हरियाणा में इलेक्ट्रिक वाहन खरीदना हुआ आसान, अब खरीदारों को सीधे खाते में मिलेगी सब्सिडी और रोड टैक्स होगा फ्री
हरियाणा सरकार राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) में बढ़ते प्रदूषण को कम करने के लिए ई-वाहन नीति में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने हाल ही में हुई ई-वाहन नीति की समीक्षा बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए कि इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया, कारों और टाटा मैजिक जैसे ई-वाहनों पर मिलने वाली सरकारी सब्सिडी सीधे लाभार्थी के खाते में भेजी जाए। इससे खरीदारों को वाहन खरीदते समय ही सब्सिडी का लाभ मिल सकेगा और उन्हें अलग से आवेदन करने की जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा।
क्यों बदली जा रही है हरियाणा की ई-वाहन नीति
हरियाणा एनसीआर का अहम हिस्सा है और गुरुग्राम व फरीदाबाद जैसे शहरों में वायु प्रदूषण लगातार चिंता का विषय बना हुआ है। प्रदूषण मुक्त भारत के संकल्प के तहत केंद्र सरकार ने पीएम ई-वाहन जैसे कार्यक्रम शुरू किए हैं। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए हरियाणा ई-वाहन नीति-2022 में दिल्ली की तर्ज पर संशोधन किए जाने की जरूरत महसूस की गई। दिल्ली सरकार ने हाल ही में ईवी नीति 2.0 लागू की है, जो 1 जुलाई 2026 से प्रभावी हो गई है और 31 मार्च 2030 तक लागू रहेगी।
हरियाणा सरकार चाहती है कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की दर तेज हो और लोग पर्यावरण अनुकूल वाहनों की ओर रुख करें। इसके लिए नीति में ऐसे प्रावधान किए जा रहे हैं जो आम उपभोक्ता के लिए ई-वाहन खरीदना आसान और सस्ता बनाएं।
ई-वाहन खरीद पर मिलेगी सब्सिडी, सीधे खाते में आएगी राशि
सबसे बड़ा बदलाव सब्सिडी वितरण की प्रक्रिया में किया जा रहा है। अब तक ई-वाहन खरीदने वालों को सब्सिडी के लिए अलग से आवेदन करना पड़ता था, लेकिन नई व्यवस्था में यह सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री राव नरबीर सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि सब्सिडी की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाया जाए।
राव नरबीर सिंह ने पहले ही घोषणा की थी कि 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर दी जाने वाली सब्सिडी को फिर से बहाल किया जाएगा। इसके अलावा नए इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदने और पुराने थ्री-व्हीलर बदलने पर भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित अग्रवाल ने बताया कि हरियाणा की मौजूदा ई-वाहन नीति 2027 तक लागू है और केंद्र सरकार व दिल्ली सरकार की नीतियों का अध्ययन कर सभी आवश्यक संशोधन जल्द किए जाएंगे।
रजिस्ट्रेशन फीस और रोड टैक्स पूरी तरह माफ
हरियाणा सरकार ई-वाहनों के लिए रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स पूरी तरह माफ करने की तैयारी में है। फिलहाल राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों के रजिस्ट्रेशन पर 20 फीसदी की छूट दी जाती है। नए प्रस्ताव के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों का रजिस्ट्रेशन पूरी तरह मुफ्त कर दिया जाएगा।
यह कदम पड़ोसी राज्यों चंडीगढ़, दिल्ली और उत्तर प्रदेश की नीतियों को देखते हुए उठाया गया है। चंडीगढ़ ने करीब चार साल पहले ईवी नीति लागू की थी, जिसमें मुफ्त रजिस्ट्रेशन और सब्सिडी दी जाती थी। इसका फायदा उठाने के लिए कई हरियाणा निवासियों ने चंडीगढ़ में अपने वाहन पंजीकृत करवाने शुरू कर दिए थे, जिससे हरियाणा सरकार पर भी इसी तरह की राहत देने का दबाव बढ़ गया।
परिवहन मंत्री अनिल विज ने इस प्रस्ताव को पहले ही मंजूरी दे दी है और इसे मुख्यमंत्री के पास अंतिम विचार के लिए भेज दिया गया है। हालांकि, कुछ अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा प्रस्ताव में सीधे खरीद सब्सिडी शामिल नहीं है, लेकिन उद्योग विभाग के माध्यम से नई ईवी नीति का मसौदा तैयार किया जा रहा है, जिसमें सब्सिडी के प्रावधान भी शामिल किए जा सकते हैं।
500 इलेक्ट्रिक बसें और 200 चार्जिंग स्टेशन तैयार
