हिसार में 106.28 करोड़ की स्मार्ट सिंचाई परियोजना, 3 गांव के किसानों को मिलेगा शोधित पानी, बिजली बिल में बड़ी राहत
लोकल हरियाणा, हिसार, 23 अक्टूबर। हरियाणा सरकार हिसार के गाँव गावड़, कालावास और सिंघरान समेत पनिहार-चौधरीवास क्लस्टर में 106.28 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिंचाई परियोजना विकसित कर रही है। इस परियोजना के तहत शहर के शोधित अपश…

लोकल हरियाणा, हिसार, 23 अक्टूबर। हरियाणा सरकार हिसार के गाँव गावड़, कालावास और सिंघरान समेत पनिहार-चौधरीवास क्लस्टर में 106.28 करोड़ रुपये की स्मार्ट सिंचाई परियोजना विकसित कर रही है। इस परियोजना के तहत शहर के शोधित अपशिष्ट जल को भूमिगत पाइपलाइन के जरिए सीधे खेतों तक पहुँचाया जाएगा। इससे 971 किसानों को सीधा फायदा मिलेगा और लगभग 1,700 हेक्टेयर कृषि क्षेत्र की सिंचाई हो सकेगी। सबसे बड़ी राहत की बात यह है कि इस व्यवस्था के तहत किसानों को बिजली के लिए सिर्फ एक रुपया प्रति यूनिट का भुगतान करना होगा, बाकी बिल हरियाणा सरकार वहन करेगी।
परियोजना का दायरा और किसानों को फायदा
यह परियोजना मुख्य रूप से हिसार शहर के तीन सीवेज शोधन संयंत्रों (एसटीपी) पर निर्भर है, जो गंगवा, सातरोड़ और डाबड़ा में स्थित हैं। इन संयंत्रों से प्रतिदिन लगभग 1.70 करोड़ लीटर (17 मिलियन लीटर) शोधित पानी खेतों तक पहुँचाने की योजना है। पानी की यह आपूर्ति भूमिगत दबावयुक्त पाइपलाइन नेटवर्क से होगी, जिससे रिसाव और वाष्पीकरण के कारण होने वाली बर्बादी काफी हद तक कम हो जाएगी।
सिंचाई विभाग के अनुसार, इस परियोजना से जुड़े किसानों को 24 घंटे पानी उपलब्ध रहेगा। स्वचालित निगरानी और सॉफ्टवेयर आधारित वितरण प्रणाली से जल आपूर्ति को व्यवस्थित और पारदर्शी बनाया जाएगा। अधिकारियों का कहना है कि इससे जल उपयोग दक्षता बढ़ेगी और बिजली की खपत भी घटेगी, जो पारंपरिक सतही सिंचाई की तुलना में कहीं अधिक किफायती है।

नहरी और नलकूप सिंचाई के अधिकारों पर असर नहीं
मुख्यमंत्री के ओएसडी वीरेंद्र सिंह बढ़खालसा ने गाँव गावड़ में आयोजित किसान संवाद कार्यक्रम में साफ किया कि इस परियोजना का मकसद मौजूदा नहरी और नलकूप सिंचाई व्यवस्था के अधिकारों को प्रभावित करना नहीं है। किसानों को अतिरिक्त सिंचाई जल उपलब्ध कराना ही इसका उद्देश्य है। उन्होंने किसानों से ड्रिप और फव्वारा सिंचाई जैसी आधुनिक तकनीकें अपनाने और जल उपयोगकर्ता समितियों को मजबूत बनाने की अपील भी की।
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लागत और समयसीमा
इस परियोजना की कुल लागत केंद्र और हरियाणा सरकार 60:40 के अनुपात में वहन करेंगी। निर्माण कार्य शुरू होने के बाद इसे आठ महीने में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। ठेकेदार चयन की प्रक्रिया फिलहाल जारी है। परियोजना में सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने का प्रस्ताव भी शामिल है, जिससे बिजली खर्च में और कमी आ सकती है। चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (HAU) द्वारा किसानों को आधुनिक सिंचाई तकनीकों का प्रशिक्षण देने की भी योजना है।
यह परियोजना हरियाणा सरकार की उस व्यापक रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत प्रदेश के नौ जिलों—भिवानी, चरखी दादरी, गुरुग्राम, महेंद्रगढ़, नूंह, रेवाड़ी, हिसार, झज्जर और सिरसा—में भूजल पर निर्भरता कम करने के लिए सामुदायिक सिंचाई मॉडल पर काम किया जा रहा है।
जिन किसानों की जमीन इस क्लस्टर के दायरे में आती है, उनके लिए यह सीधा फायदे का सौदा है। पाइपलाइन बिछने का काम शुरू होते ही गाँव स्तर पर जल उपयोगकर्ता समिति के जरिए इसकी निगरानी की जाएगी। अगली कड़ी में ठेकेदार का चयन और निर्माण कार्य की शुरुआत है, जिस पर स्थानीय किसानों की नजर बनी हुई है।








