हरियाणा में पेटेंट शुल्क वापसी के दिशानिर्देश जारी, 50 हजार रुपये तक मदद के लिए कॉलेजों को आदेश
चंडीगढ़। हरियाणा में पेटेंट रजिस्ट्रेशन शुल्क की वापसी के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं। संबंधित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इन्हें लागू करने के आदेश भी भेजे गए हैं। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने रविवार, 27 सितंब…

- जून में घोषित सहायता के अब दिशानिर्देश जारी।
- पात्र कॉलेजों और विश्वविद्यालयों के छात्रों को लाभ।
- संस्थानों में शोध और नवाचार केंद्र सक्रिय करने के निर्देश।
चंडीगढ़। हरियाणा में पेटेंट रजिस्ट्रेशन शुल्क की वापसी के लिए दिशानिर्देश जारी कर दिए गए हैं। संबंधित कॉलेजों और विश्वविद्यालयों को इन्हें लागू करने के आदेश भी भेजे गए हैं। शिक्षा मंत्री महीपाल ढांडा ने रविवार, 27 सितंबर 2026 को बताया कि पात्र छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों को रजिस्ट्रेशन शुल्क की 100 प्रतिशत राशि वापस मिलेगी। सहायता की अधिकतम सीमा 50 हजार रुपये होगी।
सरकार ने जून में उच्च शिक्षा के रोडमैप की समीक्षा के दौरान इस सहायता का उल्लेख किया था। अब ‘हरियाणा पेटेंट समर्थन, व्यवसायीकरण एवं नवाचार सुविधा नीति 2026-27’ के तहत संस्थानों को कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
सरकारी और एडेड संस्थानों के छात्रों को लाभ
हरियाणा सरकार की आधिकारिक घोषणा के अनुसार, नीति प्रदेश के सरकारी तथा सरकारी सहायता प्राप्त कॉलेजों, तकनीकी संस्थानों और राज्य विश्वविद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों एवं शोधकर्ताओं के लिए लागू होगी।
अपने आविष्कार का पेटेंट रजिस्टर कराने पर निर्धारित सीमा के भीतर शुल्क की वापसी की जाएगी। इसका उद्देश्य शोध से निकले नए विचारों और तकनीकों को पेटेंट तक पहुंचाने में आर्थिक सहयोग देना है।
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पेटेंट आवेदन में संस्थानों से भी मिलेगी मदद
नीति में आर्थिक सहायता के साथ संस्थागत सहयोग की व्यवस्था भी है। द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद इसके क्रियान्वयन की नोडल एजेंसी होगी। वह उच्च शिक्षा विभाग, विश्वविद्यालयों और कॉलेजों के साथ समन्वय करेगी।
उच्च शिक्षण संस्थानों में पेटेंट सुविधा केंद्र और बौद्धिक संपदा अधिकार सेल बनाने का प्रावधान है। इनके जरिए आवेदन, विशेषज्ञ सलाह, तकनीक की लाइसेंसिंग और उद्योगों से संपर्क में मदद दी जाएगी।
शिक्षा मंत्री ने संबंधित संस्थानों से अपने शोध और नवाचार केंद्र सक्रिय करने को कहा है, ताकि अधिक छात्र और शोधकर्ता इस सहायता का लाभ ले सकें।








