हिसार में रबी कृषि मेले सीएम सैनी का बड़ा ऐलान, किसानों को ड्रिप-स्प्रिंकलर और खेत तालाब पर मिलेगी 85% सब्सिडी
लोकल हरियाणा, हिसार। हरियाणा में किसानों को कम पानी में बेहतर सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरीगेशन तकनीक अपनाने पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को चौधरी चरण सिंह हरियाणा…

- ड्रिप-स्प्रिंकलर पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी
- पांच हेक्टेयर तक जमीन पर मिल सकता है लाभ
- व्यक्तिगत और सामुदायिक खेत तालाब पर अलग सहायता
लोकल हरियाणा, हिसार। हरियाणा में किसानों को कम पानी में बेहतर सिंचाई के लिए ड्रिप और स्प्रिंकलर जैसी माइक्रो इरीगेशन तकनीक अपनाने पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है। गुरुवार, 1 अक्टूबर 2026 को चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार में रबी कृषि मेले का शुभारंभ करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने किसानों को कम पानी वाली आधुनिक सिंचाई तकनीकों से जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि माइक्रो इरीगेशन के साथ किसानों को खेत में जलकुंड या तालाब बनाने पर भी 85 प्रतिशत तक सहायता दी जा रही है।
सरकार का जोर खास तौर पर उन इलाकों में पानी बचाने पर है जहां भूजल का दबाव लगातार बढ़ रहा है। ड्रिप और स्प्रिंकलर के जरिए फसल की जरूरत के हिसाब से पानी दिया जा सकता है, जिससे पारंपरिक सिंचाई के मुकाबले पानी का बेहतर इस्तेमाल होता है।
ड्रिप और स्प्रिंकलर पर किसान को कितनी सब्सिडी मिलेगी?
हरियाणा की माइक्रो इरीगेशन एंड कमांड एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी की मौजूदा व्यवस्था के तहत ड्रिप और माइक्रो/मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम पर कुल स्वीकृत लागत का 85 प्रतिशत तक अनुदान दिया जाता है।
मौजूदा दिशा-निर्देशों में यह सहायता सभी श्रेणी के किसानों के लिए अधिकतम 5 हेक्टेयर जमीन तक उपलब्ध है। हालांकि एल्युमिनियम आधारित स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए अलग अधिकतम सहायता सीमा तय है। इसलिए किसान को सिस्टम और जमीन के हिसाब से मिलने वाली वास्तविक राशि अलग हो सकती है।
यानी अगर किसी पात्र माइक्रो इरीगेशन सिस्टम की स्वीकृत लागत पर 85 प्रतिशत सहायता लागू होती है तो किसान का हिस्सा सामान्य तौर पर 15 प्रतिशत रहता है। इसके अलावा लागू जीएसटी किसान को अलग से देना पड़ सकता है, क्योंकि जीएसटी पर सब्सिडी नहीं मिलती।
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क्या ट्यूबवेल वाले किसान भी 85 प्रतिशत सब्सिडी ले सकते हैं?
हां। सरकारी माइक्रो इरीगेशन FAQ के मुताबिक ट्यूबवेल के पानी से सिंचाई करने वाला किसान भी ड्रिप या स्प्रिंकलर सिस्टम लगाने पर 85 प्रतिशत तक सब्सिडी का लाभ ले सकता है।
इसके अलावा नहरी पानी, ओवरफ्लो तालाब और शोधित पानी से जुड़ी माइक्रो इरीगेशन श्रेणियों के लिए भी अलग विकल्प उपलब्ध हैं। मिकाडा के मौजूदा पोर्टल पर ट्यूबवेल, नहर, ओवरफ्लो तालाब और एसटीपी आधारित माइक्रो इरीगेशन के लिए किसान आवेदन कर सकते हैं।
खेत में तालाब बनाने पर किसे 70 और किसे 85 प्रतिशत मदद मिलेगी?
