हरियाणा में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों (ITI) को आधुनिक बनाने और युवाओं को उद्योगों की जरूरत के अनुसार प्रशिक्षण देने की दिशा में एक नया कदम उठाया गया है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की अध्यक्षता में 24 अक्टूबर को हुई स्थायी वित्त समिति की बैठक में प्रधानमंत्री कौशल एवं रोजगार क्षमता परिवर्तन योजना (PM-SETU) के क्रियान्वयन और बजट प्रावधानों को मंजूरी दी गई। इसके तहत कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर की सात सरकारी आईटीआई परियोजना पर कुल 320.44 करोड़ रुपये खर्च करने का प्रावधान मंजूर किया गया है।
इस परियोजना का उद्देश्य प्रशिक्षण की सुविधाओं को बेहतर बनाना, उद्योगों की जरूरत के अनुसार पाठ्यक्रम तैयार करना और प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना है। हालांकि, इस मंजूरी का अर्थ यह नहीं है कि हर प्रशिक्षित युवा को नौकरी या किसी निश्चित वेतन की गारंटी मिल गई है।
हरियाणा में युवाओं को बेहतर रोजगार और आकर्षक वेतन पैकेज दिलाएगी पीएम-सेतु योजना!
मुख्यमंत्री श्री @NayabSainiBJP की अध्यक्षता में स्टैंडिंग फाइनेंस कमेटी ने हरियाणा में पहली बार शुरू की जा रही ‘पीएम-सेतु’ (अपग्रेडेड ITI के माध्यम से प्रधानमंत्री कौशल और रोजगार क्षमता परिवर्तन) योजना के क्रियान्वयन और बजट प्रावधानों को मंजूरी दी। योजना का उद्देश्य सरकारी ITI से प्रशिक्षित युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाना और उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप बेहतर वेतन पैकेज दिलाना है।
बैठक में ₹320.44 करोड़ की लागत वाले कुरुक्षेत्र ITI क्लस्टर प्रोजेक्ट को भी मंजूरी दी गई।
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— DPR Haryana (@DiprHaryana) October 24, 2026
कुरुक्षेत्र की सात ITI पर खर्च होंगे 320.44 करोड़ रुपये
हरियाणा सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, कुरुक्षेत्र आईटीआई क्लस्टर की कुल परियोजना लागत 320.44 करोड़ रुपये तय की गई है। इसमें केंद्र सरकार, हरियाणा सरकार और उद्योग भागीदार की हिस्सेदारी निर्धारित की गई है।
योगदानकर्ता
निर्धारित राशि
केंद्र सरकार
160.22 करोड़ रुपये
हरियाणा सरकार
105.75 करोड़ रुपये
उद्योग भागीदार
54.47 करोड़ रुपये
कुल परियोजना लागत
320.44 करोड़ रुपये
राज्य सरकार के हिस्से के रूप में वित्त वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक 105.75 करोड़ रुपये के बजट प्रावधान को भी मंजूरी दी गई है। बैठक में PM-SETU योजना के लिए अलग बजट मद बनाने की स्वीकृति भी दी गई।
हरियाणा की 60 सरकारी ITI होंगी अपग्रेड, AI-ड्रोन के नए कोर्स; 7 संस्थानों के लिए 320 करोड़ मंजूर
इन सात सरकारी ITI का होगा आधुनिकीकरण
केंद्र सरकार के कौशल विकास एवं उद्यमशीलता मंत्रालय के अनुसार, कुरुक्षेत्र क्लस्टर की रणनीतिक निवेश योजना को 21 सितंबर 2026 को राष्ट्रीय संचालन समिति ने 320 करोड़ रुपये की मंजूरी दी थी। इसके बाद राज्य स्तर पर परियोजना के क्रियान्वयन और बजट प्रावधानों को मंजूरी दी गई। दोनों मंजूरियां अलग-अलग स्तरों पर हुई हैं।
इस क्लस्टर में एक मुख्य संस्थान और छह सहयोगी संस्थान शामिल होंगे।
- राजकीय आईटीआई, कुरुक्षेत्र — मुख्य संस्थान।
- राजकीय महिला आईटीआई, कुरुक्षेत्र।
- राजकीय आईटीआई, कैथल।
- राजकीय महिला आईटीआई, कैथल।
- राजकीय आईटीआई, पिहोवा।
- राजकीय आईटीआई, पबनावा।
- राजकीय महिला आईटीआई, अंबाला सिटी।
इस व्यवस्था को हब-एंड-स्पोक मॉडल कहा जाता है। इसमें मुख्य संस्थान के साथ जुड़े अन्य प्रशिक्षण संस्थानों को भी सुविधाओं और प्रशिक्षण के स्तर पर मजबूत किया जाता है।
जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड बनेगा उद्योग भागीदार
कुरुक्षेत्र क्लस्टर में जिंदल नवीन अवसर लिमिटेड को प्रमुख उद्योग भागीदार बनाया गया है। परियोजना के तहत प्रशिक्षण ढांचे और प्रयोगशालाओं को आधुनिक बनाने तथा उद्योगों की मांग के अनुरूप पाठ्यक्रम विकसित करने पर ध्यान दिया जाएगा।
PM-SETU के अंतर्गत उद्योग भागीदारों की भूमिका प्रशिक्षण सामग्री तैयार करने, विशेषज्ञों के सहयोग, व्यावहारिक प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और रोजगार से जुड़ाव बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है। इसका उद्देश्य आईटीआई में मिलने वाले प्रशिक्षण और कंपनियों की वास्तविक जरूरतों के बीच अंतर कम करना है।
हरियाणा में 60 सरकारी ITI को अपग्रेड करने की योजना
हरियाणा सरकार की 21 सितंबर की समीक्षा बैठक से संबंधित आधिकारिक विज्ञप्ति में प्रदेश की 60 सरकारी आईटीआई को 12 क्लस्टर में उन्नत बनाने की योजना बताई गई थी। इनमें कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI), ड्रोन, इलेक्ट्रिक वाहन, साइबर सुरक्षा, सेमीकंडक्टर और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे उभरते क्षेत्रों के प्रशिक्षण पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।
कुरुक्षेत्र परियोजना इन प्रयासों का एक हिस्सा है। इसका वास्तविक लाभ इस बात पर निर्भर करेगा कि संस्थानों में आधुनिक सुविधाएं और नए प्रशिक्षण कार्यक्रम कब शुरू होते हैं तथा प्रशिक्षण के बाद युवाओं को अप्रेंटिसशिप और रोजगार से कितने प्रभावी ढंग से जोड़ा जाता है।
राज्य सरकार की मौजूदा मंजूरी परियोजना के वित्तीय और प्रशासनिक क्रियान्वयन की दिशा में कदम है। इसे सभी 60 आईटीआई के लिए एक साथ बजट मंजूर होने या सभी प्रशिक्षित युवाओं को नौकरी मिलने की घोषणा के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।





