हरियाणा के गांवों की बदलने वाली है तस्वीर, 320 के बाद 467 और तालाबों का होगा शौन्दर्यकरण; गांवों में ओपन जिम-योगशाला की भी तैयारी
हरियाणा में 320 तालाबों पर काम तेज करने के बाद 467 और तालाबों को संवारने की तैयारी है। जानें किन गांवों में ओपन जिम-योगशाला बन सकती है और तालाब में गंदा पानी रोकने के लिए क्या व्यवस्था होगी।
हरियाणा के गांवों में तालाब अब केवल पानी जमा करने की जगह नहीं रहेंगे। सरकार इन्हें साफ-सुथरे सार्वजनिक स्थान के रूप में विकसित करने की तैयारी कर रही है, जहां ग्रामीण सुबह-शाम घूमने के साथ योग और व्यायाम भी कर सकेंगे। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 320 तालाबों पर चल रहे जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण के काम को जल्द पूरा करने तथा 467 और तालाब चिन्हित कर उन पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
इसके साथ सबसे बड़ा बदलाव तालाबों के पानी को लेकर होगा। गांव की नालियों का गंदा पानी अब सीधे तालाब में डालने के बजाय पहले साफ करने की व्यवस्था तैयार की जाएगी। मुख्यमंत्री ने 25 अगस्त को हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण की बैठक में साफ कहा कि बिना उपचार के गंदा पानी किसी तालाब में नहीं जाना चाहिए।
467 नए तालाबों में क्या-क्या काम होगा?
सरकार ने 467 और तालाबों को चिन्हित कर उन पर काम शुरू करने के निर्देश दिए हैं। इनमें प्राथमिकता ऐसे तालाबों को दी जा रही है जो प्रदूषित हैं, ओवरफ्लो होते हैं या जिनके आसपास की स्थिति खराब है।
तालाबों के जीर्णोद्धार का मतलब केवल उनकी खुदाई या चारदीवारी करना नहीं होगा। हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण का काम तालाबों की सफाई, पुनर्जीवन, पानी की गुणवत्ता सुधारने और उनके आसपास हरियाली व दूसरी सुविधाएं विकसित करने तक फैला हुआ है।
हालांकि अभी जारी जानकारी में 467 तालाबों की जिला और गांववार सूची सार्वजनिक नहीं की गई है। इसलिए किस गांव का तालाब इस नए चरण में शामिल होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी संबंधित सूची सामने आने के बाद ही मिलेगी।
क्या हर तालाब पर ओपन जिम और योगशाला बनेगी?
सरकार के निर्देश का मतलब यह नहीं है कि सभी 467 तालाबों के किनारे अनिवार्य रूप से ओपन जिम और योगशाला बनाई जाएगी।
मुख्यमंत्री ने कहा है कि जिन गांवों में नई योगशाला प्रस्तावित है, वहां उपयुक्त होने पर तालाब के आसपास शेड और जरूरी सुविधाओं वाली योगशाला विकसित की जाए। इसके साथ ओपन जिम की सुविधा भी देने के निर्देश हैं। इसका उद्देश्य ग्रामीणों को तालाब के आसपास नियमित रूप से आने के लिए प्रोत्साहित करना है।
इससे तालाब के आसपास का क्षेत्र सुबह-शाम सैर, योग और व्यायाम के लिए इस्तेमाल हो सकेगा और ग्रामीणों की तालाब की देखरेख में भागीदारी भी बढ़ सकती है।
तालाब में नाली का गंदा पानी आता है तो अब क्या बदलेगा?
यह योजना का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है। हरियाणा के कई गांवों में घरों और नालियों का पानी तालाबों में पहुंचता है, जिससे बदबू, प्रदूषण और तालाब के ओवरफ्लो होने जैसी समस्याएं पैदा होती हैं।
सरकार ने निर्देश दिया है कि गांवों से निकलने वाले घरेलू गंदे पानी को वैज्ञानिक तरीके से साफ करने के बाद ही तालाब में पहुंचाया जाए। इसके लिए जरूरत के अनुसार तालाब से बाहर पंचायत या गांव की जमीन पर छोटे सीवेज उपचार संयंत्र और दूसरी अपशिष्ट जल शोधन व्यवस्थाएं बनाई जा सकती हैं।
छोटे गांवों के लिए सूक्ष्म सीवेज उपचार संयंत्र लगाने पर भी काम करने को कहा गया है।
कुछ तालाबों पर पानी में ऑक्सीजन बढ़ाने वाली यांत्रिक तकनीक और अत्यंत छोटे बुलबुलों वाली नैनो-बबल तकनीक का परीक्षण किया जाएगा। सफल रहने पर इन्हें दूसरे तालाबों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है।
हरियाणा में आखिर कितने तालाब हैं?
