पानीपत अनाज मंडी में बारिश से भीगा धान, जलभराव के बीच फसल सुखाने के लिए जगह की कमी
पानीपत। नई अनाज मंडी में बारिश से खुले में पड़ा धान भीग गया है। मंडी की सड़कों पर पानी जमा होने से किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। आवक तेज होने के कारण परिसर में पहले से धान के ढेर लगे हैं। अब भीगी फसल फैलाकर…

- खुले में रखी धान की ढेरियां बारिश में भीगीं।
- मंडी की सड़कों पर बरसाती पानी जमा हुआ।
- बारिश से पहले भी उठी थी निकासी की समस्या।
पानीपत। नई अनाज मंडी में बारिश से खुले में पड़ा धान भीग गया है। मंडी की सड़कों पर पानी जमा होने से किसानों और आढ़तियों की परेशानी बढ़ गई है। आवक तेज होने के कारण परिसर में पहले से धान के ढेर लगे हैं। अब भीगी फसल फैलाकर सुखाने के लिए जगह कम पड़ रही है।
बारिश के बाद किसानों के सामने फसल में बढ़ी नमी दूर करने की समस्या है। मंडी में जगह घिरी होने और जलभराव के कारण धान को सूखी जगह पर फैलाना भी मुश्किल हो रहा है। फसल बेचने पहुंचे किसानों का इंतजार बढ़ गया है।
पहले भी उठाया गया था पानी निकासी का मुद्दा
मंडी में पानी निकासी की समस्या बारिश से पहले भी सामने आई थी। रविवार, 27 सितंबर को प्रकाशित अमर उजाला की रिपोर्ट में पानीपत आढ़ती एसोसिएशन के प्रधान धर्मवीर मलिक ने निकासी की व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाया था। मंडी में जगह-जगह घास और कचरा होने की शिकायत भी की गई थी।
आढ़तियों ने मौसम को देखते हुए किसानों से तीन दिन तक धान नहीं लाने की अपील की थी। अब बारिश के बाद परिसर में रखी फसल को संभालने और सुखाने का काम बढ़ गया है।
बासमती की आवक तेज, पीआर की सरकारी खरीद का इंतजार
नई अनाज मंडी में शुक्रवार, 25 सितंबर को सात हजार क्विंटल बासमती धान पहुंचा था। दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, बासमती की खरीद चल रही थी, जबकि पीआर धान की खरीद शुरू नहीं हुई थी। अगले दिन की स्थिति पर अमर उजाला की रिपोर्ट में भी पीआर की सरकारी खरीद का इंतजार जारी होने की बात सामने आई थी।
सरकारी खरीद के लिए धान में नमी का मानक 17 प्रतिशत है। हरियाणा सरकार की 25 सितंबर की विज्ञप्ति में भी इस मानक का उल्लेख है। मंडी में फिलहाल भीगे धान को सुखाने और पानी निकासी की व्यवस्था किसानों व आढ़तियों की सबसे बड़ी जरूरत बनी हुई है।








