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पलवल की शालू रानी बनी किसानों की ‘ड्रोन दीदी’, खेतों में स्प्रे से बचा रहीं समय और पानी

लोकल हरियाणा, पलवल। पलवल की शालू रानी नमो ड्रोन दीदी के रूप में किसानों के खेतों में ड्रोन से दवाइयों और दूसरी कृषि सामग्री का छिड़काव कर रही हैं। बुधवार, 30 सितंबर 2026 को सेवा संकल्प अभियान के तहत उनकी कहानी सामने आई।…

Palwal Shalu Rani Namo Drone Didi Haryana Farmers Drone Spray
Palwal Shalu Rani Namo Drone Didi Haryana Farmers Drone Spray
खबर की मुख्य बातें
  • ड्रोन से खेतों में दवा और कृषि सामग्री का छिड़काव
  • किसानों का समय, लागत और पानी बचाने में मदद
  • महिला स्वयं सहायता समूहों को मिलती है ड्रोन और ट्रेनिंग

लोकल हरियाणा, पलवल। पलवल की शालू रानी नमो ड्रोन दीदी के रूप में किसानों के खेतों में ड्रोन से दवाइयों और दूसरी कृषि सामग्री का छिड़काव कर रही हैं। बुधवार, 30 सितंबर 2026 को सेवा संकल्प अभियान के तहत उनकी कहानी सामने आई। शालू रानी के मुताबिक ड्रोन से खेतों में कम समय में छिड़काव हो जाता है और किसानों को लागत व पानी बचाने में भी मदद मिलती है। ड्रोन चलाने से उन्हें खेती में नई तकनीक के साथ काम करने का मौका मिला है और स्वरोजगार का नया रास्ता भी खुला है। हरियाणा सरकार ने उनकी कहानी को महिला आत्मनिर्भरता और खेती में नई तकनीक के इस्तेमाल के उदाहरण के रूप में साझा किया है।

ड्रोन से किसानों के खेतों में क्या काम कर रही हैं शालू रानी?

शालू रानी ड्रोन की मदद से खेतों में दवाइयों और कृषि उपयोग की दूसरी सामग्री का छिड़काव करती हैं। उनका कहना है कि पारंपरिक तरीके की तुलना में ड्रोन से यह काम कम समय में किया जा सकता है और पानी की खपत भी घटाने में मदद मिलती है।

नमो ड्रोन दीदी योजना का मुख्य उद्देश्य भी महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन सेवा प्रदाता बनाना है। केंद्र की योजना के तहत ड्रोन का इस्तेमाल फिलहाल किसानों के खेतों में तरल खाद और कीटनाशकों के छिड़काव जैसी कृषि सेवाओं के लिए किया जाता है।

नमो ड्रोन दीदी योजना का लाभ कौन ले सकता है?

यह योजना किसी भी महिला को व्यक्तिगत रूप से मुफ्त ड्रोन देने की योजना नहीं है। केंद्र सरकार के नियमों के मुताबिक इसके लिए दीनदयाल अंत्योदय योजना-राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़े चुनिंदा महिला स्वयं सहायता समूहों का चयन किया जाता है। ड्रोन का मालिकाना हक भी संबंधित स्वयं सहायता समूह या उसके क्लस्टर स्तर के संगठन के पास रहता है।

यानी केवल व्यक्तिगत महिला के तौर पर सीधे ड्रोन मांगने के बजाय महिला का पात्र स्वयं सहायता समूह से जुड़ा होना जरूरी है। समूहों का चयन राज्य स्तर पर तय प्रक्रिया और उस क्षेत्र में कृषि ड्रोन सेवाओं की जरूरत को देखते हुए किया जाता है।

नमो ड्रोन दीदी योजना में ड्रोन खरीदने के लिए कितनी मदद मिलती है?

चुने गए महिला स्वयं सहायता समूह को ड्रोन और उससे जुड़े सामान की लागत का 80 प्रतिशत तक आर्थिक सहयोग मिलता है। इसकी अधिकतम सीमा 8 लाख रुपये है। बची हुई लागत के लिए स्वयं सहायता समूह कृषि इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के तहत लोन ले सकता है, जिस पर 3 प्रतिशत ब्याज सहायता का प्रावधान है।

ड्रोन केवल मशीन के रूप में नहीं दिया जाता। इसके पैकेज में स्प्रे सिस्टम, बैटरी, चार्जर, जरूरी उपकरण, बीमा और रखरखाव जैसी सुविधाएं भी शामिल हैं।

ड्रोन दीदी बनने के लिए क्या ट्रेनिंग मिलती है?

चुने गए महिला स्वयं सहायता समूह की एक सदस्य को 15 दिन की ट्रेनिंग दी जाती है। इसमें ड्रोन उड़ाने की जरूरी ट्रेनिंग के साथ खेती में खाद और कीटनाशक के छिड़काव के लिए ड्रोन इस्तेमाल करना सिखाया जाता है।

समूह की दूसरी सदस्य या उसके परिवार के ऐसे सदस्य को ड्रोन सहायक की ट्रेनिंग दी जा सकती है, जिसे इलेक्ट्रिकल, फिटिंग या मशीनों की मरम्मत जैसे काम में रुचि हो। केंद्र सरकार के अनुसार यह training drone package का हिस्सा है।

हरियाणा में भी कृषि विभाग नमो ड्रोन दीदी के जरिए खेतों में ड्रोन स्प्रे को बढ़ावा दे रहा है। इसके लिए प्रशिक्षित और नियमों के अनुसार प्रमाणित ड्रोन दीदियों को किसानों के खेतों में स्प्रे सेवाओं से जोड़ा जा रहा है।

शालू रानी का कहना है कि ड्रोन संचालन सीखने के बाद महिलाओं के लिए खेती से जुड़े नए काम और कमाई के मौके खुले हैं। उन्होंने दूसरी महिलाओं से भी स्वयं सहायता समूहों और सरकारी योजनाओं से जुड़कर इन अवसरों का लाभ उठाने की अपील की है।

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लेखक

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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