हरियाणा के इन 6 जिलों में शुरू हुई मिट्टी की डिजिटल ग्रिड मैपिंग, AI बताएगा किस खेत को कितनी खाद और पानी चाहिए

हरियाणा के 6 जिलों में मिट्टी की डिजिटल ग्रिड मैपिंग शुरू। AI बताएगा किस खेत को कितनी खाद और पानी चाहिए। जानें किसानों को क्या फायदा होगा।

लोकल हरियाणा, करनाल, 30 अक्टूबर 2026। हरियाणा के किसानों के लिए खेती का तरीका बदलने वाली एक नई पहल शुरू हुई है। प्रदेश के छह जिलों में मिट्टी की डिजिटल ग्रिड मैपिंग शुरू की गई है, जिसके जरिए खेतों की उर्वरता और पोषक तत्वों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। इस डेटा को एआई आधारित तकनीक से जोड़कर किसानों को बताया जाएगा कि उनके खेत में किस पोषक तत्व की कितनी जरूरत है और कितनी खाद या पानी डालना चाहिए ।

इस पहल में करनाल के साथ कुरुक्षेत्र, अंबाला, कैथल, यमुनानगर और हिसार जिलों को शामिल किया गया है। इसका मकसद खेतों की मिट्टी से जुड़ी जानकारी को एक व्यवस्थित डिजिटल डेटाबेस में दर्ज करना है। इसमें उपग्रह से मिले आंकड़ों और खेतों से लिए गए मिट्टी के नमूनों के विश्लेषण का इस्तेमाल होगा ।

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खेती की लागत घटाने और मिट्टी सुधारने की उम्मीद

डिस्कवरी टू डिलीवरी मॉडल के तहत प्रयोगशालाओं में विकसित इस तकनीक को सीधे खेत तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। अधिकारियों को उम्मीद है कि इससे खेती की लागत कम करने और मिट्टी की सेहत सुधारने में मदद मिलेगी। एआई टूल मृदा परीक्षण के नतीजों के साथ फसल की किस्म, बुआई का समय और फसल की बढ़वार की अवस्था को जोड़कर उर्वरकों की जरूरत का आकलन कर सकता है। इससे बिना जरूरत के यूरिया और डीएपी डालने की प्रवृत्ति कम हो सकती है। इसी तरह मौसम के आंकड़ों के आधार पर बिजाई, सिंचाई और कटाई की योजना बनाने में भी सहायता मिल सकती है ।

किसानों को क्या फायदा

खाद, कीटनाशक और पानी का सिर्फ जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल होने पर किसानों की लागत कम होने की संभावना है। संतुलित पोषण और सिंचाई से मिट्टी की सेहत बनी रह सकती है और भूजल पर दबाव भी घट सकता है। हालांकि, डिजिटल कृषि से लागत में 15 से 25 प्रतिशत तक कमी और उपज में 10 से 20 प्रतिशत तक बढ़ोतरी के जो दावे अलग-अलग अध्ययनों में सामने आए हैं, उन्हें हर फसल और हर किसान के लिए गारंटी नहीं माना जा सकता ।

अभी यह साफ नहीं है कि इस पहल का ठोस फायदा किसानों को कब तक दिखने लगेगा और डिजिटल ग्रिड मैपिंग का काम किन चरणों में पूरा होगा। किसानों को सलाह दी जाती है कि वे अपने नजदीकी कृषि विभाग या कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क करके इस सुविधा की उपलब्धता और तरीके की जानकारी लेते रहें।

Sandeep Kumar

संदीप कुमार LocalHaryana.com के संस्थापक और संपादक हैं। वे वर्ष 2020 से डिजिटल पत्रकारिता और ऑनलाइन समाचार प्रकाशन के क्षेत्र में कार्य कर रहे हैं। वे मुख्य रूप से हरियाणा समाचार, सरकारी योजनाएं, नौकरियां, शिक्षा, खेतीबाड़ी और मौसम से जुड़े विषयों पर लेखन और संपादन करते हैं। उनका प्रयास पाठकों तक तथ्य आधारित, स्पष्ट और उपयोगी जानकारी सरल हिंदी में पहुँचाना है। LocalHaryana.com पर प्रकाशित सामग्री उपलब्ध आधिकारिक सूचनाओं और विश्वसनीय स्रोतों के आधार पर तैयार की जाती है।

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