कौन हैं प्रह्लाद जोशी? धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार मिला
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार कर लिया और प्रह्लाद जोशी को उनके मौजूदा मंत्रालय…
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सलाह पर धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा तत्काल प्रभाव से स्वीकार कर लिया है। प्रह्लाद जोशी फिलहाल उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय संभाल रहे हैं। अब वे इन मंत्रालयों के साथ-साथ शिक्षा मंत्रालय की भी जिम्मेदारी संभालेंगे।
धर्मेंद्र प्रधान ने क्यों दिया इस्तीफा?
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 25 जुलाई 2026 को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। यह फैसला NEET-UG परीक्षा में गड़बड़ियों को लेकर देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन के बीच आया। इस पूरे घटनाक्रम की शुरुआत 3 मई 2026 को हुई, जब NEET-UG परीक्षा के बाद पेपर लीक और धांधली के आरोप सामने आए। धीरे-धीरे यह मामला सोशल मीडिया से निकलकर बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया।
28 जून 2026 को सोनम वांगचुक भी इस आंदोलन से जुड़े और उन्होंने जंतर-मंतर पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू कर दी। ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के नेतृत्व में दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का आंदोलन करीब 37 दिनों तक चला।
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने इस्तीफे की घोषणा करते हुए कहा कि यह कदम छात्रों के हित में उठाया गया है। उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर और देशभर की स्थिति का फायदा ‘असामाजिक तत्व’ न उठा पाएं, इसलिए उन्होंने प्रधानमंत्री को अपना इस्तीफा सौंप दिया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ ने अपना आंदोलन वापस ले लिया। CJP के राष्ट्रीय प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने उनकी सभी मांगें मान ली हैं, इसलिए वे आंदोलन वापस ले रहे हैं। सरकार ने NEET पेपर लीक से जुड़ी आत्महत्या पीड़ितों के परिवारों को मुआवजा देने और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ FIR वापस लेने पर सहमति जताई।
कौन हैं प्रह्लाद जोशी?
प्रह्लाद वेंकटेश जोशी का जन्म 27 नवंबर 1962 को कर्नाटक के विजयपुरा (तत्कालीन बीजापुर) में हुआ था। उनके पिता स्वर्गीय वेंकटेश जोशी भारतीय रेलवे में कर्मचारी थे, जबकि उनकी माता का नाम मालतीबाई था। वह एक पारंपरिक उत्तरी कर्नाटक ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं।
प्रह्लाद जोशी ने छात्र जीवन से ही सामाजिक कार्यों और जनहित के मुद्दों में रुचि दिखाई। उन्होंने कम उम्र में ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़ाव बना लिया और बाद में भारतीय जनता पार्टी में अपनी पहचान बनाई। प्रह्लाद जोशी ने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत छात्र राजनीति और कर्नाटक में संगठनात्मक कार्यों से की।
प्रह्लाद जोशी की शैक्षणिक योग्यता
प्रह्लाद जोशी ने हुब्बल्ली में अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की। इसके बाद उन्होंने धारवाड़ के कदसिद्धेश्वर आर्ट्स कॉलेज से कर्नाटक विश्वविद्यालय से 1983 में बैचलर ऑफ आर्ट्स (B.A.) की डिग्री हासिल की। उनकी शैक्षणिक पृष्ठभूमि मानविकी (ह्यूमेनिटीज़) में रही है। हाल के कई शिक्षा मंत्रियों के विपरीत, जिनके पास इंजीनियरिंग, कानून या प्रबंधन की डिग्री रही है, प्रह्लाद जोशी कला स्नातक हैं।
प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक करियर
प्रह्लाद जोशी ने 2004 में 14वीं लोकसभा के लिए चुने जाने के साथ राष्ट्रीय राजनीति में प्रवेश किया। वह कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार 5 बार सांसद चुने गए हैं। 2014 में वह तीसरी बार सांसद चुने गए।
प्रह्लाद जोशी 2014 से 2016 तक कर्नाटक भाजपा के अध्यक्ष रहे। उन्होंने 2014 से 2018 तक लोकसभा के पैनल ऑफ चेयरपर्सन में भी सेवा दी। 2019 में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्रिमंडल में प्रवेश किया और संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्री के रूप में कार्य किया। 2024 के चुनावों में वह पांचवीं बार धारवाड़ से सांसद चुने गए और उन्हें उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी दी गई। वह इंटरनेशनल सोलर अलायंस के अध्यक्ष भी हैं।
प्रह्लाद जोशी के सामने शिक्षा मंत्रालय की चुनौतियां
प्रह्लाद जोशी ऐसे समय में शिक्षा मंत्रालय संभाल रहे हैं, जब NEET-UG परीक्षा विवाद के बाद प्रवेश परीक्षाओं में जनता का भरोसा बहाल करना एक बड़ी चुनौती है। उन्हें राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) को मजबूत करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को लागू करने, उच्च शिक्षा के अवसर बढ़ाने और स्कूलों में शिक्षा के स्तर को सुधारने जैसे कामों को आगे बढ़ाना है।
यह पहली बार है जब प्रह्लाद जोशी शिक्षा क्षेत्र की देखरेख करेंगे। कॉकरोच जनता पार्टी ने पहले ही चेतावनी दी है कि यदि उनके मुद्दों का समाधान नहीं किया गया तो वे फिर से जंतर-मंतर लौट आएंगे।