एयर क्वालिटी कंट्रोल प्रोजेक्ट के तहत गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत और झज्जर में 90 करोड़ रुपये की लागत से 500 इलेक्ट्रिक बसें संचालित की जाएंगी। इन बसों के सुचारू संचालन के लिए 200 चार्जिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। चार्जिंग स्टेशन विकसित करने वालों को भी विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा।
मुख्यमंत्री कार्यालय की प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, यह परियोजना एनसीआर में वायु गुणवत्ता सुधारने की दिशा में एक बड़ा कदम है। 500 इलेक्ट्रिक बसें चलने से न सिर्फ सार्वजनिक परिवहन बेहतर होगा, बल्कि डीजल बसों से होने वाले प्रदूषण में भी काफी कमी आएगी।
पीएम ई-ड्राइव योजना से मिलेगा बढ़ावा
केंद्र सरकार की पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत हरियाणा में ई-वाहन चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को तेजी से बढ़ाया जा रहा है। इस योजना की शुरुआत 1 अक्टूबर 2024 को 10,900 करोड़ रुपये के बजट के साथ हुई थी। हाल ही में इस योजना को 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दिया गया है।
पीएम ई-ड्राइव योजना के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी 31 जुलाई 2026 तक और इलेक्ट्रिक तिपहिया वाहनों (ई-रिक्शा व ई-कार्ट) के लिए 31 मार्च 2028 तक बढ़ा दी गई है। केंद्र ने सार्वजनिक ईवी चार्जिंग स्टेशनों के लिए 2,000 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं, और देश भर में 29,000 से अधिक सार्वजनिक चार्जिंग स्टेशन पहले ही स्थापित किए जा चुके हैं।
उत्तर हरियाणा बिजली वितरण निगम (यूएचबीवीएन) को इस परियोजना के लिए राज्य की नोडल एजेंसी नियुक्त किया गया है। हरियाणा सरकार अब सरकारी जमीन और कार्यालय परिसरों को सार्वजनिक चार्जिंग नेटवर्क के लिए मैप कर रही है। गुरुग्राम में पहले से ही करीब 130 से 150 ईवी चार्जिंग कनेक्टर, स्टेशन और बैटरी स्वैपिंग प्वाइंट मौजूद हैं, और 2026 के अंत तक 15 और सार्वजनिक चार्जिंग स्पॉट जोड़ने की योजना है।
दिल्ली ईवी नीति 2.0 से क्या सीख रही है हरियाणा
दिल्ली सरकार ने 1 जुलाई 2026 से ईवी नीति 2.0 लागू कर दी है। इस नीति के तहत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन खरीदने पर पहले साल 30,000 रुपये की सब्सिडी मिलेगी। अगर कोई व्यक्ति अपनी BS-IV कार को स्क्रैप कराता है और नई इलेक्ट्रिक कार खरीदता है, तो उसे विशेष प्रोत्साहन दिया जाएगा। दिल्ली सरकार ने नई ईवी नीति के तहत एक ऑनलाइन सब्सिडी पोर्टल भी लॉन्च किया है।
दिल्ली की इस नीति को देखते हुए हरियाणा सरकार भी अपनी नीति में संशोधन कर रही है। खासकर गुरुग्राम और फरीदाबाद जैसे एनसीआर शहरों में जहां प्रदूषण का स्तर दिल्ली से भी अधिक होता है, वहां ई-वाहनों को बढ़ावा देना और भी जरूरी हो गया है।
नई इमारतों में ईवी चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य
हरियाणा सरकार ने नई बिल्डिंग में ईवी चार्जिंग स्टेशन लगाना अनिवार्य कर दिया है। नए ड्राफ्ट के मुताबिक, आवासीय और गैर-आवासीय इमारतों में ईवी चार्जिंग स्टेशन की व्यवस्था करनी होगी। आवासीय और ग्रुप हाउसिंग बिल्डिंग में हर पांच पार्किंग स्थानों के लिए कम से कम एक ईवी चार्जिंग प्वाइंट होना चाहिए। वहीं शॉपिंग मॉल, कार्यालय परिसरों और होटलों जैसी वाणिज्यिक इमारतों में हर तीन पार्किंग स्थानों पर एक चार्जिंग प्वाइंट अनिवार्य होगा।
यह नियम ईवी चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर को बढ़ावा देने और लोगों को इलेक्ट्रिक वाहन अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। नोटिफिकेशन के अनुसार, बेसमेंट और स्टिल्ट पार्किंग क्षेत्रों में चार्जिंग स्टेशन लगाए जा सकते हैं, बशर्ते अग्नि और विद्युत सुरक्षा मानकों का पालन किया जाए।
एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए अर्जुन एसपीबी परियोजना
विश्व बैंक के वित्तीय सहयोग से केंद्र सरकार ने अर्जुन एसपीबी (एयर क्वालिटी मैनेजमेंट) का गठन किया है। इसके माध्यम से एनसीआर में वायु प्रदूषण कम करने के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाएं लागू की जाएंगी, जिनमें इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना प्रमुख हिस्सा होगा।