यहां किसानों के लिए सबसे जरूरी फर्क समझना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने अपने ताजा संबोधन में खेत तालाब बनाने पर 85 प्रतिशत तक अनुदान बताया है।
मिकाडा के मौजूदा पोर्टल पर ऑन-फार्म वाटर टैंक यानी खेत में जलकुंड के लिए 70 प्रतिशत और 85 प्रतिशत सहायता का प्रावधान दिखाया गया है।
सरकारी नीति के अनुसार:
- व्यक्तिगत किसान के खेत तालाब/जलकुंड पर 70 प्रतिशत तक सहायता
- सामुदायिक जलकुंड पर 85 प्रतिशत तक सहायता
सहायता स्वीकृत लागत और वास्तविक निर्माण लागत में जो कम होगी, उसके आधार पर तय की जाती है। इसलिए हर व्यक्तिगत किसान को सीधे 85 प्रतिशत तालाब सब्सिडी मिलेगी, ऐसा मानना सही नहीं होगा।
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माइक्रो इरीगेशन सब्सिडी के लिए आवेदन कैसे करें?
हरियाणा में माइक्रो इरीगेशन के लिए किसान ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। मिकाडा की मौजूदा वेबसाइट पर Farmer Registration for MI Application फिलहाल खुला हुआ है।
आवेदन के दौरान किसान अपनी जमीन, सिंचाई के स्रोत और जिस सिस्टम के लिए सहायता चाहिए उसकी जानकारी दर्ज करता है। इसके बाद स्वीकृत प्रक्रिया के अनुसार सिस्टम लगाने और भौतिक सत्यापन के बाद सब्सिडी जारी की जाती है।
किसान के पास भुगतान के दो तरीके हो सकते हैं। वह पूरी राशि विक्रेता को देकर सत्यापन के बाद सब्सिडी अपने बैंक खाते में प्राप्त कर सकता है या निर्धारित प्रक्रिया में अपना करीब 15 प्रतिशत हिस्सा ई-चालान से जमा कर सकता है। इसके बाद सत्यापन पूरा होने पर सब्सिडी विक्रेता को जारी की जाती है।
मिकाडा से जुड़ी योजना की जानकारी के लिए विभाग ने 0172-2800610 हेल्पलाइन भी दी है।
क्या एक ही खेत पर दोबारा ड्रिप-स्प्रिंकलर सब्सिडी मिल सकती है?
यह सवाल उन किसानों के लिए अहम है जिन्होंने पहले भी माइक्रो इरीगेशन सिस्टम लगाया है।
मिकाडा की वेबसाइट पर उपलब्ध दिशा-निर्देशों के मुताबिक सामान्य रूप से किसान को निर्धारित सीमा तक एक बार सहायता दी जाती है। लेकिन उसी जमीन पर ड्रिप या मिनी स्प्रिंकलर सिस्टम के लिए 7 वर्ष की अवधि पूरी होने के बाद दोबारा सहायता की पात्रता बन सकती है।
इसलिए पहले से सिस्टम लगा चुके किसान नया आवेदन करने से पहले अपने पुराने अनुदान और स्थापना की तारीख जरूर जांचें।
खेत में सिस्टम लगाने से पहले किन बातों का ध्यान रखना होगा?
ड्रिप इरीगेशन के मामले में सरकारी guideline के अनुसार मुख्य और सब-मेन पाइप लाइन भूमिगत होना जरूरी है। सब्सिडी केवल खेत में वास्तव में खरीदे और लगाए गए पात्र माइक्रो इरीगेशन सामान पर मिलेगी। मिट्टी खुदाई और लागू जीएसटी पर अनुदान नहीं दिया जाता।
सिस्टम लगाने के बाद बिल और जरूरी रिकॉर्ड पोर्टल पर अपलोड किए जाते हैं और भौतिक सत्यापन के बाद ही सहायता जारी होती है। इसलिए केवल आवेदन कर देने से सब्सिडी मंजूर नहीं मानी जाएगी।
पानी बचाने के लिए 27 योजनाएं, इनमें 20 पूरी
माइक्रो इरीगेशन के साथ हरियाणा सरकार शोधित पानी को भी खेती में इस्तेमाल करने पर काम कर रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के शोधित पानी को सिंचाई में इस्तेमाल करने के लिए 27 योजनाएं तैयार की गई हैं और इनमें से 20 पूरी हो चुकी हैं। सरकार का लक्ष्य नहरों पर दबाव कम करने के साथ भूजल दोहन को घटाना है।








