाइट्रोजन पौधों की हरी बढ़वार के लिए सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है।

इसकी कमी होने पर सबसे पहले पुरानी पत्तियां हल्की हरी और फिर पीली पड़ने लगती हैं। पौधे की बढ़वार धीमी हो जाती है, तना पतला रह जाता है और पूरा पौधा छोटा दिखाई देता है। लंबे समय तक कमी रहने पर उत्पादन और दानों या फलों की गुणवत्ता भी प्रभावित हो सकती है। कई अनाज फसलों में पत्ती का सिरा पहले पीला पड़ता है और धीरे-धीरे पूरा भाग प्रभावित हो जाता है।

फास्फोरस की कमी कैसे पहचानें?

फास्फोरस जड़ों के विकास, फूल बनने और बीज तैयार होने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इसकी कमी होने पर पौधे की बढ़वार धीमी पड़ जाती है। पुरानी पत्तियां गहरे हरे रंग की दिखाई देती हैं और कई फसलों में बैंगनी या जामुनी आभा भी विकसित हो सकती है। जड़ें कमजोर रहती हैं, जिससे आगे चलकर उत्पादन प्रभावित होता है।

पोटाश की कमी के संकेत क्या हैं?

यदि पत्तियों के किनारे पहले पीले पड़ें और बाद में जले हुए जैसे दिखने लगें तो यह पोटाश की कमी का संकेत हो सकता है।

पोटाश पौधों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और पानी के संतुलन को बनाए रखने में मदद करता है। इसकी कमी होने पर पौधे कमजोर पड़ सकते हैं और रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।

मैग्नीशियम और सल्फर की कमी में अंतर कैसे समझें?

मैग्नीशियम की कमी में सबसे पहले पुरानी पत्तियां पीली पड़ती हैं, लेकिन उनकी नसें लंबे समय तक हरी बनी रहती हैं। इससे प्रकाश संश्लेषण प्रभावित होता है और पौधे की ऊर्जा बनने की क्षमता घट जाती है।

इसके विपरीत, सल्फर की कमी में नई पत्तियां पहले पीली दिखाई देती हैं। यह लक्षण कई बार नाइट्रोजन की कमी जैसा लगता है, लेकिन अंतर यही है कि नाइट्रोजन की कमी पुरानी पत्तियों से शुरू होती है, जबकि सल्फर की कमी नई पत्तियों में दिखाई देती है।

सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

जिंक, आयरन, बोरॉन, मैंगनीज और अन्य सूक्ष्म पोषक तत्व बहुत कम मात्रा में चाहिए होते हैं, लेकिन इनकी कमी भी उत्पादन पर बड़ा असर डाल सकती है।

जिंक की कमी में नई पत्तियां छोटी रह सकती हैं और पौधे की बढ़वार रुक सकती है। आयरन की कमी में नई पत्तियों की नसें हरी रहती हैं, जबकि बाकी हिस्सा पीला पड़ने लगता है। अलग-अलग फसलों में इनके लक्षण कुछ अलग हो सकते हैं, इसलिए केवल पत्तियों का रंग देखकर अंतिम निष्कर्ष निकालना सही नहीं माना जाता।

हर पीली पत्ती पोषक तत्वों की कमी का संकेत नहीं होती

कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार कई बार कीट, रोग, जलभराव, सूखा, अधिक क्षारीय मिट्टी या अन्य तनाव भी ऐसे ही लक्षण पैदा कर सकते हैं। इसलिए केवल पत्तियों का रंग देखकर बिना जांच के किसी सूक्ष्म पोषक तत्व या उर्वरक का उपयोग करना नुकसानदायक हो सकता है। सही पहचान के लिए खेत की स्थिति, पूरे पौधे के लक्षण और आवश्यकता होने पर मिट्टी या पौध विश्लेषण भी जरूरी है।

बिना जांच के उर्वरक डालना क्यों पड़ सकता है महंगा?

कृषि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि फसल कमजोर दिखाई देने पर सीधे उर्वरक या सूक्ष्म पोषक तत्व खरीदने के बजाय पहले समस्या की सही पहचान की जाए।

यदि जरूरत हो तो कृषि विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र या कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर मिट्टी की जांच करानी चाहिए। इससे अनावश्यक खर्च से बचाव होता है और फसल को वही पोषण मिलता है जिसकी वास्तव में जरूरत होती है। संतुलित पोषण के साथ जैविक खाद और गोबर की खाद का नियमित उपयोग भी मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में मदद करता है।

समय पर पहचान से बढ़ सकती है पैदावार

नियमित रूप से फसल की पत्तियों, नई बढ़वार और जड़ों की स्थिति पर नजर रखने से पोषक तत्वों की कमी शुरुआती अवस्था में ही पकड़ी जा सकती है। समय पर संतुलित पोषण देने से पौधे स्वस्थ रहते हैं, रोगों का खतरा कम होता है और बेहतर गुणवत्ता के साथ अधिक उत्पादन मिलने की संभावना बढ़ जाती है।

लेखक

Kuldeep Singh

कुलदीप सिंह LocalHaryana.com पर लेखक के रुप में कार्यरत हैं। वे वर्ष 2021 से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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