बैठक में अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश में कुल 20,100 तालाब हैं।
| क्षेत्र | तालाबों की संख्या |
|---|---|
| ग्रामीण क्षेत्र | 19,219 |
| शहरी क्षेत्र | 881 |
| कुल | 20,100 |
| अभी सौंदर्यीकरण/जीर्णोद्धार का काम | 320 |
| नए तालाबों पर काम शुरू करने की तैयारी | 467 |
| समीक्षा में शामिल अमृत सरोवर | 350 |
सरकार का विशेष फोकस उन तालाबों पर है जहां गंदा पानी जमा हो रहा है या ओवरफ्लो की समस्या है। 350 अमृत सरोवरों की स्थिति की भी बैठक में समीक्षा की गई।
गांव का तालाब खराब है तो शिकायत कैसे होगी?
इस योजना में ग्रामीणों के लिए एक नई सुविधा भी तैयार करने की बात कही गई है।
सरकार तालाबों के लिए ‘म्हारी सड़क’ ऐप जैसी शिकायत व्यवस्था विकसित करेगी। इसके जरिए कोई व्यक्ति खराब पड़े तालाब, गंदे पानी या सुधार की जरूरत से जुड़ी शिकायत स्थान की जानकारी के साथ दर्ज कर सकेगा।
शिकायत संबंधित सरपंच और अधिकारियों तक पहुंचाई जाएगी ताकि उस पर कार्रवाई की जा सके।
यह व्यवस्था अभी विकसित की जानी है, इसलिए इसे मौजूदा चालू शिकायत ऐप नहीं समझना चाहिए। इसके शुरू होने और इस्तेमाल के तरीके की जानकारी बाद में जारी होने की उम्मीद है।
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तालाब बन जाने के बाद उसकी देखरेख कौन करेगा?
सरकार ने इस बार केवल निर्माण पर नहीं बल्कि बाद की देखरेख पर भी जोर दिया है।
हर गांव में तालाब की देखरेख के लिए समिति बनाने की व्यवस्था है। इसमें सरपंच अध्यक्ष होगा और ग्राम सचिव सहित संबंधित प्रतिनिधि शामिल होंगे। इन समितियों के काम की समीक्षा जिला स्तर पर अतिरिक्त उपायुक्त के स्तर से करने के निर्देश दिए गए हैं।
तालाबों के रखरखाव के लिए विकास एवं पंचायत विभाग के बजट का 5 प्रतिशत उपलब्ध कराने का प्रावधान भी बताया गया है। तालाब पर लगे सौर पंप और दूसरी सुविधाओं की देखरेख की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
अगर काम की गुणवत्ता खराब मिलती है या रखरखाव में लापरवाही होती है तो संबंधित अधिकारी की जिम्मेदारी तय करने और कार्रवाई की सिफारिश करने के निर्देश भी प्राधिकरण को दिए गए हैं।
तालाबों से गांव को क्या फायदा मिल सकता है?
तालाबों के पुनर्जीवन का उद्देश्य केवल गांव को सुंदर बनाना नहीं है। हरियाणा तालाब एवं अपशिष्ट जल प्रबंधन प्राधिकरण के मुताबिक तालाब बारिश के पानी के भंडारण, भूजल recharge, जैव विविधता और उपचारित पानी के उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अगर गंदे पानी को साफ करके तालाब तक पहुंचाया जाता है तो बदबू और प्रदूषण कम करने के साथ आसपास के वातावरण में भी सुधार हो सकता है। वहीं तालाब के किनारे हरियाली, योगशाला और ओपन जिम जैसी सुविधाएं विकसित होने से उसी स्थान का उपयोग ग्रामीण सार्वजनिक क्षेत्र के रूप में भी किया जा सकेगा।
अब अगला महत्वपूर्ण कदम 320 तालाबों पर चल रहे काम को पूरा करना और 467 नए तालाबों की गांववार पहचान तथा कार्ययोजना सामने लाना होगा।