इस परियोजना के तहत उद्योगों में स्वच्छ डीजी सेट के उपयोग को बढ़ावा देना, लगातार उत्सर्जन निगरानी प्रणाली (सीईएमएस) उपकरण लगाने पर सहायता, शहरी निकायों में धूल एवं ठोस कचरा प्रबंधन की क्षमता बढ़ाना, पराली जलाने की घटनाओं में कमी लाना, बायो-डीकंपोजर के उपयोग पर अनुसंधान, वायु गुणवत्ता परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करना और सीएक्यूएम स्टेशनों का विकास जैसे कार्य भी किए जाएंगे।
एनसीआर जिलों में पुराने वाहनों की जगह लेंगे ई-वाहन
एनसीआर के 13 जिलों में पुराने ट्रक और बसों को हटाने की योजना है। केंद्र सरकार ने प्रदूषण रोकने के लिए यह कदम उठाया है, जिसका असर हरियाणा पर भी होगा। पुराने वाहनों की जगह नए बीएस-6 या इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने पर ब्याज सब्सिडी, टैक्स छूट और अन्य वित्तीय लाभ दिए जाएंगे।
हरियाणा परिवहन विभाग ने 24 जून 2026 को एक नोटिफिकेशन जारी किया, जिसके तहत एनसीआर जिलों में नए बीएस-6 कम्प्लायंट ट्रक और बस, इलेक्ट्रिक वाहन और सीएनजी वाहन खरीदने पर 100 फीसदी मोटर व्हीकल टैक्स छूट दी जाएगी। पुराने ट्रक और बसों पर 50 फीसदी छूट का प्रावधान है। यह टैक्स लाभ वाहन के पहली बार पंजीकरण की तारीख से 10 साल तक लागू रहेगा।
हरियाणा कैबिनेट ने एनसीआर क्षेत्र में केवल सीएनजी और इलेक्ट्रिक वाहनों को ही संचालन के लिए प्रोत्साहित करने का फैसला किया है। इसके अलावा 1 अक्टूबर 2026 से एनसीआर जिलों के सभी 2,780 ईंधन स्टेशनों पर “नो पीयूसीसी, नो फ्यूल” नीति लागू होगी।
ई-वाहनों को मिलेगा और अधिक प्रोत्साहन
डॉ. अमित अग्रवाल ने आश्वस्त किया है कि केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार की नीतियों का अध्ययन कर सभी आवश्यक संशोधन जल्द किए जाएंगे, ताकि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को और अधिक प्रोत्साहन मिल सके। राव नरबीर सिंह का मानना है कि इन बदलावों से हरियाणा स्वच्छ एवं प्रदूषण मुक्त परिवहन की दिशा में तेजी से आगे बढ़ेगा।
हरियाणा सरकार ने हाल के बजट में भी संकेत दिए थे कि इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए प्रोत्साहन को और बढ़ाया जाएगा। राज्य सरकार की कोशिश है कि हरियाणा इलेक्ट्रिक वाहन और ऑटोमोबाइल विनिर्माण का अग्रणी केंद्र बने।
FAQ
प्रश्न: हरियाणा ई-वाहन नीति 2022 में क्या बदलाव किए जा रहे हैं?
हरियाणा सरकार ई-वाहन नीति में कई बड़े बदलाव कर रही है, जिनमें सब्सिडी सीधे खरीदार के खाते में भेजना, रजिस्ट्रेशन फीस और रोड टैक्स पूरी तरह माफ करना, 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाना और 200 चार्जिंग स्टेशन स्थापित करना शामिल है। नई इमारतों में ईवी चार्जिंग स्टेशन अनिवार्य किया गया है।
प्रश्न: हरियाणा में ई-वाहन खरीदने पर कितनी सब्सिडी मिलेगी?
हरियाणा सरकार 40 लाख रुपये से कम कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहनों पर सब्सिडी देने की तैयारी में है। सब्सिडी सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाएगी। नए इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर खरीदने और पुराने थ्री-व्हीलर बदलने पर भी प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
प्रश्न: हरियाणा में ई-वाहनों पर रजिस्ट्रेशन और रोड टैक्स में कितनी छूट मिलेगी?
हरियाणा सरकार इलेक्ट्रिक दोपहिया, तिपहिया और चारपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन शुल्क और रोड टैक्स को पूरी तरह माफ करने की योजना बना रही है। फिलहाल 20 फीसदी छूट दी जाती है, लेकिन नए प्रस्ताव के तहत यह 100 फीसदी हो जाएगी।
प्रश्न: एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए हरियाणा सरकार क्या कदम उठा रही है?
हरियाणा सरकार एनसीआर में प्रदूषण कम करने के लिए 500 इलेक्ट्रिक बसें चलाएगी, 200 चार्जिंग स्टेशन बनाएगी, पुराने वाहनों को हटाकर ई-वाहन और सीएनजी वाहनों को बढ़ावा देगी, और “नो पीयूसीसी, नो फ्यूल” नीति लागू करेगी। इसके अलावा अर्जुन एसपीबी परियोजना के तहत कई योजनाएं चलाई जा रही हैं।








