हरियाणा के अस्पतालों में 5 अक्टूबर से 3 दिनों की नर्सिंग स्टाफ की हड़ताल, ट्रांसफर पॉलिसी बनी वजह
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ ने मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के मुताबिक…

- 5 से 7 अक्टूबर तक रोज दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल
- 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को काले बिल्ले लगाकर करेंगे ड्यूटी
- मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी वापस लेने की मांग
लोकल हरियाणा, चंडीगढ़। हरियाणा के सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में नर्सिंग स्टाफ ने मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी के विरोध में तीन दिन की सांकेतिक हड़ताल का ऐलान किया है। नर्सिंग ऑफिसर्स वेलफेयर एसोसिएशन हरियाणा के मुताबिक सोमवार 5 अक्टूबर से बुधवार 7 अक्टूबर 2026 तक रोज सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक नर्सिंग स्टाफ दो घंटे काम बंद रखेगा।
इससे पहले बुधवार 30 सितंबर और गुरुवार 1 अक्टूबर को प्रदेशभर में कर्मचारी काले बिल्ले लगाकर ड्यूटी करेंगे। एसोसिएशन का कहना है कि ट्रांसफर पॉलिसी के साथ पिछले करीब 15 महीने से यूनिफॉर्म और वाशिंग अलाउंस का भुगतान नहीं होने समेत कई मांगें लंबित हैं। मांगों का समाधान नहीं होने पर आंदोलन आगे बढ़ाने की चेतावनी भी दी गई है।
ट्रांसफर पॉलिसी का विरोध क्यों कर रहा नर्सिंग स्टाफ?
हरियाणा सरकार ने 25 जून 2026 को मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी नोटिफाई की थी। यह सामान्य तौर पर उन नियमित कर्मचारी कैडर पर लागू होती है जहां किसी पद की मंजूर संख्या 50 या इससे अधिक है। ऑनलाइन ट्रांसफर में कर्मचारी की उम्र, कैडर में अनुभव और विशेष परिस्थितियों को मिलाकर अधिकतम 120 अंक के आधार पर मेरिट बनाई जाती है।
नर्सिंग एसोसिएशन का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के नर्सिंग कैडर की ड्यूटी दूसरे विभागों से अलग है। अस्पतालों में कर्मचारियों को मॉर्निंग, इवनिंग और नाइट तीनों शिफ्ट में काम करना पड़ता है। कैडर में बड़ी संख्या में महिला कर्मचारी हैं और दूर-दराज के स्वास्थ्य संस्थानों में पोस्टिंग होने पर परिवार तथा सुरक्षा से जुड़ी परेशानियां बढ़ सकती हैं।
नई पॉलिसी में महिला कर्मचारियों के लिए 10 विशेष अंक का प्रावधान है। विधवा, तलाकशुदा, सिंगल पैरेंट, दिव्यांग कर्मचारी, गंभीर बीमारी और पति-पत्नी की पोस्टिंग जैसे मामलों के लिए भी अलग अंक या सुरक्षा दी गई है। हालांकि जिस कैडर में सभी कर्मचारी महिलाएं हों, वहां महिला होने के अलग 10 अंक नहीं दिए जाते।
एसोसिएशन की मांग है कि नर्सिंग कैडर की काम करने की परिस्थितियों को देखते हुए इसे मॉडल ऑनलाइन ट्रांसफर पॉलिसी से बाहर रखा जाए।
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ट्रांसफर होने पर कर्मचारी कब कर सकता है शिकायत?
नई ट्रांसफर पॉलिसी में कर्मचारी के लिए शिकायत का भी नियम बनाया गया है। अगर किसी कर्मचारी को ट्रांसफर प्रक्रिया से आपत्ति है तो वह आदेश जारी होने के 15 दिन के अंदर ऑनलाइन शिकायत कर सकता है।
लेकिन इसके लिए पहले कर्मचारी को नई जगह पर जॉइन करना होगा। इसके बाद सक्षम अधिकारी को शिकायत पर 15 दिन के अंदर फैसला देना है। ट्रांसफर ड्राइव में कर्मचारियों को पसंद की यूनिट चुनने का मौका भी मिलता है, लेकिन विकल्प नहीं भरने वाले कर्मचारी को प्रदेश में कहीं भी पोस्ट किया जा सकता है।
यही नियम नर्सिंग कर्मचारियों के लिए भी अहम है, क्योंकि एसोसिएशन का मुख्य विरोध दूर के स्वास्थ्य संस्थानों में संभावित पोस्टिंग और शिफ्ट ड्यूटी के दौरान आने वाली परेशानियों को लेकर है।
15 महीने से यूनिफॉर्म और वाशिंग अलाउंस भी लंबित होने का दावा
ट्रांसफर पॉलिसी के अलावा नर्सिंग एसोसिएशन ने यूनिफॉर्म और वाशिंग अलाउंस का मुद्दा भी उठाया है। एसोसिएशन का दावा है कि पिछले करीब 15 महीने से यह भत्ता नहीं मिला है। अभी इस 15 महीने के बकाये की अलग सरकारी पुष्टि सामने नहीं आई है, इसलिए यह एसोसिएशन की ओर से उठाई गई मांग है।
नर्सिंग कर्मचारियों ने एचआरएमएस और एनआईसी रिकॉर्ड में पदनाम का मामला भी उठाया है। उनका कहना है कि कुछ रिकॉर्ड में अब भी पदनाम स्टाफ नर्स दिखाई दे रहा है, जबकि स्वास्थ्य विभाग मौजूदा नियुक्तियों में आधिकारिक तौर पर नर्सिंग ऑफिसर पदनाम का इस्तेमाल कर रहा है। मई 2026 में स्वास्थ्य विभाग ने भी नई नियुक्तियों से संबंधित आदेश इसी पदनाम से जारी किए थे।
पुराने रिकॉर्ड के मुताबिक हरियाणा के सरकारी अस्पतालों में स्टाफ नर्स का पदनाम बदलकर नर्सिंग ऑफिसर किए जाने की प्रक्रिया 2021 में लागू हो चुकी थी। इसलिए एसोसिएशन अब विभागीय ऑनलाइन रिकॉर्ड में भी इसी पदनाम को अपडेट करने की मांग कर रहा है।
फिलहाल 30 सितंबर और 1 अक्टूबर को नर्सिंग कर्मचारी काले बिल्ले लगाकर सामान्य ड्यूटी करेंगे। इसके बाद 5, 6 और 7 अक्टूबर को सुबह 10 से दोपहर 12 बजे तक दो घंटे की सांकेतिक हड़ताल होगी। एसोसिएशन ने कहा है कि इसके बाद भी मांगों पर फैसला नहीं हुआ तो आंदोलन का अगला चरण शुरू किया जा सकता है।








