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हरियाणा में बड़ा बदलाव, अब बिल्डर नहीं, सीधे बिजली निगम देगा फ्लैट मालिकों को कनेक्शन

हरियाणा सरकार द्वारा ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले फ्लैट मालिकों को व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन देने की नई नीति की पूरी जानकारी देता है। इसमें वर्तमान सिंगल पॉइंट कनेक्शन व्यवस्था की समस्याएं, बिल्डर के डिफाल्टर हो…

हरियाणा में बड़ा बदलाव! अब बिल्डर नहीं, सीधे बिजली निगम देगा फ्लैट मालिकों को कनेक्शन

हरियाणा सरकार ने ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में रहने वाले लाखों फ्लैट मालिकों को बड़ी राहत देने की तैयारी कर ली है। राज्य सरकार अब बिल्डरों के नाम पर चल रहे सामूहिक बिजली कनेक्शनों की वर्षों पुरानी व्यवस्था को समाप्त करने जा रही है। इसके स्थान पर प्रत्येक फ्लैट मालिक को सीधे बिजली निगम से व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराया जाएगा। ऊर्जा विभाग ने इस संबंध में नई नीति का विस्तृत प्रारूप तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

सिंगल पॉइंट कनेक्शन की पुरानी व्यवस्था क्या थी

साल 2013 में हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) ने ग्रुप हाउसिंग कॉम्प्लेक्सों के लिए सिंगल पॉइंट बिजली कनेक्शन अनिवार्य कर दिया था। इस नियम के तहत 20 या उससे अधिक रिहायशी यूनिट वाले हाउसिंग कॉम्प्लेक्स को एक ही प्राथमिक बिजली कनेक्शन दिया जाता था। इस एक कनेक्शन से पूरी सोसायटी बिजली प्राप्त करती थी और बिल्डर या आरडब्ल्यूए द्वारा अलग-अलग फ्लैटों में ब्रांच कनेक्शन दिए जाते थे।

यह व्यवस्था बिल्डरों के लिए तो सुविधाजनक थी, लेकिन फ्लैट मालिकों के लिए मुसीबतों का कारण बनती रही। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत सहित कई महानगरों की निजी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में मुख्य बिजली कनेक्शन आज भी बिल्डर या डेवलपर के नाम पर है।

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बिल्डर के नाम कनेक्शन होने से क्या-क्या परेशानियां होती हैं

जब पूरी सोसायटी का बिजली कनेक्शन बिल्डर के नाम पर होता है, तो बिल्डर पर ही बिजली बिल जमा करने की जिम्मेदारी होती है। यदि बिल्डर बिजली निगम का बकाया नहीं चुकाता, वित्तीय संकट में फंस जाता है या परियोजना छोड़ देता है, तो उसका सीधा असर वहां रहने वाले हजारों परिवारों पर पड़ता है।

कई बार नियमित रूप से बिजली बिल जमा करने वाले फ्लैट मालिकों को भी बिजली आपूर्ति बाधित होने और तकनीकी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। ऐसे मामलों में फ्लैट मालिक अपनी गलती के बिना ही बिजली संकट और प्रशासनिक उलझनों में फंस जाते हैं।

एक रिपोर्ट के अनुसार, 13 निजी डेवलपर्स ने 16 प्लॉटेड कॉलोनियों और 32 हाउसिंग सोसायटियों में बिजली इंफ्रास्ट्रक्चर मुहैया कराने में विफलता दिखाई और उन पर दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम (डीएचबीवीएन) का कुल 317 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया था।

गुरुग्राम की एक सोसायटी में डेवलपर 33 केवी इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने और 5.6 करोड़ रुपये का बैंक गारंटी जमा कराने में विफल रहा, जिसके बाद डीएचबीवीएन ने बिजली आपूर्ति वापस ले ली।

ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने क्यों उठाया यह मामला

पिछले कुछ समय में प्रदेश की कई सोसायटियों के निवासियों ने व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन देने की मांग उठाई थी। कई मामलों में ऊर्जा मंत्री अनिल विज के हस्तक्षेप के बाद फ्लैट मालिकों को अलग-अलग बिजली कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।

हालांकि हर मामले में अलग-अलग निर्णय लेने के बजाय अब सरकार पूरे प्रदेश के लिए एक समान और स्पष्ट नीति लागू करने जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी सोसायटी के निवासियों को इस प्रकार की परेशानियों का सामना न करना पड़े।

