हिसार। हरियाणा के हिसार शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए प्रस्तावित आउटर रिंग रोड प्रोजेक्ट पर काम आगे बढ़ रहा है। करीब 41 किलोमीटर लंबी इस सड़क को डायमंड शेप में बनाने की योजना है। इसके लिए करीब 270 हेक्टेयर जमीन की जरूरत होगी और जमीन अधिग्रहण पर लगभग 1500 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
हरियाणा सरकार और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) के बीच इस राशि की व्यवस्था को लेकर बातचीत हुई है। 27 अक्टूबर को प्रकाशित ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, इसके लिए बनाई गई कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा ने जनवरी 2027 तक जमीन अधिग्रहण शुरू होने की उम्मीद जताई है।
हिसार रिंग रोड का डिजाइन कैसा होगा?
हिसार के चारों तरफ बनने वाला यह रिंग रोड डायमंड आकार का होगा। 28 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक, इसका डिजाइन फाइनल किया जा चुका है। मय्यड़ के पास हाफ-लूप बनाने की योजना है, ताकि वहां से वाहनों को दो दिशाओं में जाने का रास्ता मिल सके।
प्रस्तावित डिजाइन के अनुसार, एक तरफ का रास्ता कैमरी गांव के पास से होते हुए राजगढ़ रोड के मौजूदा बाईपास से जुड़ेगा। दूसरा रास्ता कैंट के ऊपर से तलवंडी कैंची पहुंचेगा और वहां से चंडीगढ़ रोड से जुड़ जाएगा। दोनों तरफ करीब 18 से 20 किलोमीटर का रास्ता बताया गया है।
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इन गांवों से होकर गुजरेगा रिंग रोड
प्रस्तावित रिंग रोड के लिए हिसार के आसपास के कई गांवों की जमीन लेने की योजना है। 27 अक्टूबर की रिपोर्ट में मुकलान, देवा, हरिकोट, कैमरी, लाडवा, भगाना, मय्यड़, खरड़, नियाणा, धांसू और तलवंडी राणा के नाम बताए गए हैं। इसके अलावा गांधी नगर क्षेत्र का भी जिक्र किया गया है।
रिंग रोड बनने से राजगढ़ रोड और चंडीगढ़ रोड के बीच सीधा संपर्क मिलेगा। राजस्थान, दिल्ली, पंजाब और चंडीगढ़ की तरफ से आने-जाने वाले वाहन शहर के अंदर आए बिना बाहर से निकल सकेंगे।
ध्यान रहे कि ये प्रस्तावित रूट से जुड़े गांवों के नाम हैं। जमीन अधिग्रहण की अंतिम गांववार अधिसूचना आने के बाद ही तय होगा कि किस गांव की कितनी जमीन ली जाएगी।
जमीन खरीदने पर 1500 करोड़ रुपये होंगे खर्च
शुरुआत में एनएचएआई की ओर से इस प्रोजेक्ट का करीब 3000 करोड़ रुपये का अनुमान तैयार किया गया था। इसमें जमीन अधिग्रहण पर लगभग 1000 करोड़ रुपये खर्च होने थे। बाद में जमीन की जरूरत और लागत का अनुमान बढ़ने से जमीन अधिग्रहण का खर्च करीब 1500 करोड़ रुपये पहुंच गया। सितंबर की रिपोर्ट में निर्माण सहित पूरे प्रोजेक्ट का अनुमान 3500 करोड़ रुपये से ज्यादा बताया गया था। यह अंतिम स्वीकृत लागत नहीं है।
जमीन के लिए 1500 करोड़ रुपये जुटाने के दो विकल्पों पर विचार किया गया। पहले विकल्प में केंद्र सरकार और हरियाणा सरकार 750-750 करोड़ रुपये देंगी। दूसरे विकल्प में जमीन की रजिस्ट्री से मिलने वाले टैक्स का 2 प्रतिशत हिस्सा 15 साल तक एनएचएआई को देने की बात है। जीएसटी से मिलने वाली राशि के इस्तेमाल पर भी विचार किया गया है।
27 अक्टूबर की रिपोर्ट में मंत्री रणबीर गंगवा ने बताया था कि चार विभागों के अधिकारियों की कमेटी अपनी रिपोर्ट सौंप चुकी है। अब सरकार को वित्तीय व्यवस्था के विकल्प पर फैसला लेना है।
पहले चार लेन बनेगा रोड, जमीन छह लेन के हिसाब से ली जाएगी
इस रिंग रोड को शुरुआत में चार लेन बनाने की योजना है, लेकिन जमीन का अधिग्रहण छह लेन सड़क की जरूरत को ध्यान में रखकर किया जाएगा। इससे आगे चलकर वाहनों की संख्या बढ़ने पर सड़क को चौड़ा करने के लिए दोबारा जमीन लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सितंबर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, करीब 270 हेक्टेयर जमीन की जरूरत बताई गई थी।
हिसार को जाम से कैसे मिलेगी राहत?
फिलहाल हिसार के अंदरूनी बाईपास पर रोज करीब 25 हजार वाहनों का दबाव बताया गया है। आउटर रिंग रोड बनने के बाद लगभग 70 प्रतिशत ट्रैफिक शहर के बाहर से निकल सकेगा। यह अनुमान अमर उजाला की 28 सितंबर की रिपोर्ट में दिया गया है।
इस सड़क का सबसे बड़ा फायदा भारी वाहनों को मिलेगा। राजस्थान, दिल्ली और चंडीगढ़ की तरफ जाने वाले वाहन चालकों को शहर के भीड़भाड़ वाले रास्तों से नहीं गुजरना पड़ेगा। इससे शहर के प्रमुख चौराहों पर जाम कम होने, सफर का समय बचने और सड़क हादसों का खतरा घटने की उम्मीद है।
हिसार रिंग रोड का काम कब शुरू होगा?
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने 12 सितंबर 2026 को हिसार बाईपास सहित प्रदेश के पांच बड़े बाईपास प्रोजेक्ट को मंजूरी दी थी। इस बैठक में केंद्र और राज्य सरकार के बीच लागत की हिस्सेदारी तय करने के लिए तीन सदस्यीय कमेटी भी बनाई गई थी।
27 अक्टूबर को प्रकाशित रिपोर्ट में पीडब्ल्यूडी मंत्री रणबीर गंगवा ने जनवरी 2027 तक जमीन अधिग्रहण का काम शुरू होने की उम्मीद जताई थी। इसका मतलब है कि अभी जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया शुरू होने और उसके बाद निर्माण की तैयारी बाकी है। जनवरी 2027 की तारीख फिलहाल मंत्री की जताई उम्मीद है, निर्माण शुरू होने की पक्की तारीख नहीं।










