हरियाणा में सरसों-गेहूं की बुवाई के लिए नहीं होगी खाद की कमी, अक्टूबर में आएगी 7.50 लाख MT खाद
चंडीगढ़। हरियाणा में सरसों की बिजाई और इसके बाद शुरू होने वाले गेहूं के सीजन से पहले खाद की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी की गई है। रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को मिली जानकारी के अनुसार अक्टूबर में प्रदेश को करीब 7.50 लाख मीट्रि…

चंडीगढ़। हरियाणा में सरसों की बिजाई और इसके बाद शुरू होने वाले गेहूं के सीजन से पहले खाद की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी की गई है। रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को मिली जानकारी के अनुसार अक्टूबर में प्रदेश को करीब 7.50 लाख मीट्रिक टन खाद उपलब्ध कराने की योजना है। केंद्र के डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स ने हरियाणा की महीनेवार जरूरत को देखते हुए विभिन्न खाद कंपनियों के लिए सप्लाई प्लान तय किया है। इसमें डीएपी और यूरिया की बड़ी मात्रा शामिल है, जिनकी रबी सीजन में किसानों को सबसे ज्यादा जरूरत रहती है।
केंद्र सरकार भी राज्यों की महीनेवार जरूरत के आधार पर खाद का सप्लाई प्लान जारी करती है और इसकी आवाजाही की निगरानी आईएफएमएस के जरिए की जाती है। डिपार्टमेंट ऑफ फर्टिलाइजर्स ने संसद और पीआईबी के जरिए भी इस व्यवस्था की जानकारी दी है।
| खाद | अक्टूबर के उपलब्ध सप्लाई प्लान में मात्रा |
|---|---|
| डीएपी | करीब 1.50 लाख मीट्रिक टन |
| यूरिया | करीब 3.50 लाख मीट्रिक टन |
| एनपीके व एसएसपी | करीब 40 हजार मीट्रिक टन |
| एमओपी | 10,650 मीट्रिक टन |
| कुल प्रस्तावित आपूर्ति | करीब 7.50 लाख मीट्रिक टन |
उपलब्ध जानकारी में सभी कंपनियों और खाद के ग्रेड का पूरा कंपनीवार ब्योरा अलग-अलग नहीं दिया गया है। बड़ी मात्रा इंडियन पोटाश लिमिटेड के जरिए आने की बात है, जबकि इफको, चंबल और दूसरी कंपनियां भी प्रदेश में खाद पहुंचाएंगी।
सरसों की बिजाई के समय डीएपी की उपलब्धता पर रहेगा जोर
हरियाणा में अक्टूबर के दौरान सरसों की बिजाई तेज होती है। इसके बाद गेहूं की बुवाई शुरू होने पर डीएपी और यूरिया की मांग और बढ़ती है। इसी को देखते हुए खाद की खेप पहले से जिलों तक पहुंचाने की तैयारी की जा रही है।
हरियाणा सरकार भी रबी सीजन की तैयारी पहले से कर रही है। सरकार के जनसंपर्क विभाग के PRMS पोर्टल पर 20 अगस्त को जारी जानकारी के मुताबिक कृषि मंत्री श्याम सिंह राणा ने अधिकारियों को गेहूं और दूसरी रबी फसलों के लिए यूरिया, डीएपी और एनपीके का पर्याप्त स्टॉक रखने के निर्देश दिए थे। उस समय प्रदेश में 2,34,712 मीट्रिक टन यूरिया, 55,081 मीट्रिक टन डीएपी, 35,049 मीट्रिक टन एनपीके और 59,610 मीट्रिक टन एसएसपी उपलब्ध था।
झज्जर पहुंचेगा डीएपी का बड़ा रैक
अक्टूबर की सप्लाई के साथ जिलों में डीएपी पहुंचना भी शुरू हो रहा है। झज्जर में इंडियन पोटाश लिमिटेड का करीब 2600 मीट्रिक टन डीएपी का रैक पहुंचने की उम्मीद है। इसके बाद आवंटन के अनुसार झज्जर के साथ आसपास के जिलों में भी खाद भेजी जाएगी।
इंडियन पोटाश लिमिटेड के सहायक प्रबंधक दीपक शर्मा के मुताबिक रबी सीजन की बढ़ती मांग को देखते हुए सप्लाई व्यवस्था मजबूत की जा रही है। सरसों की बिजाई और गेहूं का सीजन शुरू होने के साथ डीएपी और यूरिया की मांग तेजी से बढ़ती है।
झज्जर आने वाली इस खेप के जिलेवार आवंटन के अलग-अलग आंकड़ों में अभी अंतर सामने आ रहा है, इसलिए उनकी पुष्टि होने तक उन्हें अंतिम आवंटन के रूप में देना सही नहीं होगा। किसानों के लिए अहम बात यह है कि रैक पहुंचने के बाद डीएपी को आसपास के जिलों में निर्धारित आवंटन के अनुसार भेजा जाएगा।
खाद वितरण मेरी फसल-मेरा ब्यौरा से जुड़ा
हरियाणा में खाद वितरण को मेरी फसल-मेरा ब्यौरा से जोड़ा गया है। किसानों की दर्ज फसल और रकबे के आधार पर खाद उपलब्ध कराने की व्यवस्था लागू है। सरकार का कहना है कि इससे वास्तविक किसानों तक खाद पहुंचाने और जमाखोरी रोकने में मदद मिलती है। जून में कृषि मंत्री ने खाद कंपनियों और विभागीय अधिकारियों की बैठक में भी सीजन शुरू होने से पहले पर्याप्त स्टॉक रखने और जिला स्तर पर समय से सप्लाई पहुंचाने के निर्देश दिए थे।
रबी सीजन की तैयारी के दौरान सरकार का जोर केवल कुल स्टॉक बढ़ाने पर नहीं, बल्कि खाद को समय पर जिलों, सहकारी समितियों और बिक्री केंद्रों तक पहुंचाने पर भी है। अक्टूबर की प्रस्तावित आपूर्ति सही समय पर पहुंचती है तो सरसों की बिजाई और इसके बाद गेहूं की बुवाई के दौरान डीएपी और यूरिया की उपलब्धता बेहतर रहेगी।