नई नीति में क्या होगा बदलाव

नई नीति के तहत बिल्डर के नाम सामूहिक कनेक्शन जारी करने की व्यवस्था पूरी तरह खत्म हो जाएगी। प्रदेश सरकार की योजना बिल्डर के नाम चल रहे सामूहिक बिजली कनेक्शन की जगह फ्लैट मालिकों को व्यक्तिगत कनेक्शन देने की है।

इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि बिल्डर के डिफाल्टर या दिवालिया होने या फिर किसी कानूनी विवाद में फंसने पर भी सोसायटी में बिजली आपूर्ति प्रभावित नहीं होगी。 नई व्यवस्था में बिजली आपूर्ति को बिल्डर के बजाय सीधे उपभोक्ता से जोड़ने का रास्ता तैयार होगा।

ऊर्जा विभाग नई नीति का विस्तृत प्रारूप तैयार करेगा, जिसमें यह तय किया जाएगा कि किन परिस्थितियों में बिल्डर के नाम चल रहे सामूहिक कनेक्शन को व्यक्तिगत कनेक्शनों में बदला जाएगा, इसके लिए आवश्यक शर्तें क्या होंगी और बिजली निगम की भूमिका किस प्रकार तय होगी।

फ्लैट मालिकों को क्या-क्या लाभ होंगे

व्यक्तिगत कनेक्शन मिलने से उपभोक्ताओं को न केवल निर्बाध बिजली आपूर्ति मिलेगी, बल्कि बिलिंग, शिकायत निवारण और अन्य सेवाओं में भी पारदर्शिता आएगी। फ्लैट मालिक सीधे बिजली निगम से जुड़ेंगे, जिससे उनकी शिकायतों का समाधान भी सीधे बिजली निगम करेगा।

एक और बड़ा लाभ यह होगा कि फ्लैट मालिक अब अपने फ्लैट में इन्वर्टर लगा सकेंगे। साथ ही, बिजली की दरें भी कम होंगी। ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों के निवासी फिलहाल 7 से 14 रुपये प्रति यूनिट बिजली के लिए चुकाते हैं, जबकि सीधे घरेलू उपभोक्ता 2 से 7 रुपये प्रति यूनिट चुकाते हैं।

कॉमन एरिया मेनटेनेंस और बिजली बिल को लेकर एचईआरसी का बड़ा आदेश

हरियाणा बिजली नियामक आयोग (एचईआरसी) ने फरवरी 2026 में एक महत्वपूर्ण आदेश दिया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि जहां बिजली बिल को कॉमन एरिया मेनटेनेंस (सीएएम) शुल्क के साथ जोड़ा जाता है, वहां गैर-बिजली शुल्क का भुगतान न करने पर बिजली आपूर्ति बंद नहीं की जा सकती।

इस आदेश से हाउसिंग सोसायटी के निवासियों को बड़ी राहत मिली है, क्योंकि कई सोसायटियों में आरडब्ल्यूए बिजली बिल के साथ अन्य शुल्क भी वसूलती है और उसे न देने पर बिजली काट देने की धमकी दी जाती थी।

सबस्टेशन बनाने की जिम्मेदारी अब बिजली निगम की

हरियाणा सरकार ने एक और अहम नीतिगत बदलाव किया है। अब हाउसिंग सोसायटियों को बिजली सबस्टेशन बनाने का बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। सबस्टेशन अब बिजली वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) बनाएंगी, जबकि डेवलपर्स को स्वीकृत लोड के लिए भुगतान करना होगा और सबस्टेशन के लिए मुफ्त जमीन उपलब्ध करानी होगी।

इसके अलावा, उपभोक्ताओं को अब सर्विस कनेक्शन शुल्क नहीं देना होगा।

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का भी राहत भरा आदेश

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने भी इस मामले में अहम आदेश दिया है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि सिस्टम की विफलता के कारण निवासियों को बिना राहत के नहीं छोड़ा जा सकता। हाईकोर्ट ने जिरकपुर की एक परित्यक्त हाउसिंग परियोजना में 500 से अधिक परिवारों को अस्थायी बिजली कनेक्शन देने का निर्देश दिया।

हाईकोर्ट के इस आदेश से साफ है कि अदालत भी बिल्डरों की गलती के कारण फ्लैट मालिकों को परेशान होने देने के पक्ष में नहीं है।

