हरियाणा के गांवों में 2295 करोड़ से होंगे विकास कार्य, जाने क्या-क्या होंगे काम
हरियाणा के गांवों में सड़क, सिंचाई, पीने के पानी और अनाज भंडारण से जुड़े कामों के लिए 2,295.27 करोड़ रुपये की छह परियोजनाएं तैयार की गई हैं। इनमें 2,180.50 करोड़ रुपये नाबार्ड के ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष से कर्ज…

- गांवों के लिए 2,295 करोड़ की छह परियोजनाएं तैयार
- 57 सड़कों पर 495 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
- पांच गांवों के लिए 744 करोड़ की पेयजल योजना
हरियाणा के गांवों में सड़क, सिंचाई, पीने के पानी और अनाज भंडारण से जुड़े कामों के लिए 2,295.27 करोड़ रुपये की छह परियोजनाएं तैयार की गई हैं। इनमें 2,180.50 करोड़ रुपये नाबार्ड के ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष से कर्ज के रूप में लेने का प्रस्ताव है। सोमवार, 21 सितंबर को मुख्य सचिव अनुराग रस्तोगी ने नाबार्ड की मदद से चल रही ग्रामीण परियोजनाओं की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को काम में तेजी लाने के निर्देश दिए।
नई परियोजनाओं में 57 सड़कों के सुधार और चौड़ीकरण के साथ सिंचाई व्यवस्था पर काम होगा। नूंह और पलवल के पांच बड़े गांवों के लिए 744.59 करोड़ रुपये की पेयजल परियोजना भी तैयार की गई है। इसके अलावा नई भंडारण क्षमता तैयार करने और पुराने गोदामों के पुनर्निर्माण का प्रस्ताव है। हालांकि 2,295 करोड़ रुपये को अभी जारी रकम नहीं माना जाना चाहिए। ये वित्त वर्ष 2026-27 के लिए तैयार परियोजना प्रस्ताव हैं, जिनके लिए नाबार्ड से कर्ज सहायता ली जानी है।
57 सड़कों पर 495 करोड़, सिंचाई के लिए 315 करोड़ का प्रस्ताव
गांवों की सड़क और सिंचाई व्यवस्था इन परियोजनाओं का बड़ा हिस्सा है। राज्य में 57 सड़क परियोजनाओं के लिए कुल 495.71 करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इसमें नाबार्ड के ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष से 470.92 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित है।
इन सड़कों पर सुधार, चौड़ीकरण और मजबूतीकरण के काम किए जाने हैं।
सिंचाई से जुड़े एक दूसरे प्रस्ताव की कुल लागत 315.36 करोड़ रुपये है, जिसमें 299.59 करोड़ रुपये नाबार्ड से लेने का प्रस्ताव है। सड़क और सिंचाई के दोनों प्रस्ताव नाबार्ड के पोर्टल पर जमा किए जा चुके हैं।
यहां यह फर्क जरूरी है कि पोर्टल पर प्रस्ताव जमा होने का मतलब पूरी राशि जारी होना नहीं है। परियोजनाओं की मंजूरी और आगे ऋण जारी होने की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में पूरी होगी।
नूंह-पलवल के 5 गांवों के लिए 744 करोड़ की पानी योजना
पेयजल की सबसे बड़ी परियोजना नूंह और पलवल जिलों के बिछोर, बिसरू, नई, सिंगार और पिंगवां गांवों के लिए तैयार की गई है। इसकी कुल लागत 744.59 करोड़ रुपये है और नाबार्ड से 707.36 करोड़ रुपये की सहायता प्रस्तावित है।
इस परियोजना की खास बात पानी का नया स्रोत तैयार करना है। योजना के तहत यमुना के बाढ़ क्षेत्र में रैनी वेल के जरिए इन गांवों के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ाने की तैयारी है।
पूरी परियोजना को दो चरणों में आगे बढ़ाने की योजना है। करीब 299 करोड़ रुपये के पहले चरण को अभी वित्त विभाग की मंजूरी का इंतजार है। इसलिए पांचों गांवों में 744 करोड़ रुपये का काम शुरू हो चुका है, ऐसा मानना सही नहीं होगा। परियोजना अभी मंजूरी और वित्तीय प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों से गुजर रही है।
गांवों में बढ़ेगी अनाज रखने की क्षमता
ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर के प्रस्तावों में अनाज और दूसरी कृषि उपज के भंडारण की व्यवस्था भी शामिल है। करीब 290.74 करोड़ रुपये की परियोजना में 276.20 करोड़ रुपये की ऋण सहायता प्रस्तावित है।
इसके तहत खाली जमीन पर 2,30,508 मीट्रिक टन की नई भंडारण क्षमता तैयार करने का प्रस्ताव है। वहीं निचले इलाकों में स्थित परिसरों की 1,23,664 मीट्रिक टन क्षमता का पुनर्निर्माण करने की योजना है।
दोनों को मिलाकर करीब 3.54 लाख मीट्रिक टन भंडारण क्षमता से जुड़े निर्माण और पुनर्निर्माण के काम प्रस्तावित हैं। इस परियोजना को नाबार्ड की दूसरी इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय सहायता के तहत आगे बढ़ाने की संभावना भी देखी जा रही है।
गन्नौर मंडी और पानी से जुड़े बड़े प्रोजेक्ट पर भी काम आगे बढ़ा
बैठक में सोनीपत के गन्नौर में बन रही इंडिया इंटरनेशनल हॉर्टिकल्चर मार्केट की प्रगति भी देखी गई। इस परियोजना के लिए नाबार्ड की इंफ्रास्ट्रक्चर सहायता के तहत 1,850 करोड़ रुपये का टर्म लोन मंजूर है।
वित्त वर्ष 2025-26 में 740 करोड़ रुपये जारी किए जाने की योजना थी, जबकि 451 करोड़ रुपये जारी हुए। इस हिसाब से उस अवधि की 289 करोड़ रुपये की राशि बाकी रही।
इस प्रोजेक्ट पर एक नया अपडेट भी है। हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड ने गन्नौर की इस अंतरराष्ट्रीय बागवानी मंडी को चालू करने की रणनीति तैयार करने के लिए सलाहकार के चयन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है। इसके लिए प्रस्ताव आमंत्रित किया गया है। यानी निर्माण के साथ अब मंडी को चलाने और उसके संचालन मॉडल पर भी काम आगे बढ़ रहा है।
बैठक में सूक्ष्म सिंचाई से जुड़ी चार नई परियोजनाओं की भी समीक्षा हुई। संचालन समिति ने इनमें 264.24 करोड़ रुपये के ऋण हिस्से की सिफारिश की है।
इसके अलावा 5,714.80 करोड़ रुपये के जल संरक्षित हरियाणा कार्यक्रम पर भी चर्चा हुई। यह 2,295.27 करोड़ रुपये की छह नई ग्रामीण परियोजनाओं से अलग कार्यक्रम है। इसे 2026 से 2032 तक छह साल में 15 क्लस्टर में लागू करने की योजना है। इसमें नहरों और खालों में सुधार, भूजल रिचार्ज, जलभराव वाली जमीन, सूक्ष्म सिंचाई, फसल विविधीकरण और पानी बचाने वाले दूसरे काम शामिल हैं।








