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हरियाणा में जमीन रिकॉर्ड में खेवट-खसरा की गलती अब तहसील स्तर पर होगी ठीक, ऑनलाइन करेक्शन मॉड्यूल शुरू

हरियाणा की सभी तहसीलों में ऑनलाइन करेक्शन मॉड्यूल शुरू किया गया है।
हरियाणा की सभी तहसीलों में ऑनलाइन करेक्शन मॉड्यूल शुरू किया गया है।

चंडीगढ़। हरियाणा में ऑनलाइन जमीन और राजस्व रिकॉर्ड में होने वाली सामान्य गलतियों को ठीक कराने के लिए अब लोगों को राज्य मुख्यालय तक मामला भेजने की जरूरत नहीं पड़ेगी। राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने प्रदेश की सभी तहसीलों में ऑनलाइन करेक्शन मॉड्यूल शुरू किया है। वित्तायुक्त डॉ. सुमिता मिश्रा के मुताबिक नियमित प्रकृति की करीब 99 प्रतिशत त्रुटियों का निपटान अब तहसील स्तर पर ही किया जा सकेगा। इससे खेवट में गलत हिस्सा, जमीन का गलत रकबा या ऑनलाइन रिकॉर्ड से खेवट-खसरा छूटने जैसी गलतियों को स्थानीय स्तर पर ठीक करने की प्रक्रिया तेज होगी।

नई व्यवस्था में हर गलती सीधे ऑनलाइन नहीं बदलेगी। पहले संबंधित पटवारी करेक्शन रिक्वेस्ट डालेगा, इसके बाद कानूनगो मैनुअल राजस्व रिकॉर्ड से उसका मिलान करेगा और तहसीलदार की मंजूरी के बाद ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव होगा।

जानकारी नई व्यवस्था
लागू क्षेत्र हरियाणा की सभी तहसीलें
किन मामलों में फायदा ऑनलाइन राजस्व रिकॉर्ड की सामान्य गलतियां
मुख्य उदाहरण गलत खेवट हिस्सा, गलत रकबा, खेवट या खसरा का ऑनलाइन रिकॉर्ड से छूटना
करेक्शन रिक्वेस्ट संबंधित पटवारी करेगा
रिकॉर्ड की जांच कानूनगो करेगा
अंतिम मंजूरी तहसीलदार
मैनुअल जमाबंदी में गलती फर्द बदर प्रक्रिया से होगी
निगरानी कम से कम 10% मामलों की रैंडम जांच

खेवट, रकबा और खसरा की ये गलतियां हो सकेंगी ठीक

नए मॉड्यूल में ऐसी गलतियों को शामिल किया गया है जहां मैनुअल रिकॉर्ड सही है लेकिन ऑनलाइन रिकॉर्ड में गलत एंट्री हो गई है। उदाहरण के तौर पर खेवट में किसी व्यक्ति का हिस्सा गलत दर्ज होना, जमीन का रकबा गलत दिखना या किसी खेवट अथवा खसरा का ऑनलाइन रिकॉर्ड में दर्ज न होना शामिल है।

अगर किसी इंतकाल की प्रिंटेड कॉपी सही है लेकिन उसका ऑनलाइन इंद्राज गलत हुआ है, तो भी करेक्शन रिक्वेस्ट के जरिए सुधार किया जा सकेगा। वहीं अगर गलती इंतकाल की मूल प्रिंट में ही है तो उसके लिए तय अलग प्रक्रिया अपनाई जाएगी।

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पटवारी से तहसीलदार तक ऐसे होगा रिकॉर्ड में सुधार

रिकॉर्ड में गलती मिलने पर संबंधित पटवारी ऑनलाइन करेक्शन रिक्वेस्ट करेगा। इसके बाद कानूनगो उस अनुरोध को मैनुअल राजस्व रिकॉर्ड से मिलाकर जांचेगा।

सत्यापन के बाद मामला तहसीलदार के पास जाएगा। तहसीलदार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही ऑनलाइन रिकॉर्ड में जरूरी बदलाव दर्ज किया जाएगा। इस व्यवस्था से पहले सामान्य मामलों को भी राज्य मुख्यालय तक भेजना पड़ता था, जिससे सुधार में ज्यादा समय लग सकता था।

इसका मतलब यह भी है कि नया मॉड्यूल फिलहाल ऐसा सिस्टम नहीं है जिसमें जमीन मालिक खुद ऑनलाइन रिकॉर्ड में बदलाव कर सके। करेक्शन की प्रक्रिया राजस्व अधिकारियों के जरिए ही पूरी होगी।

मैनुअल जमाबंदी में गलती है तो करेक्शन मॉड्यूल से नहीं बदलेगा रिकॉर्ड

नई व्यवस्था में सबसे जरूरी फर्क ऑनलाइन रिकॉर्ड और मैनुअल जमाबंदी की गलती के बीच है।

अगर मैनुअल जमाबंदी सही है और सिर्फ ऑनलाइन डेटा में गलती है तो नया करेक्शन मॉड्यूल इस्तेमाल किया जा सकेगा। लेकिन अगर गलती मैनुअल जमाबंदी में ही है तो ऑनलाइन मॉड्यूल के जरिए उसे नहीं बदला जाएगा। ऐसे मामले पहले से तय फर्द बदर प्रक्रिया के तहत निपटाए जाएंगे।

यानी हर तरह की जमीन रिकॉर्ड की गलती के लिए नया मॉड्यूल लागू नहीं होगा। विभाग ने सामान्य डिजिटल एंट्री की गलतियों और मूल राजस्व रिकॉर्ड की गलतियों के लिए अलग प्रक्रिया रखी है।

10 प्रतिशत करेक्शन मामलों की होगी रैंडम जांच

ऑनलाइन रिकॉर्ड में गलत बदलाव या मॉड्यूल के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए निगरानी का भी प्रावधान किया गया है। उपमंडल अधिकारी और उपायुक्त स्तर के अधिकारी कम से कम 10 प्रतिशत करेक्शन रिक्वेस्ट की रैंडम जांच करेंगे। विभाग की ओर से इस निगरानी को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश भी जारी किए जाने हैं।

हरियाणा में राजस्व रिकॉर्ड को ऑनलाइन करने की प्रक्रिया इससे पहले भी आगे बढ़ाई गई है। जुलाई 2026 में सरकार ने जमाबंदी, इंतकाल, फर्द बदर और रजिस्टर्ड सेल डीड की प्रमाणित कॉपी ऑनलाइन आवेदन कर घर बैठे डाउनलोड करने की सुविधा शुरू की थी। नया करेक्शन मॉड्यूल अब डिजिटल रिकॉर्ड में सामान्य गलतियों के स्थानीय स्तर पर सुधार की सुविधा जोड़ता है।

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