नई नीति से कितने परिवारों को राहत मिलेगी

हरियाणा के महानगरों में बड़ी संख्या में ग्रुप हाउसिंग सोसायटियां मौजूद हैं। गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत, पंचकूला समेत कई शहरों में हजारों सोसायटियां हैं, जहां लाखों परिवार रहते हैं। इन सभी परिवारों को इस नई नीति से सीधा लाभ मिलेगा।

जिन सोसायटियों में बिल्डर ने परियोजना अधूरी छोड़ दी है या वह दिवालिया हो गया है, वहां रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक राहत मिलेगी।

आवेदन प्रक्रिया क्या होगी

फिलहाल ऊर्जा विभाग नई नीति का प्रारूप तैयार कर रहा है। एक बार नीति अंतिम रूप लेने के बाद, फ्लैट मालिक बिजली निगम के कार्यालयों या ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से व्यक्तिगत कनेक्शन के लिए आवेदन कर सकेंगे।

आवेदन के लिए फ्लैट मालिकों को अपनी संपत्ति के कागजात, पहचान प्रमाण, पते का प्रमाण और सोसायटी से संबंधित दस्तावेज जमा करने होंगे। नीति में यह भी स्पष्ट किया जाएगा कि पुराने सामूहिक कनेक्शन से व्यक्तिगत कनेक्शन में बदलने की प्रक्रिया क्या होगी और इसके लिए क्या शर्तें होंगी।

नई नीति कब लागू होगी

हरियाणा ऊर्जा विभाग ने नई नीति का ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है。 उम्मीद है कि जल्द ही नीति को अंतिम रूप देकर लागू कर दिया जाएगा। हालांकि अभी इसकी कोई आधिकारिक तारीख सामने नहीं आई है।

एक बार नीति लागू होने के बाद, सभी ग्रुप हाउसिंग सोसायटियों में फ्लैट मालिक अपने नाम पर व्यक्तिगत बिजली कनेक्शन ले सकेंगे और बिल्डर के डिफाल्टर होने पर बिजली आपूर्ति बाधित होने की समस्या से हमेशा के लिए मुक्ति मिल जाएगी।

सोसायटी के सामान्य क्षेत्रों के लिए क्या होगा व्यवस्था

नई नीति में सोसायटी के सामान्य क्षेत्रों – जैसे लिफ्ट, सीढ़ियों की रोशनी, पानी की मोटर, सीसीटीवी कैमरे, कॉमन रूम आदि – के लिए भी बिजली कनेक्शन की व्यवस्था की जाएगी।

इन सामान्य क्षेत्रों के बिजली बिल का भुगतान आरडब्ल्यूए या सोसायटी प्रबंधन द्वारा किया जाएगा, जिसे सभी फ्लैट मालिकों के बीच बराबर बांटा जाएगा। हालांकि एचईआरसी के आदेश के अनुसार, बिजली बिल को अन्य शुल्कों के साथ नहीं जोड़ा जा सकेगा और गैर-बिजली शुल्क न देने पर बिजली नहीं काटी जा सकेगी।

ईवी चार्जिंग और अन्य नए प्रावधान

हरियाणा सरकार ने हाल ही में बिल्डिंग कोड 2017 में संशोधन करके सभी नई और पुनर्विकसित रिहायशी इमारतों में ईवी चार्जिंग अनिवार्य कर दिया है। यह संशोधन 5 जून 2026 से प्रभावी हो गया है।

नए नियमों के तहत रिहायशी परियोजनाओं, जिनमें ग्रुप हाउसिंग सोसायटी, सहकारी हाउसिंग परियोजनाएं और आरडब्ल्यूए द्वारा प्रबंधित कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, में हर पांच पार्किंग स्थानों के लिए कम से कम एक ईवी चार्जिंग प्वाइंट होना चाहिए।

मौजूदा रिहायशी इमारतों में व्यक्तिगत फ्लैट मालिक अपने आवंटित पार्किंग स्थानों पर ईवी चार्जिंग उपकरण लगा सकते हैं, बशर्ते वे विद्युत और अग्नि सुरक्षा मानकों को पूरा करें और फायर विभाग तथा स्थानीय बिजली वितरण कंपनी से प्रमाणन प्राप्त करें।

ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को फ्लोर एरिया रेशियो (एफएआर) गणना से बाहर रखा गया है, जिससे डेवलपर्स को बिना किसी अतिरिक्त बोझ के चार्जिंग सुविधाएं बनाने में आसानी होगी।

लेखक

Kuldeep Singh

कुलदीप सिंह LocalHaryana.com पर लेखक के रुप में कार्यरत हैं। वे वर्ष 2021 से डिजिटल पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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