हरियाणा बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का दूसरा दिन, जाने कहां कितना हुआ प्रभाव और आज के क्या है प्रबंध
लोकल हरियाणा, गुरुग्राम, 23 अक्टूबर। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रहा। बिजली आपूर्ति में आई रुकावटों ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ाई है। पहले दिन प्रदेश के 15…

लोकल हरियाणा, गुरुग्राम, 23 अक्टूबर। हरियाणा में बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का असर केवल विभागीय कामकाज तक सीमित नहीं रहा। बिजली आपूर्ति में आई रुकावटों ने कई इलाकों में लोगों की परेशानी बढ़ाई है। पहले दिन प्रदेश के 15 जिलों में बिजली व्यवस्था प्रभावित होने की जानकारी सामने आई। हड़ताल के दूसरे दिन भी स्थिति को संभालने के लिए प्रशासन को वैकल्पिक कर्मचारियों की मदद लेनी पड़ रही है।
फीडर बंद होने से कई इलाकों में बिजली संकट
बिजली इंजीनियरों के संगठन के महासचिव रविंद्र घनघस के अनुसार, हड़ताल के दौरान 33 केवी के 118 और 11 केवी के 510 से अधिक फीडर प्रभावित हुए। भिवानी में ही 280 फीडरों के प्रभावित होने का दावा किया गया। कुछ इलाकों में बिजली आपूर्ति लंबे समय तक बहाल नहीं हो सकी और लोगों को 28 घंटे तक परेशानी झेलनी पड़ी।
इन आंकड़ों से साफ है कि विवाद का असर कर्मचारियों और सरकार के बीच बातचीत तक सीमित नहीं है। बिजली व्यवस्था सामान्य रखने की चुनौती भी प्रशासन के सामने है। हालांकि, प्रभावित क्षेत्रों में आपूर्ति बहाल होने की स्थिति अलग-अलग हो सकती है।
व्यवस्था संभालने के लिए लगाए वैकल्पिक कर्मचारी
हड़ताल के बीच सरकार ने बिजली व्यवस्था चलाने के लिए करीब 1,000 वैकल्पिक कर्मचारियों की व्यवस्था की है। इसका उद्देश्य जरूरी सेवाएं जारी रखना और बिजली आपूर्ति में आई रुकावटों को कम करना है।
लेकिन कर्मचारियों की बड़ी संख्या में काम से दूर रहने के बीच व्यवस्था को सामान्य बनाए रखना आसान नहीं है। फीडरों में आई गड़बड़ियों को ठीक करने और प्रभावित इलाकों तक बिजली पहुंचाने के लिए मैदानी स्तर पर काम करना जरूरी है।
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अनिल विज ने हड़ताल को बताया अनावश्यक
बिजली कर्मचारियों की हड़ताल पर हरियाणा के मंत्री अनिल विज ने कहा कि इसकी जरूरत नहीं थी। उनका कहना है कि गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण का लाइसेंस देने से जुड़ा फैसला सरकार ने नहीं, बल्कि नियामक आयोग ने लिया है।
विज के बयान से सरकार का पक्ष सामने आता है। दूसरी ओर, कर्मचारी निजी कंपनी को बिजली वितरण का लाइसेंस देने के फैसले का विरोध कर रहे हैं। इस तरह विवाद का मुख्य मुद्दा बिजली वितरण व्यवस्था में निजी कंपनी की भूमिका और उससे जुड़े कर्मचारियों के विरोध का है।
गुरुग्राम और नूंह में लाइसेंस को लेकर है विरोध
हड़ताल की वजह गुरुग्राम और नूंह में बिजली वितरण के लिए निजी कंपनी को लाइसेंस दिए जाने का विरोध है। कर्मचारी इस फैसले के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं। सरकार का पक्ष है कि संबंधित निर्णय नियामक आयोग ने लिया है, जबकि कर्मचारियों की हड़ताल ने बिजली आपूर्ति बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है।
फिलहाल इस विवाद में दो सवाल अहम हैं—बिजली वितरण के लाइसेंस को लेकर कर्मचारियों की आपत्ति का समाधान कैसे निकलेगा और हड़ताल के दौरान प्रभावित इलाकों में आपूर्ति कितनी जल्दी सामान्य होगी। इसका असर सीधे उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है।








